विवेक ओबेरॉय का संजय गुप्ता के निधन पर दर्द: 'यह क्षति अकल्पनीय और बेहद निजी है'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने फिल्मकार संजय गुप्ता के अचानक निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की है और कहा है कि यह खबर उन्हें पूरी तरह सुन्न कर गई है। 1 नवंबर 2026 को इंस्टाग्राम पर साझा की गई अपनी पोस्ट में विवेक ने इस क्षति को 'अकल्पनीय और बेहद निजी' करार दिया। संजय गुप्ता का निधन 30 अक्टूबर को हुआ था, जब वह अपनी रसोई में अचानक गिर पड़े थे और सिर में गंभीर चोट लगी थी।
विवेक ओबेरॉय का भावुक संदेश
'मस्ती' फेम अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने इंस्टाग्राम पर लिखा, 'संजय गुप्ता के अचानक और असमय निधन से मैं बेहद स्तब्ध और दुखी हूँ। यह क्षति वास्तव में अकल्पनीय है और इसे स्वीकार करना बेहद मुश्किल है। हमने साथ काम किया था, इसलिए यह खबर मेरे लिए बेहद निजी है।'
उन्होंने आगे लिखा, 'कुछ खबरें आपको पूरी तरह सुन्न कर देती हैं और यह उन्हीं में से एक है। साथ काम करते हुए हमने जो समय बिताया, उसे मैं हमेशा संजोकर रखूँगा। संजय, आपकी कमी हमेशा खलेगी।' विवेक ने दिवंगत फिल्मकार के परिजनों के प्रति संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए ईश्वर से उन्हें इस कठिन घड़ी में शक्ति देने की कामना की।
फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर
'कांटे', 'शूटआउट एट लोखंडवाला' और 'काबिल' जैसी चर्चित फिल्मों के निर्देशक संजय गुप्ता के जाने से पूरी बॉलीवुड इंडस्ट्री सदमे में है। संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, ऋतिक रोशन, काजोल, कंगना रनौत और राकेश रोशन समेत कई फिल्मी हस्तियों ने सोशल मीडिया के ज़रिए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
रिपोर्टों के अनुसार, संजय गुप्ता अपनी रसोई में अचानक गिर पड़े थे, जिससे उनके सिर में चोट आई, और बाद में उनका निधन हो गया। यह खबर फिल्म जगत के लिए अप्रत्याशित थी।
संजय दत्त का संकल्प: 'कांटे 2' को पूरा करेंगे
संजय दत्त ने अपने करीबी मित्र को भावुक श्रद्धांजलि देते हुए दिवंगत फिल्मकार के अधूरे सपने 'कांटे 2' को पूरा करने का संकल्प लिया। उन्होंने लिखा, 'गुप्त्स, मेरे भाई। मुझे अब भी विश्वास नहीं हो रहा कि तुम चले गए। हमने साथ में बहुत कुछ साझा किया है — बहुत सारी यादें और दोस्ती के कई साल। तुम हमेशा मेरे परिवार का हिस्सा रहे हो और यह कभी नहीं बदलेगा।'
दत्त ने यह भी स्पष्ट किया कि 'कांटे 2' को साकार करना उनके दिवंगत मित्र को सच्ची श्रद्धांजलि होगी और वह इस परियोजना को पूरा करने की पूरी कोशिश करेंगे।
संजय गुप्ता की विरासत
संजय गुप्ता हिंदी सिनेमा के उन निर्देशकों में शुमार थे जिन्होंने एक्शन और थ्रिलर शैली को नई ऊँचाइयाँ दीं। 'कांटे' (2002) ने उन्हें पहचान दिलाई, जबकि 'शूटआउट एट लोखंडवाला' और 'काबिल' ने उनकी निर्देशन क्षमता को और पुख्ता किया। उनके असमय जाने से एक ऐसे रचनात्मक दृष्टि का अंत हो गया जो अभी और फिल्में देने में सक्षम थी।
फिल्म इंडस्ट्री में उनके योगदान को देखते हुए आने वाले समय में 'कांटे 2' जैसी परियोजनाओं पर उनके करीबी सहयोगियों द्वारा क्या निर्णय लिए जाते हैं, यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा।