भारत-ब्राजील ICT समझौता ज्ञापन: पुणे में 12वीं ब्रिक्स बैठक में डिजिटल-दूरसंचार साझेदारी को मिली नई दिशा
सारांश
मुख्य बातें
भारत और ब्राजील ने 21 अगस्त 2026 को पुणे में आयोजित 12वीं ब्रिक्स संचार मंत्रियों की बैठक के दौरान सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। दूरसंचार विभाग के अनुसार, यह करार डिजिटल नवाचार, डिजिटल अवसंरचना के विस्तार और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से संपन्न हुआ।
समझौते की मुख्य बातें
MoU पर भारत की ओर से केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और ब्राजील की ओर से संचार मंत्री फ्रेडेरिको डी सिकेरा फिल्हो ने हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत सार्वभौमिक कनेक्टिविटी, साइबर सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, उभरती प्रौद्योगिकियाँ, क्षमता निर्माण और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा किया जाएगा।
सिंधिया ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में कहा कि यह समझौता 'सुरक्षित, समावेशी और भविष्य उन्मुख डिजिटल व्यवस्था के निर्माण' की दिशा में दोनों देशों के बीच सहयोग की नींव को मज़बूत करता है।
ब्रिक्स ICT मंच की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि ब्रिक्स सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंच की स्थापना 2021 में भारत की मेजबानी में आयोजित 7वीं ब्रिक्स संचार मंत्रियों की बैठक के दौरान संस्थागत रूप से की गई थी। तब से यह मंच ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच डिजिटल सहयोग का प्रमुख केंद्र बन चुका है। इस बैठक में सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, नवाचार-आधारित उद्यम और शोध संस्थान भी शामिल हुए।
बैठक के प्रमुख सत्र
बैठक के पहले विषयगत सत्र में साइबर सुरक्षा, भरोसेमंद ICT और बाल ऑनलाइन सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। ब्रिक्स देशों के मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल विकास के साथ-साथ गोपनीयता की रक्षा, सार्वजनिक हित और कमज़ोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही अनिवार्य है।
दूसरे विषयगत सत्र में टिकाऊ और लचीले डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र पर विचार-विमर्श हुआ। इसमें सभी के लिए सुलभ और किफायती डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा-कुशल और जलवायु-अनुकूल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तथा उपग्रह-आधारित और गैर-स्थलीय संचार प्रणालियों जैसी उभरती तकनीकों की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया।
व्यापक संदर्भ और महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के साथ अपनी तकनीकी साझेदारी को तेजी से विस्तार दे रहा है। भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) — जिसमें UPI, आधार और DigiLocker जैसे मॉडल शामिल हैं — को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुकरणीय माना जाता है। ब्राजील के साथ यह MoU उसी अनुभव को साझा करने और दोनों देशों की डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं को एकीकृत करने की दिशा में एक ठोस कदम है।
आगे की राह
दोनों देशों के बीच इस समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक संयुक्त कार्यदल गठित किए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी न केवल दोनों देशों के डिजिटल क्षेत्र को मज़बूत करेगी, बल्कि ब्रिक्स के व्यापक डिजिटल एजेंडे को भी आगे बढ़ाने में सहायक होगी।