वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सिंगापुर रवाना, चौथे ISMR सम्मेलन में 6 क्षेत्रों पर होगी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण बुधवार, 19 अगस्त 2026 को चौथे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन (ISMR) में भाग लेने के लिए सिंगापुर रवाना हो गईं। इस सम्मेलन का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक ले जाना है। वित्त मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इसकी आधिकारिक जानकारी साझा की।
उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की संरचना
सीतारमण एक शीर्ष-स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही हैं। इसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद शामिल हैं। गौरतलब है कि जयशंकर सम्मेलन से एक दिन पहले, मंगलवार को ही सिंगापुर पहुँच गए थे।
ISMR की पृष्ठभूमि और महत्व
भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन की स्थापना 2022 में की गई थी। इसका पहला संस्करण उसी वर्ष आयोजित हुआ, दूसरा अगस्त 2024 में सिंगापुर में और तीसरा अगस्त 2025 में नई दिल्ली में हुआ था। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, यह मंच पारंपरिक क्षेत्रों के अलावा नए और उभरते क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।
सम्मेलन में किन क्षेत्रों पर होगी चर्चा
वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस बार का सम्मेलन छह प्रमुख क्षेत्रों में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करेगा — उन्नत विनिर्माण, कनेक्टिविटी, डिजिटलीकरण, स्वास्थ्य एवं औषधि, कौशल विकास और सतत विकास। इसके साथ ही उभरते अवसरों पर भी विचार-विमर्श होगा, जिसमें निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, तकनीकी सहयोग, वित्तीय सेवाएँ और बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
सिंगापुर का स्वागत और द्विपक्षीय संदेश
भारत में सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग ने एक्स पर जयशंकर का स्वागत करते हुए कहा कि चौथे ISMR के लिए उनका आगमन दोनों देशों के मज़बूत संबंधों का प्रतीक है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत और सिंगापुर के बीच निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग पहले से ही मज़बूत आधार पर खड़ा है।
आगे क्या
सम्मेलन के दौरान होने वाली चर्चाओं से दोनों देशों के बीच नई साझेदारियों और समझौतों की संभावना है। यह बैठक भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ आर्थिक जुड़ाव को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।