1 नवंबर 2026
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इंडी गठबंधन की रामलीला मैदान महारैली: अखिलेश बोले — 'डबल इंजन डबल जीरो हो गया'

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इंडी गठबंधन की रामलीला मैदान महारैली: अखिलेश बोले — 'डबल इंजन डबल जीरो हो गया'

सारांश

रामलीला मैदान में इंडी गठबंधन की महारैली महज विरोध-प्रदर्शन नहीं थी — यह चुनाव आयोग की साख पर सीधा हमला था। अखिलेश यादव के 'डबल जीरो' तंज से लेकर संजय राउत की ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग तक, विपक्ष ने अगले चुनाव से पहले अपना मुख्य मुद्दा तय कर दिया।

मुख्य बातें

1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडी गठबंधन की महारैली आयोजित हुई।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से 1 करोड़ 27 लाख वोट हटाए गए।
संजय राउत ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग की और कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा।
दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने आरोप लगाया कि रैली में आने वाले लोगों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग और यातायात बाधा की गई।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने रैली को राहुल गांधी के आह्वान पर जनता की सहज भागीदारी बताया।
जंतर-मंतर पर पुलिस द्वारा प्रदर्शन रोके जाने के बाद रामलीला मैदान में रैली का निर्णय लिया गया था।

नई दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर 2026 को आयोजित इंडी गठबंधन की महारैली में विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और चुनाव आयोग पर तीखे हमले बोले। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत, कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने मंच से लोकतंत्र, मतदाता सूची में कथित छेड़छाड़ और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए।

मुख्य घटनाक्रम

रैली तब और महत्त्वपूर्ण हो गई जब संजय राउत ने बताया कि जंतर-मंतर पर विपक्ष के प्रस्तावित प्रदर्शन को पुलिस ने रोक दिया था, जिसके बाद रामलीला मैदान में इस महारैली का आयोजन तय किया गया। दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने आरोप लगाया कि रैली में आने वाले लोगों को रोकने के लिए जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई और यातायात की गति जानबूझकर धीमी की गई।

अखिलेश यादव का हमला

अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने स्वयं स्वीकार किया है कि मतदाता सूची से 1 करोड़ 27 लाख वोट कम हो गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यह आंकड़ा मुख्यमंत्री को किस स्रोत से प्राप्त हुआ, यह देखते हुए कि ऐसे विशिष्ट डेटा तक सामान्य पहुँच संभव नहीं है।

अखिलेश ने व्यंग्यपूर्ण लहजे में कहा, 'जो लोग डबल इंजन की बात करते थे, वे अब डबल जीरो हो गए हैं। इतना ही नहीं, वे अपनी हार भी स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग के साथ मिलकर दूसरी बार वोटों की गिनती करवाई। इस तरह एक ही चुनाव में डबल इंजन की सरकार को दोहरी हार का सामना करना पड़ा।' उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री अब यह दावा कर रहे हैं कि 1 करोड़ 27 लाख वोट हिंदुओं के नहीं हैं — और इस दावे के स्रोत पर सवाल उठाया।

संजय राउत और कांग्रेस की प्रतिक्रिया

संजय राउत ने रैली को 'मेगा रैली' बताते हुए कहा कि लोकतंत्र बचाने के लिए पूरा देश रामलीला मैदान में एकजुट हो रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी एकता मज़बूत है और यह आंदोलन तब तक नहीं रुकेगा जब तक चुनाव आयोग के मौजूदा नेतृत्व में बदलाव नहीं होता। राउत ने कहा, 'अगर उन्हें लगता है कि सब कुछ खत्म हो गया है, तो वे गलत हैं। यह आंदोलन तब तक नहीं रुकेगा, जब तक हम ज्ञानेश कुमार को बाहर नहीं निकाल देते।'

दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि हरियाणा से बड़ी संख्या में लोग रैली में पहुँचे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के साथ मिलकर मतदाता सूची से नाम काटे गए, जो जन-आक्रोश की प्रमुख वजह है।

भूपेंद्र हुड्डा और अन्य नेताओं के बयान

हरियाणा के नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि राहुल गांधी के आह्वान पर लाखों लोग रैली में शामिल होने पहुँचे। उन्होंने कहा कि यह जनता की आवाज़ है और रैली शांतिपूर्ण रहेगी। व्यापारियों को होने वाले नुकसान की आशंका पर उन्होंने कहा कि रैली में आए लोग खरीदारी भी करेंगे।

सपा सांसद नारायण दास अहिरवार ने कहा कि व्यापारी, मध्यम वर्ग, मजदूर और किसान समेत समाज का हर तबका मौजूदा सरकार की नीतियों से परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल के नेताओं को झूठ बोलने की आदत हो गई है।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज़ है और विपक्षी एकता की परीक्षा हो रही है। गौरतलब है कि इंडी गठबंधन का यह जमावड़ा चुनाव आयोग की कार्यशैली और मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर केंद्रित रहा — जो आने वाले चुनावों से पहले एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो 2024 के बाद से लगातार विवादों में रही है। मतदाता सूची से 1 करोड़ 27 लाख नाम हटाने का आंकड़ा स्वयं मुख्यमंत्री के बयान से लिया गया है — यह विपक्ष के लिए असाधारण राजनीतिक हथियार है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि इंडी गठबंधन की एकता परीक्षाओं में टूटती रही है और रैली की भीड़ को निरंतर संगठित आंदोलन में बदलना इसकी असली चुनौती होगी। ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग कितनी दूर तक जाती है, यह इस आंदोलन की असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडी गठबंधन की रामलीला मैदान महारैली किस मुद्दे पर हुई?
यह रैली मुख्यतः लोकतंत्र की रक्षा, मतदाता सूची से कथित रूप से नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग की भूमिका पर केंद्रित थी। विपक्षी नेताओं ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर भी सीधे हमले बोले।
अखिलेश यादव का 'डबल इंजन डबल जीरो' बयान किस संदर्भ में आया?
अखिलेश यादव ने यह व्यंग्य उत्तर प्रदेश सरकार पर कसा, जहाँ उन्होंने कहा कि एमएलसी चुनाव हारने के बाद दोबारा मतगणना करवाई गई, जिसे उन्होंने 'दोहरी हार' बताया। उनका इशारा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 'डबल इंजन' नारे पर था।
संजय राउत ने ज्ञानेश कुमार का नाम क्यों लिया?
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग करते हुए कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक यह माँग पूरी नहीं होती। उनका आरोप था कि मौजूदा चुनाव आयोग का नेतृत्व स्वतंत्र नहीं है।
रैली का आयोजन जंतर-मंतर की जगह रामलीला मैदान में क्यों हुआ?
संजय राउत के अनुसार जंतर-मंतर पर विपक्ष के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को पुलिस ने रोक दिया था, जिसके बाद रामलीला मैदान में महारैली का आयोजन तय किया गया।
रैली में मतदाता सूची पर क्या आरोप लगाए गए?
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा और अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के साथ मिलकर मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए। अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ 27 लाख वोट कम होने का आंकड़ा स्वयं मुख्यमंत्री के बयान से उद्धृत किया।
राष्ट्र प्रेस
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