सपा राज में ब्लैकबोर्ड पर नकल, अब सवाल? मंत्री कपिल देव अग्रवाल का अखिलेश पर तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने 3 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर में मीडिया से बातचीत के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी के शासन में ब्लैकबोर्ड पर लिखकर नकल कराई जाती थी, पेपर लीक होते थे और नौकरियाँ बेची जाती थीं, वही आज योगी सरकार की साढ़े नौ लाख भर्तियों पर सवाल उठा रही है। अग्रवाल के अनुसार, अखिलेश यादव का यह रवैया पूरे प्रदेश के लिए हास्यास्पद है।
मंत्री का सपा शासन पर आरोप
कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में भ्रष्टाचार चरम पर था। उनके अनुसार, उस दौर में परीक्षाओं में खुलेआम नकल होती थी, पेपर लीक आम बात थी और नौकरियाँ जातिगत आधार पर एक विशेष वर्ग को दी जाती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासन में ठेके और नौकरियाँ पाने के लिए परिवार का एक सदस्य थैला लेकर लखनऊ जाता था, सौदेबाजी होती थी, पैसे भी दिए जाते थे — लेकिन न पैसे वापस मिलते थे और न नौकरी।
योगी सरकार की भर्तियों का दावा
अग्रवाल ने दावा किया कि वर्तमान योगी आदित्यनाथ सरकार ने साढ़े नौ लाख युवाओं को बिना किसी भ्रष्टाचार और जातिगत भेदभाव के नौकरियाँ दी हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, यादव, अनुसूचित जाति और सामान्य वर्ग — सभी समाज की बेटियों को 100 प्रतिशत आरक्षण के साथ पुलिस और पीएसी जैसी भर्तियों में अवसर दिया गया है। उनके अनुसार, यह पारदर्शिता सपा के कार्यकाल से बिल्कुल विपरीत है।
निवेश पर भी घेरा
मंत्री ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में निवेशक उत्तर प्रदेश आने से कतराते थे, डर का माहौल था। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश विदेश दौरे करते थे और दिल्ली में बैठकें करते थे, लेकिन उत्तर प्रदेश में इन्वेस्टर समिट कराने की हिम्मत नहीं हुई। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2018 में इंटरनेशनल इन्वेस्टर समिट हुई, जिसमें देश-विदेश के बड़े उद्योगपति शामिल हुए और निवेश के वचन दिए।
हंसराज विश्वकर्मा का भी हमला
उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सपा के शासन में हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाएँ 'गरीब परीक्षा' बन गई थीं, पूरी कक्षा में नकल होती थी और नौकरियाँ चिट्ठी के ज़रिये — नेताओं के पैरवीकारों को — दी जाती थीं। विश्वकर्मा ने दावा किया कि आज योगी सरकार के कार्यकाल में परीक्षाएँ पूरी तरह नकलमुक्त हो रही हैं और साढ़े नौ लाख नौकरियाँ पारदर्शी आयोग के माध्यम से दी गई हैं।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में बेरोज़गारी और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। गौरतलब है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों पक्षों के बीच बयानबाज़ी तेज़ हो रही है। भाजपा और सपा दोनों ही रोज़गार और शिक्षा के मुद्दे को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश में हैं, और यह आरोप-प्रत्यारोप का दौर आगे भी जारी रहने की संभावना है।