संजय गुप्ता का बच्चों से प्यार: बेटी की लेगो क्रिएटिविटी और बेटे शिवांश की मेहनत पर था नाज़
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड फिल्ममेकर संजय गुप्ता का 30 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया — एक दुखद घटना में जब वह रात को बाथरूम में फिसलकर गिरे और सिर में गंभीर चोट लगी। उनके जाने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी वे पुरानी पोस्ट फिर से वायरल हो रही हैं, जिनमें वह एक समर्पित पिता के रूप में नज़र आते थे — अपने दोनों बच्चों की तारीफ करते, उनकी छोटी-बड़ी उपलब्धियों को दुनिया के सामने रखते।
बेटी की लेगो क्रिएटिविटी पर आखिरी पोस्ट
एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर संजय गुप्ता की आखिरी पोस्ट 21 अक्टूबर 2026 को आई थी। इसमें उन्होंने अपनी डाइनिंग टेबल पर बेटी द्वारा बनाए जा रहे एक विशाल लेगो स्ट्रक्चर की तस्वीर साझा की थी। उत्साह और अचरज से भरे उस पल को उन्होंने अपने शब्दों में कुछ यूँ कैद किया था — 'मेरी डाइनिंग टेबल पर अब तक का सबसे बड़ा लेगो स्ट्रक्चर बन रहा है। गजब!!!' वह पोस्ट उनके निधन से महज़ नौ दिन पहले की थी, और अब उनके चाहने वालों के लिए एक भावुक यादगार बन चुकी है।
बेटे शिवांश की अनुशासन-गाथा
इससे पहले संजय गुप्ता ने इंस्टाग्राम पर अपने बेटे शिवांश के लिए एक गहरी भावना से लिखी पोस्ट शेयर की थी। उन्होंने लिखा था — 'मैं अक्सर अपने मुश्किल बचपन की कहानियां सुनाता हूं। हमारे पास कभी बहुत कुछ नहीं था। लेकिन मेरे बेटे शिवांश, तुम्हारे पास सब कुछ है, लगभग सब कुछ। फिर भी तुम मेहनत करना और अपना रास्ता खुद बनाना चुनते हो।'
उन्होंने शिवांश की दिनचर्या का ज़िक्र करते हुए लिखा था कि वह हर सुबह पाँच बजे उठता है, साढ़े पाँच बजे रिक्शे से जिम पहुँचता है, छह बजे से पहले वर्कआउट शुरू कर देता है और फिर साढ़े सात बजे खुद ही स्कूल निकल जाता है — यह सब तब, जब घर में कुक और ड्राइवर की सुविधा मौजूद है। यह स्वेच्छा से चुनी गई मेहनत ही थी जो पिता के दिल को भर देती थी।
एक पिता का गर्व, शब्दों में
पोस्ट में संजय गुप्ता ने आगे लिखा था — 'यही तुम्हारी कहानी को तारीफ के काबिल बनाता है, मेरे बेटे। मुझे गर्व है कि तुम आज जैसे इंसान हो और आगे चलकर जिस इंसान के रूप में खुद को तैयार कर रहे हो। हम तुमसे आज भी प्यार करते हैं और हमेशा करते रहेंगे।' पोस्ट के अंत में उन्होंने हैशटैग #ProudFather भी जोड़ा था — तीन शब्द जो उनकी पूरी भावना कह देते थे।
फिल्मी करियर और निधन
संजय गुप्ता ने अपने निर्देशन करियर की शुरुआत 1994 में फिल्म 'आतिश: फील द फायर' से की थी। इसके बाद उन्होंने 'कांटे', 'मुसाफिर', 'शूटआउट एट लोखंडवाला', 'शूटआउट एट वडाला', 'जज्बा', 'काबिल' और 'मुंबई सागा' जैसी फिल्मों से बॉलीवुड में एक्शन और क्राइम थ्रिलर शैली में अपनी खास पहचान बनाई। उन्होंने अभिनेता संजय दत्त के साथ 'कांटे', 'मुसाफिर' और 'जिंदा' में काम किया। उनकी अंतिम फिल्म 'द मिरांडा ब्रदर्स' 2025 में रिलीज़ हुई थी।
फिल्ममेकर अशोक पंडित ने सोशल मीडिया पर उनके निधन की पुष्टि की थी। संजय गुप्ता का जाना बॉलीवुड के लिए एक अपूरणीय क्षति है — पर उनके बच्चों को लिखी वे पंक्तियाँ एक पिता की सबसे स्थायी विरासत बन गई हैं।