भारत-सिंगापुर ISMR: समुद्री विरासत, खाद्य सुरक्षा और दूरसंचार में 2 MOU व 1 LOI पर हस्ताक्षर
सारांश
मुख्य बातें
भारत और सिंगापुर के बीच 20 अगस्त 2026 को सिंगापुर में आयोजित चौथी भारत-सिंगापुर मंत्री-स्तरीय गोलमेज बैठक (ISMR) में समुद्री विरासत, खाद्य सुरक्षा और दूरसंचार एवं प्रसारण जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में दो समझौता ज्ञापन (MOU) और एक आशय पत्र (LOI) का आदान-प्रदान हुआ। वित्त मंत्रालय ने इस बैठक के परिणामों की जानकारी देते हुए कहा कि ये समझौते दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को नई मजबूती प्रदान करेंगे।
बैठक में क्या हुआ
चौथी ISMR बैठक में छह प्रमुख क्षेत्रों — एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, कनेक्टिविटी, डिजिटलाइजेशन, हेल्थकेयर एवं मेडिसिन, स्किल डेवलपमेंट और सस्टेनेबिलिटी — में सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही, नए अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया। बातचीत में भारत-सिंगापुर साझेदारी की मजबूत गति और इसे ठोस नतीजों में बदलने की प्रतिबद्धता को दोहराया गया।
हस्ताक्षरित करारों का विवरण
इस बैठक के दौरान तीन महत्वपूर्ण करार संपन्न हुए। पहला MOU समुद्री विरासत में सहयोग के लिए, दूसरा MOU खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए, और LOI दूरसंचार एवं प्रसारण क्षेत्र में सहयोग के लिए हस्ताक्षरित किया गया। वित्त मंत्रालय के अनुसार, ये समझौते आपसी हित के विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करेंगे।
भारतीय और सिंगापुरी प्रतिनिधिमंडल
भारतीय प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद शामिल रहे। सिंगापुर के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उप-प्रधानमंत्री एवं व्यापार एवं उद्योग मंत्री गैन किम योंग ने किया।
सिंगापुर की ओर से वरिष्ठ मंत्री एवं राष्ट्रीय सुरक्षा समन्वय मंत्री के. षणमुगम, विदेश मंत्री डॉ. विवियन बालाकृष्णन, डिजिटल विकास एवं सूचना मंत्री जोसेफिन टेओ और परिवहन मंत्री एवं वित्त राज्य मंत्री जेफरी सिओ भी उपस्थित रहे।
आपसी साझेदारी का महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ आर्थिक संबंध गहरे करने पर जोर दे रहा है। गौरतलब है कि ISMR प्रारूप दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय नीति संवाद का एक स्थापित मंच है, जो भविष्य-उन्मुख और परस्पर लाभकारी आर्थिक साझेदारी को आकार देता है।
आगे की राह
हस्ताक्षरित MOU और LOI के क्रियान्वयन के लिए दोनों पक्षों की ओर से कार्यान्वयन ढाँचा तैयार किए जाने की अपेक्षा है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य सुरक्षा और दूरसंचार क्षेत्र के करार भारत की डिजिटल एवं कृषि नीतियों के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक महत्व रखते हैं।