फिल्ममेकर संजय गुप्ता का 59 वर्ष की आयु में निधन, 'कांटे' और 'काबिल' के थे निर्देशक
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में 31 अक्टूबर 2026 की सुबह हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को एक गहरा सदमा लगा, जब प्रसिद्ध फिल्मकार संजय गुप्ता के निधन की खबर सामने आई। 59 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वे 30 अक्टूबर की रात अपने घर के बाथरूम में गिर गए थे, जिससे उनके सिर पर गंभीर चोट लगी। बताया जा रहा है कि रात में इस घटना की जानकारी किसी को नहीं हो सकी और अगली सुबह उनके निधन की पुष्टि हुई।
निधन की पुष्टि और इंडस्ट्री में शोक
वरिष्ठ फिल्मकार अशोक पंडित ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर संजय गुप्ता की तस्वीर साझा कर उनके जाने की खबर की पुष्टि की। अशोक पंडित ने लिखा, 'यह बेहद चौंकाने वाला और दुखद है। अभी-अभी हमारे प्यारे दोस्त और बेहतरीन डायरेक्टर संजय गुप्ता के निधन की खबर मिली। घर पर सिर में चोट लगने के कारण उनका देहांत हो गया। एक और प्रतिभा बहुत जल्दी हमें छोड़कर चली गई। वह एक शानदार नैरेटर, हमेशा जिंदगी से भरे रहने वाले इंसान और जुनूनी फिल्ममेकर थे। हमारी इंडस्ट्री के लिए यह बहुत बड़ा नुकसान है। मेरे दोस्त, तुम्हारी कमी खलेगी।' इस पोस्ट के सामने आने के बाद बॉलीवुड में शोक की लहर फैल गई।
पुलिस जाँच और शुरुआती निष्कर्ष
इस मामले में वर्सोवा पुलिस ने एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जाँच में किसी प्रकार की साजिश या संदिग्ध गतिविधि का कोई संकेत सामने नहीं आया है। अंतिम संस्कार से संबंधित जानकारी शीघ्र साझा की जाने की उम्मीद है।
करियर की यात्रा: 'आतिश' से 'द मिरांडा ब्रदर्स' तक
संजय गुप्ता ने वर्ष 1994 में फिल्म 'आतिश: फील द फायर' से बतौर निर्देशक अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसमें संजय दत्त और आदित्य पंचोली मुख्य भूमिकाओं में थे। इसके बाद उन्होंने 'राम शास्त्र', 'हमेशा', 'जंग' और 'खौफ' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया।
वर्ष 2002 में आई उनकी फिल्म 'कांटे' उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई। इस मल्टी-स्टारर में अमिताभ बच्चन, संजय दत्त और सुनील शेट्टी समेत कई दिग्गज कलाकार नज़र आए थे। संजय दत्त के साथ उनकी जोड़ी बेहद सफल रही — 'मुसाफिर', 'जिंदा' और 'शूटआउट एट लोखंडवाला' जैसी फिल्में इसी साझेदारी की देन हैं।
बाद के वर्षों में उन्होंने 'काबिल' और 'मुंबई सागा' जैसी बड़ी फिल्मों का निर्देशन किया। निर्देशन के साथ-साथ उन्होंने 'दस कहानियां', 'प्लान', 'वुडस्टॉक विला', 'एसिड फैक्ट्री' और 'पंख' जैसी फिल्मों का निर्माण भी किया। उनकी आखिरी फिल्म 'द मिरांडा ब्रदर्स' वर्ष 2025 में रिलीज हुई थी, जिसमें हर्षवर्धन राणे और मीजान जाफरी मुख्य भूमिकाओं में थे।
इंडस्ट्री के लिए अपूरणीय क्षति
गौरतलब है कि संजय गुप्ता उन फिल्मकारों में से थे जिन्होंने हिंदी सिनेमा में गहरे अपराध-नाटक और मल्टी-स्टारर शैली को एक नई पहचान दी। तीन दशकों से अधिक के करियर में उन्होंने निर्देशन, निर्माण और पटकथा लेखन — तीनों में अपनी छाप छोड़ी। उनके जाने से बॉलीवुड ने एक ऐसा जुनूनी फिल्मकार खो दिया है जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।