विशेष अभियान-6: उर्वरक विभाग ने 67,635 वर्गफुट जगह खाली कराई, 8,625 फाइलें निपटाईं
सारांश
मुख्य बातें
उर्वरक विभाग और उसके अधीनस्थ कार्यालयों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) ने विशेष अभियान-6 के तहत 29 अक्टूबर 2026 तक 67,635 वर्गफुट कार्यालयीन स्थान खाली कराया और 8,625 भौतिक फाइलों की समीक्षा पूरी की। 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलने वाला यह अभियान प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत संचालित है, जिसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देना, लंबित मामलों को घटाना और कार्यकुशलता बढ़ाना है।
मुख्य उपलब्धियाँ
अभियान के तहत 10,805 चिन्हित भौतिक फाइलों में से 8,625 की समीक्षा पूरी हो चुकी है। ई-फाइल प्रबंधन के मोर्चे पर 658 ई-फाइलों की समीक्षा की गई और उनमें से 345 बंद की गईं। पुराने रिकॉर्डों की छंटनी में 2,561 चिन्हित फाइलों में से 1,606 अनुपयोगी फाइलें हटाई गई हैं। इन सभी कदमों से कार्यालयों में दस्तावेज़-प्रबंधन की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है।
कबाड़ निस्तारण और राजस्व
विभाग के पीएसयू ने 3,137 बाहरी स्वच्छता अभियान आयोजित किए। कार्यालयी कबाड़ के वैज्ञानिक निपटान से सरकारी खजाने में ₹2,76,776 का राजस्व प्राप्त हुआ। गौरतलब है कि इस तरह के निस्तारण अभियानों में प्राप्त राजस्व सार्वजनिक संपत्ति के बेहतर दोहन का प्रमाण माना जाता है।
लोक शिकायत और नियम सरलीकरण
अभियान के दौरान दर्ज सभी 5 लोक शिकायत अपीलों का निस्तारण कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, विभाग ने नागरिक सेवाओं को सुगम बनाने के लिए नियमों के सरलीकरण की एक पहल भी शुरू की है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार अपने विभागों में 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' की नीति पर ज़ोर दे रही है।
सोशल मीडिया के ज़रिए जागरूकता
विशेष अभियान-6 की गतिविधियों को व्यापक रूप से प्रचारित करने के लिए विभाग ने 85 सोशल मीडिया पोस्ट जारी किए हैं, जिनमें स्वच्छता अभियान, रिकॉर्ड प्रबंधन, ई-वेस्ट और कबाड़ के वैज्ञानिक निपटान से जुड़ी जानकारी साझा की गई।
आगे का रास्ता
अभियान 31 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा और शेष चिन्हित फाइलों की समीक्षा तथा अनुपयोगी सामग्री के निपटान का कार्य पूरा किया जाएगा। उर्वरक विभाग और उसके पीएसयू ने स्वच्छता बनाए रखने, कार्यस्थल की दक्षता बढ़ाने तथा ई-वेस्ट के उचित प्रबंधन के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई है। यह अभियान सुशासन की दिशा में एक ठोस कदम के रूप में देखा जा रहा है।