अखिलेश यादव: भाजपा वोट काटने की साजिशें कर सत्ता में बने रहना चाहती है
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा जनाधार खो चुकी है।
- वोट काटने की साजिशें रची जा रही हैं।
- नोटिस भेजने को वोटबंदी अभियान कहा गया।
- चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए।
- जनता को अधिकारों के लिए जागरूक रहने की आवश्यकता है।
लखनऊ, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए बड़े पैमाने पर मतदाताओं को नोटिस भेजने को ‘वोटबंदी अभियान’ करार दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा अब जनाधार खो चुकी है और सत्ता में बने रहने के लिए वोट काटने की साजिशें रच रही है।
अखिलेश यादव ने कहा कि नोटबंदी के बाद यह सरकार अब वोटबंदी का अभियान चला रही है। पहले मुसलमानों को कागजों के नाम पर परेशान किया जाता था, अब हिंदुओं को भी नोटिस भेजे जा रहे हैं।
उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या अब वोट के आधार पर नागरिकता का निर्धारण किया जाएगा और क्या लोगों को उनके खेत, जमीन और मकान से बेदखल किया जाएगा? सपा अध्यक्ष ने कहा कि जब सुभाष चंद्र बोस और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के परिजनों तक को अनसुना किया गया, तो आम आदमी की क्या स्थिति होगी।
अखिलेश यादव ने चिंता जताई कि वोटर कार्ड को लेकर पैदा की जा रही अनिश्चितता से लोग अपने अधिकारों, विरासत और संपत्ति को लेकर भयभीत रहेंगे। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिन दस्तावेजों के आधार पर पहले वोटर सूची तैयार हुई, उन्हीं दस्तावेजों के रहते अब त्रुटियां कैसे सामने आ रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि आयोग की गलती है तो सुधार के लिए जनता को क्यों दौड़ाया जा रहा है और क्या गारंटी है कि भविष्य में फिर त्रुटि नहीं होगी? भाजपा ने अपनी नीतियों, महंगाई, बेरोजगारी और कथित धोखेबाजी के कारण जनाधार खो दिया है, इसलिए अब वह धांधली के सहारे चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है।
अखिलेश ने कहा कि भाजपा के तथाकथित ‘पन्ना प्रमुख’ भी जमीनी हकीकत से मुंह नहीं मोड़ पा रहे हैं। उन्होंने इसे ‘पीडीए’ (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) वोट काटने की साजिश बताते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं और बूथ लेवल अधिकारियों से अपील की कि एक भी सही वोट न कटने पाए और एक भी झूठा वोट न जुड़ने पाए।
अखिलेश यादव ने प्रयागराज में नजूल भूमि पर अवैध कब्जों का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपाई बाउंड्री खड़ी कर कब्जा कर रहे हैं, जिसे न लखनऊ का बुलडोजर देख पा रहा है, न दिल्ली के ड्रोन।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोग विदेश दौरे पर इसलिए गए हैं ताकि बाद में कह सकें कि जब कब्जा हुआ तब वे देश में नहीं थे। उन्होंने निवेश समझौतों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि करोड़ों रुपए के एमओयू दिखाए गए, लेकिन जमीनी हकीकत हवाई अड्डों की तरह ‘हवा-हवाई’ साबित हुई। उन्होंने व्यंग्य करते हुए पूछा कि विदेश में विकास मॉडल देखने वाले क्या प्रदेश की बुनियादी सुविधाओं को भी याद रखते हैं।