ओम प्रकाश राजभर का सपा पर हमला: 'सपा राज में पेपर बिकते थे, योगी ने 9 लाख नौकरियाँ बिना रिश्वत दीं'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 8 अगस्त 2026 को अंबेडकरनगर में विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) पर आरोप लगाया कि उसके शासनकाल में पेपर लीक पर कोई कार्रवाई नहीं होती थी, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 9 लाख से अधिक युवाओं को बिना किसी रिश्वत के सरकारी नौकरी दी है।
पेपर लीक पर सपा को घेरा
राजभर ने कहा कि सपा नेता आज पेपर लीक की बात करते हैं, लेकिन उन्हें अपने शासनकाल की व्यवस्था भी याद करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान परीक्षाओं के पेपर खुलेआम बिकते थे और नकल के सहारे परीक्षाएं पास की जाती थीं। राजभर ने यह भी दावा किया कि उस दौर में गाँव-गाँव जाकर नौकरियाँ बेचने के आरोप भी लगते रहे। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में पेपर लीक का मुद्दा राजनीतिक रूप से गर्म है।
महिला आरक्षण पर विपक्ष से सवाल
महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजभर ने कहा कि महिलाएं देश की आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं और उन्हें राजनीति में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव रखा था। राजभर ने विपक्ष पर सीधा सवाल दागा कि जब यह विधेयक सदन में लाया गया, तब इसका विरोध किसने किया था। उन्होंने कहा कि जनता अपने जनप्रतिनिधियों को जनहित के मुद्दों पर सदन में चर्चा के लिए भेजती है, न कि बाहर ड्रामा करने के लिए।
आजमगढ़ मारपीट मामले पर बयान
आजमगढ़ की हालिया घटना का उल्लेख करते हुए राजभर ने बताया कि एक राजभर युवक के साथ मारपीट की गई, जिसमें उसकी एक आँख में चोट आई। उन्होंने जानकारी दी कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और चार लोगों को आरोपी बनाया गया है।
योगी सरकार की भर्ती प्रक्रिया की तारीफ
राजभर ने कांग्रेस और सपा के शासनकाल में कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया कैसे होती है, यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीखना चाहिए। उनके अनुसार योगी सरकार ने 9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी और इसके लिए एक रुपए की भी रिश्वत नहीं देनी पड़ी। यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों की आहट के बीच रोज़गार और पारदर्शिता के मुद्दे केंद्र में हैं।