संजय गुप्ता का अंतिम संस्कार: अभिषेक बच्चन, राकेश रोशन समेत फिल्म जगत ने दी अंतिम विदाई
सारांश
मुख्य बातें
फिल्म निर्माता निर्देशक संजय गुप्ता का अंतिम संस्कार शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट पर किया गया। बॉलीवुड की तमाम जानी मानी हस्तियाँ इस मौके पर उपस्थित रहीं और 'कांटे' तथा 'काबिल' जैसी यादगार फ़िल्में देने वाले इस दिग्गज निर्देशक को अपनी अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।
कौन कौन रहे मौजूद
अंतिम संस्कार में अभिनेता अभिषेक बच्चन, निर्देशक राकेश रोशन और अभिनेता फरदीन खान प्रमुख रूप से शामिल हुए। इसके अलावा अभिनेता मनोज बाजपेयी, रजत बेदी, फिल्म निर्माता अशोक पंडित और मिलाप जवेरी को भी श्मशान घाट पर देखा गया।
अभिनेता रोहित रॉय, रोनित रॉय और गुलशन ग्रोवर ने भी संजय गुप्ता की अंतिम यात्रा में भाग लिया और उन्हें भावभीनी विदाई दी।
मिलाप जवेरी का भावुक संदेश
फिल्म निर्माता मिलाप जवेरी संजय गुप्ता के घर पहुँचने पर भावुक हो गए। उन्होंने घोषणा की कि वे अपनी अगली फ़िल्म दिवंगत निर्देशक को समर्पित करेंगे, जिन्हें वे अपना 'गॉडफादर', 'दोस्त' और 'भाई' मानते थे।
मिलाप जवेरी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर संजय गुप्ता के साथ हुई अपनी आखिरी मुलाकात को याद करते हुए लिखा, "हम दस दिन पहले मिले थे और मैंने आपको अपनी अगली फिल्म का टाइटल बताया था। आप खुशी से उछल पड़े और बोले, 'मिलाप! इसी टाइटल वाली ओरिजिनल फिल्म मेरे पिता ने प्रोड्यूस की थी।' उस पल मुझे जो खुशी हुई और मुझ पर आपको जो गर्व महसूस हुआ, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। वह टाइटल, यह फिल्म... सब आपको समर्पित होगी। मैं आपसे प्यार करता हूं गुरुजी। मैं हमेशा आपसे प्यार करता रहूंगा।"
हादसे का विवरण
रिपोर्टों के अनुसार, शुक्रवार रात संजय गुप्ता गिर गए, जिससे उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं और काफी रक्तस्राव हुआ। उस समय उनके परिवार के सभी सदस्य — पत्नी और दो बेटे — घर पर थे, लेकिन सो रहे थे। इस कारण शनिवार सुबह उनकी स्थिति का पता चल सका।
संजय गुप्ता की विरासत
संजय गुप्ता ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार फ़िल्में दीं। उनकी उल्लेखनीय कृतियों में 'कांटे' (2002), 'मुसाफिर' (2004), 'जिंदा' (2006), 'शूटआउट एट वडाला' (2013) और 'काबिल' (2017) शामिल हैं। उन्होंने अपनी तीखी एक्शन शैली और यथार्थवादी किरदारों के लिए एक विशिष्ट पहचान बनाई थी।
बॉलीवुड ने इस दिन एक ऐसे फिल्मकार को विदाई दी जिसने दर्शकों को अलग तरह का सिनेमा देने की हमेशा कोशिश की। उनके सहयोगियों और मित्रों का यह दुख सिनेजगत में उनके अमिट योगदान का प्रमाण है।