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मध्य प्रदेश में जल संरक्षण का अभियान: जन आंदोलन के रूप में उभरता जल गंगा संवर्धन

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मध्य प्रदेश में जल संरक्षण का अभियान: जन आंदोलन के रूप में उभरता जल गंगा संवर्धन

सारांश

जल गंगा संवर्धन अभियान मध्य प्रदेश में जल संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में यह अभियान अब जन आंदोलन का स्वरूप ले चुका है, जिसमें जल संरचनाओं का संरक्षण और पुनर्जीवन शामिल है।

मुख्य बातें

जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य जल संरचनाओं का संरक्षण है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में यह अभियान जन आंदोलन बन रहा है।
इस अभियान में 16 विभागों की 58 गतिविधियाँ शामिल हैं।
6,278 करोड़ रुपए का वित्तीय लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मध्य प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी रैंकिंग में सुधार किया है।

भोपाल 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश में जल संरक्षण हेतु जल गंगा संवर्धन अभियान का आयोजन किया जा रहा है। इस पहल के अंतर्गत जल संरचनाओं को फिर से जीवनदान देने की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राज्य में जल संरक्षण अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है।

सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण को एक जन-आंदोलन के रूप में विकसित किया जा रहा है। पानी बचाना अत्यंत आवश्यक है। यह हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियाँ प्रकृति के इस अनमोल संसाधन की कमी महसूस न करें। इसके लिए हमें मौजूदा जल स्रोतों के साथ-साथ सूख चुके जल स्रोतों का संरक्षण करना होगा।

उन्होंने कहा कि पानी की बचत हेतु प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। सरकार और समाज के संयुक्त प्रयासों से इस अभियान में पिछले एक महीने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। यह अभियान 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हुआ है और अब जल संरक्षण, जल संरचनाओं के संवर्धन और जनभागीदारी का एक व्यापक जन आंदोलन बनता जा रहा है। इस अभियान के परिणामस्वरूप मध्य प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी रैंकिंग को सुधारकर अब तीसरे स्थान पर आ गया है, जबकि पहले यह छठे स्थान पर था।

राज्य सरकार द्वारा आगामी 30 जून तक चलाए जा रहे इस अभियान में 16 विभागों की 58 गतिविधियाँ निर्धारित की गई हैं। इसके लिए लगभग 6,278 करोड़ रुपए का वित्तीय लक्ष्य तय किया गया है। इस अभियान के तहत कुल 2,44,000 से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों की पहचान की गई है और लगभग 6,236 करोड़ रुपए की लागत से विकास कार्यों का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

मनरेगा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। अभियान के अंतर्गत 39,977 खेत तालाबों का निर्माण, 59,577 कूप-रीचार्ज संरचनाएँ और 21,950 से अधिक पहले से निर्मित जल संरचनाओं को पुनर्जीवित किया गया है।

अमृत सरोवरों के निर्माण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। नगरीय क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा तालाबों, कुओं और पुरानी बावड़ियों के संवर्धन, नालों की सफाई एवं सौंदर्यीकरण और रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थापना जैसे कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, गर्मी को देखते हुए नगरीय निकायों द्वारा विभिन्न स्थानों पर प्याऊ की स्थापना भी की गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक व्यापक जन आंदोलन बनता जा रहा है। यह न केवल जल संरक्षण को प्रोत्साहित करता है, बल्कि समाज की जिम्मेदारी को भी उजागर करता है। इस दिशा में उठाए गए कदम निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य क्या है?
इस अभियान का उद्देश्य जल संरचनाओं का संरक्षण और पुनर्जीवित करना है, ताकि जल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
इस अभियान में कितने विभाग शामिल हैं?
इस अभियान में 16 विभागों की 58 गतिविधियाँ शामिल हैं।
इस अभियान का वित्तीय लक्ष्य क्या है?
इस अभियान का वित्तीय लक्ष्य लगभग 6,278 करोड़ रुपए है।
जल गंगा अभियान कब शुरू हुआ?
यह अभियान 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हुआ है।
इस अभियान से मध्य प्रदेश की रैंकिंग में क्या बदलाव आया है?
इस अभियान के परिणामस्वरूप मध्य प्रदेश ने अपनी राष्ट्रीय रैंकिंग को सुधारकर तीसरे स्थान पर आ गया है।
राष्ट्र प्रेस
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