जानें 'जेन जी मेडागास्कर' आंदोलन के चार प्रमुख चेहरे, जिनकी गिरफ्तारी से बढ़ा हंगामा
सारांश
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नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मेडागास्कर एक बार फिर संकट में है। इसकी वजह है चार युवा कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी, जिन्होंने देश के युवाओं को प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।
पूर्वी अफ्रीका के इस देश में हालिया गिरफ्तारियों ने जेन जी आंदोलन को उग्र प्रदर्शन की ओर धकेल दिया है। पिछले साल के बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद बनी सैन्य सरकार के प्रति अब निराशा बढ़ती जा रही है।
दरअसल, 12 अप्रैल को चार युवा कार्यकर्ताओं— हेरिजो एंड्रियामैनेंटेना, मियोरा राकोटोमालाला, दीना रैंड्रियानारिसोआ, और नोमेना रत्सीहोरीमनाना को गिरफ्तार किया गया। ये सभी 10 अप्रैल को हुए उस प्रदर्शन का हिस्सा थे, जिसमें सरकार से चुनाव की तारीख बताने की मांग की गई थी।
इन पर “राज्य की सुरक्षा को कमजोर करने” और “आपराधिक साजिश” जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, उनके वकील का कहना है कि ये सभी आरोप आधारहीन हैं और इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं है।
माइकल रैंड्रियानिरिना अक्टूबर 2025 में तख्तापलट कर सत्ता में आए थे। यह तख्तापलट युवा-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के बाद हुआ था, जिन्हें “जेन जी मेडागास्कर” के नाम से जाना गया। तब युवाओं को उम्मीद थी कि नई सरकार उन्हें अधिक लोकतांत्रिक और पारदर्शी शासन देगी।
लेकिन अब वही युवा सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता हैरी लॉरेंट राहाजासन ने गिरफ्तारी पर कहा कि देश में “शक्तियों का विभाजन” है और राष्ट्रपति की इन मामलों में कोई सीधी भूमिका नहीं है, क्योंकि ये पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया से संबंधित हैं।
इस बीच, गिरफ्तार किए गए चार कार्यकर्ताओं में से दो को रिहा कर अस्पताल भेजा गया है, क्योंकि उनकी तबीयत खराब हो गई थी। वहीं, शुक्रवार तक केवल हेरिजो एंड्रियामैनेंटेना ही हिरासत में थे, जिन्हें इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा माना जाता है।
एल एक्सप्रेस मेडागास्कर की रिपोर्टों के अनुसार, इन गिरफ्तारियों ने युवाओं के बीच असंतोष और अविश्वास को बढ़ा दिया है। कई कार्यकर्ता अब यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या नई सैन्य सरकार उस दिशा में बढ़ रही है, जिसे बदलने के लिए उन्होंने आंदोलन किया था।
जेन जी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। सत्ता परिवर्तन के बाद जो उम्मीदें जगी थीं, वे अब धीरे-धीरे टूटती नजर आ रही हैं। जैनेजी के नेतृत्व में शुरू हुआ यह आंदोलन अब एक नए मोड़ पर खड़ा है, जहां लोकतंत्र और अधिकारों की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी गिरफ्तार युवकों की तत्काल रिहाई की मांग की है।