अमित शाह का कांग्रेस पर हमला: '75 साल नकारात्मक राजनीति', मध्य प्रदेश को ₹255 करोड़ के दुग्ध संयंत्र की सौगात
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 3 अक्टूबर 2026 को भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित गोपालक सम्मेलन में कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा नकारात्मक राजनीति की है। इस अवसर पर उन्होंने मध्य प्रदेश के पशुपालकों को कई महत्वपूर्ण सौगात दीं और ₹255 करोड़ की लागत के उज्जैन दूध प्रसंस्करण संयंत्र का भूमि पूजन किया।
सहकारिता मंत्रालय पर कांग्रेस को घेरा
शाह ने कहा कि देश की आज़ादी के बाद से ही कृषि और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े लोग एक स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय की माँग करते रहे, लेकिन कांग्रेस ने 75 वर्षों तक इसे साकार नहीं होने दिया। उन्होंने कहा, 'नरेंद्र मोदी ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने अलग से सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की और इस मंत्रालय के बनने का सबसे बड़ा फायदा गोपालकों को होने वाला है।'
बिचौलियों से मुक्ति और सहकारी दूध व्यवस्था
दूध संग्रहण में बिचौलियों की भूमिका पर चिंता जताते हुए शाह ने कहा कि खुले बाज़ार में गोपालक का दूध ₹35 प्रति लीटर पर बिचौलिए ले जाते हैं और उसका शोषण करते हैं। उन्होंने कहा कि सहकारी व्यवस्था अपनाने पर यही दूध ₹55 प्रति लीटर तक मिलने की संभावना बनेगी — यानी पशुपालक को प्रति लीटर ₹20 अधिक की आय होगी।
उन्होंने भोपाल में संयंत्र प्रयोगशाला और शिवपुरी में मिनी डेरी प्लांट की भी घोषणा की। भोपाल और इंदौर पशुपालक संघों से जुड़े सदस्यों को ₹12 करोड़ का बोनस वितरित किया गया और 'गोपाल दीदी' को सम्मानित किया गया।
दूध उत्पादन में भारत की छलाँग और भाजपा का दावा
शाह ने आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2014-15 में देश में दूध उत्पादन 14 करोड़ 60 लाख टन था, जो मोदी सरकार के 10 वर्षों में बढ़कर 25 करोड़ टन तक पहुँच गया है। उन्होंने दावा किया कि भारत विश्व में सर्वाधिक दूध उत्पादन करने वाला देश है।
उन्होंने यह भी कहा कि दूध उत्पादन में शीर्ष पाँच राज्य — उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र — सभी भाजपा शासित हैं, जिसे उन्होंने अपनी सरकार की नीतियों की सफलता का प्रमाण बताया।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नया पारिस्थितिकी तंत्र
शाह ने कहा कि मोदी सरकार गोबर से बायोगैस, जैविक उर्वरक और दुग्ध उत्पादों की प्रसंस्करण से लेकर बाज़ार तक पहुँच का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि केवल दूध इकट्ठा करना पर्याप्त नहीं है — आइसक्रीम, मक्खन, घी, चीज़ और मावा जैसे उत्पाद बनाने के लिए एक सुदृढ़ प्रसंस्करण प्रणाली आवश्यक है।
गौरतलब है कि यह सम्मेलन मध्यप्रदेश में श्वेत क्रांति 2.0 की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
नए आपराधिक कानूनों पर संदेश
कार्यक्रम के दौरान शाह ने भोपाल में नवीन न्याय संहिताओं की प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। उन्होंने कहा, 'अंग्रेजों के बनाए कानून उनकी सरकार और उनके शासन की रक्षा के लिए थे। अब जो कानून लाए गए हैं, वे भारत के नागरिकों की गरिमा, संपत्ति और जान की रक्षा के लिए हैं। इनका मूल सिद्धांत न्याय है, न कि सजा।'
यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ है जब आगामी चुनावी मौसम से पहले भाजपा ग्रामीण और पशुपालक समुदायों तक अपनी पहुँच मज़बूत करने में जुटी है।