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संविधान की अनदेखी पर विपक्ष सड़कों पर उतरेगा — सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का केंद्र पर हमला

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संविधान की अनदेखी पर विपक्ष सड़कों पर उतरेगा — सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का केंद्र पर हमला

सारांश

सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का दो-टूक बयान — संविधान की अनदेखी होगी तो विपक्ष सड़कों पर उतरेगा। वोटर लिस्ट में करोड़ों वोटों की कथित छेड़छाड़, चीन से सैन्य पिछड़ेपन की चिंता और जंतर-मंतर के युवाओं के 'विजन ऑफ इंडिया' संदेश को एक साथ जोड़ता बड़ा बयान।

मुख्य बातें

सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने 24 अक्टूबर को कहा कि संविधान की अनदेखी होने पर विपक्ष सड़कों पर उतरना अपना संवैधानिक अधिकार मानता है।
नदवी ने वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया — दिल्ली में 10 जीवित लोगों को मृत दिखाने और लखीमपुर खीरी में 10,000 अतिरिक्त वोट मिलने का उल्लेख किया।
आईटीबीपी महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर के कथित बयान का हवाला देते हुए कहा कि भारत हथियारों में चीन से काफी पीछे है।
जंतर-मंतर पर युवाओं के प्रदर्शन को सराहा और कहा कि बच्चों ने हिंदू-मुस्लिम विभाजन खत्म करने का स्पष्ट संदेश दिया।
कश्मीरियों के साथ समानता और सम्मान की पैरवी करते हुए कारगिल युद्ध में उनके बलिदान का स्मरण कराया।

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने 24 अक्टूबर को नई दिल्ली में स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब भी सत्तारूढ़ दल संविधान की अनदेखी करेगा, विपक्ष सड़कों पर उतरने का अपना संवैधानिक अधिकार इस्तेमाल करेगा। उन्होंने वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों और विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दों पर केंद्र सरकार को सीधे घेरा।

संविधान और विपक्ष की भूमिका

नदवी ने कहा, 'संविधान ने विपक्ष को इसीलिए स्कोप दिया है कि जब-जब सत्तारूढ़ पार्टी अहंकार में डूबे, संविधान की अनदेखी करने लगे और उसके कदम हक से हट जाएं तो विपक्ष उनको टोक सके और आवाम के जज्बात, उनकी भावनाओं को सत्ता तक पहुंचाए, ताकि सत्तारूढ़ दल अपनी गलतियों को माने और अपने कदम पीछे हटाए। यह संवैधानिक तरीका है।' उन्होंने इंडी गठबंधन के गठन का संदर्भ देते हुए कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक पर संसद में हुई वोटिंग के समय जो दल एकजुट हुए, उन्हीं का नाम इंडी गठबंधन पड़ा।

वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप

सपा सांसद ने कहा कि करोड़ों लोगों के वोट कथित तौर पर मतदाता सूची से हटाए गए, जिससे जनता में बेचैनी पैदा होना स्वाभाविक है। उन्होंने दिल्ली की एक हालिया खबर का हवाला देते हुए कहा कि दस जीवित लोगों को मृत दर्शा दिया गया। लखीमपुर खीरी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ दस हजार अतिरिक्त वोट पाए गए और भाजपा छह हजार मतों से जीती — यदि उतने वोटों में गड़बड़ी हुई तो परिणाम की वैधता पर सवाल उठना लाजिमी है। आलोचकों का कहना है कि अदालत का यह कहना कि 'अगली बार सुधार हो जाएगा' पर्याप्त नहीं, क्योंकि एक बार हुई चुनावी क्षति को पलटा नहीं जा सकता।

जंतर-मंतर से 'विजन ऑफ इंडिया' का संदेश

नदवी ने जंतर-मंतर पर युवाओं के प्रदर्शन को सराहते हुए कहा कि बच्चों ने देश को एकता और समानता का स्पष्ट संदेश दिया है। उनके अनुसार, युवाओं ने यह संदेश दिया कि हिंदू-मुस्लिम विभाजन के जहर को स्थायी रूप से समाप्त होना चाहिए और किसी के साथ रंग या नस्ल के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई ब्राह्मण भी कमजोर, गरीब या अनपढ़ है, तो उसे भी समान सम्मान और अवसर मिलने चाहिए।

चीन की चुनौती और रक्षा नीति पर चिंता

सांसद नदवी ने आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर के उस बयान का उल्लेख किया जिसमें कथित तौर पर कहा गया कि हथियारों के मामले में भारत चीन से काफी पीछे है। नदवी ने कहा कि भारत ने अपनी सैन्य ऊर्जा पाकिस्तान और आंतरिक विभाजन में खपा दी, जबकि चीन ने दो बार सीमा पर आक्रामकता दिखाई। उनके अनुसार, वास्तविक प्रतिस्पर्धा दुनिया की बड़ी शक्तियों से होनी चाहिए थी, न कि पड़ोसी छोटे देशों से।

कश्मीर और सामाजिक एकता पर विचार

नदवी ने पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम के साथ अपनी एक पुरानी बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि कश्मीरियों को उतनी ही स्वतंत्रता और सम्मान मिलना चाहिए जितना देश के अन्य राज्यों के नागरिकों को। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कश्मीरी छात्र देश की विश्वविद्यालयों में बेरोकटोक पढ़ पा रहे हैं। उन्होंने कारगिल युद्ध में कश्मीरी सैनिकों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि आदिल शाह जैसे कश्मीरियों ने देशवासियों की रक्षा के लिए अपनी जान दी। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब वक्फ संशोधन और मतदाता सूची विवाद को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तनाव चरम पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन दावों की स्वतंत्र पड़ताल से चूक जाती है। चीन से सैन्य तुलना वाला बिंदु राजनीतिक बयानबाजी से परे एक गंभीर नीतिगत सवाल उठाता है जिस पर सर्वदलीय बहस होनी चाहिए। हिंदू-मुस्लिम एकता और कश्मीर पर नदवी की भाषा उनकी पार्टी की परंपरागत लाइन से कुछ आगे जाती है — यह देखना होगा कि सपा का नेतृत्व इसे कितना समर्थन देता है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने विपक्ष के सड़कों पर उतरने को क्यों सही ठहराया?
नदवी ने कहा कि संविधान ने विपक्ष को इसीलिए अधिकार दिया है कि जब सत्तारूढ़ दल संविधान की अनदेखी करे तो उसे टोका जा सके और जनभावनाओं को सत्ता तक पहुँचाया जा सके। उनके अनुसार यह सड़क पर उतरना असंवैधानिक नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
वोटर लिस्ट गड़बड़ी पर नदवी ने क्या आरोप लगाए?
नदवी ने कहा कि करोड़ों लोगों के वोट कथित तौर पर सूची से हटाए गए और दिल्ली में 10 जीवित लोगों को मृत दर्शाया गया। लखीमपुर खीरी में 10,000 अतिरिक्त वोट मिलने और भाजपा के 6,000 मतों से जीतने का हवाला देते हुए उन्होंने परिणाम की वैधता पर सवाल उठाया।
आईटीबीपी महानिदेशक के बयान पर नदवी ने क्या कहा?
नदवी ने आईटीबीपी महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर के कथित बयान का उल्लेख किया जिसमें कहा गया कि हथियारों के मामले में भारत चीन से काफी पीछे है। नदवी ने इसे गंभीर चिंता बताते हुए कहा कि भारत ने अपनी सैन्य ऊर्जा आंतरिक विभाजन और छोटे पड़ोसियों पर खर्च कर दी, जबकि असली चुनौती चीन से थी।
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर नदवी का क्या कहना था?
नदवी ने जंतर-मंतर पर युवाओं के प्रदर्शन को सराहते हुए कहा कि बच्चों ने 'विजन ऑफ इंडिया' का स्पष्ट संदेश दिया — हिंदू-मुस्लिम विभाजन को हमेशा के लिए खत्म होना चाहिए और किसी के साथ रंग या नस्ल के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।
इंडी गठबंधन का गठन किस मुद्दे पर हुआ था?
नदवी के अनुसार, वक्फ संशोधन विधेयक को संसद में अस्वीकार करने पर हुई वोटिंग के समय जो दल एकजुट हुए, उन्हीं का नाम इंडी गठबंधन पड़ा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के ये दल संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकसाथ खड़े हैं।
राष्ट्र प्रेस
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