भारत-बेल्जियम रक्षा साझेदारी: साइबर सुरक्षा, AI ड्रोन और हथियार प्रणालियों में सह-उत्पादन की दिशा तय
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन ने 3 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रक्षा उद्योग में सह-विकास तथा सह-उत्पादन को नई गति देने पर सहमति जताई। इस बैठक में साइबर सुरक्षा, AI-आधारित मानव रहित हवाई प्रणालियों और जटिल हथियार प्रणालियों को प्राथमिकता वाले सहयोग क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
दोनों मंत्रियों ने 3 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित भारत-बेल्जियम रक्षा मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की गोलमेज बैठक और कारोबारी बैठकों में भाग लिया। इस कार्यक्रम में बेल्जियम के रक्षा उद्योग, भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और सोसायटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
बैठक के दौरान दोनों देशों की कंपनियों के बीच कई समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ। इनमें SIDM और बेल्जियन सिक्योरिटी एंड डिफेंस इंडस्ट्री के बीच समझौता, तथा लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड (भारत), एक्सेल रोबोटिक्स एसएएस (फ्रांस) और एक्सेल रोबोटिक्स (बेल्जियम) के बीच भी करार शामिल हैं।
भारत की रणनीतिक प्राथमिकताएँ
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि भारत का रक्षा विनिर्माण क्षेत्र रणनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है — आयात पर निर्भरता घट रही है और स्वदेशी क्षमता बढ़ रही है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया जैसी पहलों को इस बदलाव की धुरी बताया।
सेठ ने बताया कि भारत का रक्षा औद्योगिक आधार अब रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों, तेज़ी से बढ़ते निजी क्षेत्र और 16,000 से अधिक एमएसएमई को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने iDEX और अदिति जैसे नवाचार मंचों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये मंच AI, क्वांटम तकनीक, सैन्य संचार और ड्रोन-रोधी प्रणालियों में स्टार्टअप और एमएसएमई को जोड़ रहे हैं।
एफडीआई नीति और रक्षा गलियारे
सेठ ने स्पष्ट किया कि भारत ने रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों को उदार बनाया है — स्वचालित मार्ग से 74% तक और सरकारी मार्ग से 100% तक एफडीआई की अनुमति है। नई अंतरिक्ष नीति में भी 100% एफडीआई की अनुमति दी गई है।
तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में स्थापित रक्षा औद्योगिक गलियारे विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं को प्रतिस्पर्धी प्रोत्साहन और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध करा रहे हैं। महाराष्ट्र, असम और अन्य राज्यों में भी ऐसे गलियारों की योजना बनाई जा रही है।
बेल्जियम का नज़रिया
मंत्री थियो फ्रांकेन ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा, सूचना सुरक्षा और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में मज़बूत संवाद तंत्र विकसित हो रहे हैं, और इन संस्थागत ढाँचों ने भारत को यूरोपीय संघ के लिए एक विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार के रूप में स्थापित किया है।
फ्रांकेन ने भारतीय उद्यमियों की गतिशीलता की सराहना करते हुए बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में दोनों देशों की सेनाओं को संयुक्त प्रयासों के ज़रिए मज़बूत करने की ज़रूरत पर बल दिया।
आगे की राह
यह बैठक ऐसे समय में आई है जब भारत अपने रक्षा निर्यात को तेज़ी से बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और यूरोपीय देशों के साथ तकनीक हस्तांतरण पर आधारित साझेदारियाँ बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है। दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन बेल्जियम की तकनीकी विशेषज्ञता को भारत के विशाल विनिर्माण आधार और कुशल जनशक्ति के साथ जोड़ने की नींव रखते हैं।