वैश्विक डायमंड वैल्यू चेन में भारत-बेल्जियम साझेदारी: वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने ब्रुसेल्स में व्यापार विस्तार पर जोर दिया
सारांश
मुख्य बातें
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने 1 नवंबर 2026 को कहा कि वैश्विक हीरा (डायमंड) मूल्य शृंखला में भारत और बेल्जियम की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है, और दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में दशकों से सुदृढ़ व्यावसायिक रिश्ते कायम हैं। यह बात उन्होंने ब्रुसेल्स स्थित भारतीय दूतावास में हीरा उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ हुई एक विशेष बैठक के दौरान कही।
बैठक की मुख्य बातें
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, अग्रवाल ने रेखांकित किया कि भारत दुनिया का प्रमुख हीरा कटिंग और पॉलिशिंग केंद्र है, जबकि बेल्जियम मूल्यवान रत्नों और हीरों के वैश्विक व्यापार का प्रतिष्ठित हब माना जाता है। इन दोनों भूमिकाओं के चलते दोनों देश वैश्विक डायमंड वैल्यू चेन की रीढ़ बने हुए हैं।
बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने वैश्विक व्यापार रुझानों, प्रमुख बाज़ारों में माँग की मौजूदा स्थिति, कारोबारी संभावनाओं और भविष्य की चुनौतियों पर खुलकर विचार रखे। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, चर्चा का मूल उद्देश्य उद्योग के साथ सतत संवाद को बल देना और बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच व्यापारिक अवसरों को समझना था।
30 अक्टूबर की पूर्व-बैठक
इससे पहले वाणिज्य मंत्रालय ने बताया था कि अग्रवाल ने 30 अक्टूबर 2026 को भी उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की थी। उस बैठक में वैश्विक डायमंड बाज़ार की मौजूदा हालत, बदलती माँग, उभरते रुझानों तथा अवसरों और चुनौतियों का जायज़ा लिया गया था और संबंधित हितधारकों से फीडबैक भी प्राप्त किया गया था।
भारत-बेल्जियम-लक्जमबर्ग आर्थिक सहयोग
यह ऐसे समय में आया है जब भारत, बेल्जियम और लक्जमबर्ग ने हाल ही में आर्थिक सहयोग को और प्रगाढ़ बनाने पर सहमति जताई है। भारत-बेल्जियम-लक्जमबर्ग आर्थिक संघ (BLEU) की संयुक्त आर्थिक आयोग के 19वें सत्र में एयरोस्पेस, अनुसंधान, नवाचार और उच्च शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग के अवसरों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
गौरतलब है कि इस सत्र में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों की समीक्षा की तथा लॉजिस्टिक्स, हवाई संपर्क, बंदरगाह विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाएँ, फिनटेक, डिजिटल परिवर्तन, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवाएँ, आयुर्वेद, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण जैसे विविध क्षेत्रों में साझेदारी का विस्तार करने पर सहमति बनाई।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक हीरा उद्योग इस समय प्रयोगशाला-निर्मित हीरों (लैब-ग्रोन डायमंड्स) की बढ़ती उपस्थिति और प्रमुख उपभोक्ता बाज़ारों में माँग के उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में भारत और बेल्जियम के बीच यह उच्चस्तरीय संवाद दोनों देशों की व्यापारिक रणनीति को नई दिशा दे सकता है। आने वाले महीनों में इस बैठक के नतीजे व्यापार नीति के स्तर पर किस रूप में सामने आते हैं, यह देखने वाली बात होगी।