27 जुलाई 2026
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ओपी राजभर का विपक्ष पर पलटवार: 'आरोप लगाने से पहले अपने शासनकाल का हिसाब दें'

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ओपी राजभर का विपक्ष पर पलटवार: 'आरोप लगाने से पहले अपने शासनकाल का हिसाब दें'

सारांश

यूपी मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने चंदौली में एक साथ कई मोर्चों पर बोला — विपक्ष को उसके अपने शासनकाल का आईना दिखाया, राम मंदिर एसआईटी को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का हिस्सा बताया और ओवैसी-अखिलेश गठबंधन को अव्यावहारिक करार दिया।

मुख्य बातें

ओम प्रकाश राजभर ने 27 जुलाई को चंदौली में पेपर लीक, एसआईटी और विपक्षी आरोपों पर प्रतिक्रिया दी।
राजभर ने कहा कि मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भी हर वर्ष पेपर लीक होते थे; विपक्ष पहले अपना हिसाब दे।
पेपर लीक के दोषियों के लिए 10 वर्ष की सजा और ₹10 करोड़ जुर्माने का सख्त कानून लागू करने का भरोसा दिया गया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों की मांगें स्वीकार होने के बाद इस्तीफा दिया।
राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी का पुनर्गठन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में हुआ।
ओवैसी और अखिलेश यादव के बीच संभावित गठबंधन को राजभर ने व्यावहारिक रूप से असंभव बताया।

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 27 जुलाई को चंदौली में पत्रकारों से बातचीत में पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा विवाद में एसआईटी पुनर्गठन और विपक्ष के आरोपों समेत कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो दल आज सत्तारूढ़ सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें पहले अपने शासनकाल का लेखा-जोखा जनता के सामने रखना चाहिए।

विपक्ष पर पलटवार

कांग्रेस द्वारा भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर पेपर चोरी, चंदा चोरी और वोट चोरी के आरोप लगाए जाने पर राजभर ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी हर वर्ष पेपर लीक की घटनाएं होती थीं। राजभर के अनुसार, विपक्ष को आरोप लगाने से पहले अपने शासन का इतिहास जनता के सामने ईमानदारी से रखना चाहिए।

पेपर लीक और छात्र आंदोलन पर सरकार का रुख

छात्र आंदोलन और पेपर लीक के मुद्दे पर राजभर ने कहा कि BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के बीच छात्रों की मांगों पर विस्तृत वार्ता हुई, जिसकी जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी गई। प्रधानमंत्री ने छात्रों की मांगें स्वीकार कीं, जिसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया। इसके साथ ही पेपर लीक कराने वालों के विरुद्ध 10 वर्ष की सजा और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान करने वाला सख्त कानून लागू करने का भरोसा भी दिया गया।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद और एसआईटी

राम मंदिर चंदा मामले में एसआईटी के पुनर्गठन पर राजभर ने स्पष्ट किया कि यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर उठाया गया है। उन्होंने बताया कि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी गठित हो चुकी है और जांच प्रक्रिया अपने तय दायरे में आगे बढ़ेगी। राजभर ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

कांवड़ यात्रा विवाद पर राजभर का बयान

कांवड़ यात्रा के दौरान स्वामी आनंद स्वरूप महाराज के उस बयान पर — जिसमें गैर-हिंदुओं की दुकानों से सामान न खरीदने की बात कही गई थी — राजभर ने व्यावहारिक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि लोग अपनी जरूरत के अनुसार जहां सामान उपलब्ध हो, वहीं से खरीदते हैं। यदि किसी स्थान पर आवश्यक वस्तु न मिले तो स्वाभाविक रूप से दूसरे विकल्प की ओर जाना पड़ता है।

ओवैसी-अखिलेश गठबंधन की संभावना पर टिप्पणी

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को गठबंधन का निमंत्रण दिए जाने पर राजभर ने कहा कि यदि अखिलेश यादव ओवैसी का प्रस्ताव स्वीकार करते हैं तो यह संदेश जाएगा कि मुस्लिम समाज उनके साथ नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसा गठबंधन व्यावहारिक रूप से संभव होता नहीं दिखता। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी एकजुटता की कोशिशें तेज हो रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

विपक्ष के पुराने रिकॉर्ड की याद दिलाओ। लेकिन यह तर्क एक सीमा तक ही काम करता है; जनता आज की जवाबदेही चाहती है, दशकों पुरानी तुलना नहीं। पेपर लीक के लिए सख्त कानून की घोषणा सकारात्मक है, पर असली कसौटी उसका क्रियान्वयन होगा। राम मंदिर एसआईटी पर 'न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार करें' वाला रुख संस्थागत जवाबदेही की दृष्टि से सही है, लेकिन जांच की पारदर्शिता पर नजर रखना जरूरी होगा।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओम प्रकाश राजभर ने विपक्ष के पेपर लीक आरोपों पर क्या कहा?
राजभर ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल, विशेषकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भी हर वर्ष पेपर लीक होते थे। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि आरोप लगाने से पहले अपने शासनकाल का इतिहास जनता के सामने रखें।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद में एसआईटी का पुनर्गठन क्यों हुआ?
राजभर के अनुसार यह पुनर्गठन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर किया गया है। एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी गठित हो चुकी है और जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
पेपर लीक के खिलाफ नए कानून में क्या प्रावधान हैं?
पेपर लीक कराने वालों के विरुद्ध 10 वर्ष की सजा और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान करने वाला सख्त कानून लागू करने का भरोसा दिया गया है। यह प्रधानमंत्री मोदी द्वारा छात्रों की मांगें स्वीकार किए जाने के बाद की गई प्रमुख घोषणाओं में से एक है।
ओवैसी और अखिलेश यादव के संभावित गठबंधन पर राजभर की क्या राय है?
राजभर ने कहा कि यदि अखिलेश यादव एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का गठबंधन प्रस्ताव स्वीकार करते हैं तो यह संदेश जाएगा कि मुस्लिम समाज उनके साथ नहीं है। उन्होंने इस गठबंधन को व्यावहारिक रूप से असंभव बताया।
कांवड़ यात्रा में गैर-हिंदू दुकानों के बहिष्कार के बयान पर राजभर ने क्या कहा?
राजभर ने कहा कि लोग अपनी आवश्यकता के अनुसार जहां सामान उपलब्ध हो वहीं से खरीदते हैं। यदि किसी स्थान पर जरूरी वस्तु न मिले तो स्वाभाविक रूप से दूसरे विकल्प की ओर जाना पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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