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फ्रैंकफर्ट में तीसरा चीन-यूरोप वैज्ञानिक फोरम: AI, कार्बन न्यूट्रलिटी और नई ऊर्जा पर 8 सत्र

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फ्रैंकफर्ट में तीसरा चीन-यूरोप वैज्ञानिक फोरम: AI, कार्बन न्यूट्रलिटी और नई ऊर्जा पर 8 सत्र

सारांश

फ्रैंकफर्ट में तीसरे चीन-यूरोप वैज्ञानिक फोरम ने AI से लेकर कार्बन न्यूट्रलिटी तक के विषयों पर दोनों महाद्वीपों के वैज्ञानिकों को एक मंच पर लाया। 8 समानांतर सत्र और 70 प्रस्तुतियों के साथ यह आयोजन वैज्ञानिक कूटनीति की एक महत्वपूर्ण कड़ी बना।

मुख्य बातें

तीसरे चीन-यूरोप वैज्ञानिक फोरम का उद्घाटन 30 अक्टूबर 2026 को फ्रैंकफर्ट, जर्मनी में हुआ।
फोरम की थीम: 'चीन और यूरोप की बुद्धिमत्ता का संगम, भविष्य की नई शुरुआत।' AI, नैदानिक चिकित्सा, रोबोटिक्स, कार्बन न्यूट्रलिटी और स्मार्ट सिटी पर 8 समानांतर सत्र आयोजित।
शैक्षणिक और विशेष विषयों पर कुल 70 प्रस्तुतियाँ दी गईं।
यूरोपीय विज्ञान अकादमी के सदस्य हामिद रेजा करीमी ने चीन-यूरोप संयुक्त शोध और प्रतिभा आदान-प्रदान की अपील की।

जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में 30 अक्टूबर 2026 को तीसरे चीन-यूरोप वैज्ञानिक फोरम का उद्घाटन हुआ, जिसमें चीन और यूरोप के अनेक देशों के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस बहुपक्षीय मंच पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), कार्बन न्यूट्रलिटी और नई ऊर्जा जैसे अत्याधुनिक तकनीकी विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

फोरम का विषय और उद्देश्य

इस वर्ष फोरम की केंद्रीय थीम थी — 'चीन और यूरोप की बुद्धिमत्ता का संगम, भविष्य की नई शुरुआत।' आयोजन समिति के अध्यक्ष और यूरोपीय विज्ञान अकादमी के सदस्य हामिद रेजा करीमी ने कहा कि आज विश्व तकनीकी बदलाव, सार्वजनिक स्वास्थ्य, सतत ऊर्जा विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसी जटिल चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन समस्याओं का समाधान कोई एक देश या अनुशासन अकेले नहीं कर सकता।

मुख्य घटनाक्रम

फोरम के अंतर्गत आठ समानांतर सत्र आयोजित किए गए, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नैदानिक चिकित्सा, कार्बन न्यूट्रलिटी एवं नई ऊर्जा, रोबोटिक्स एवं जटिल प्रणालियाँ, तथा स्मार्ट सिटी और भवन निर्माण डिजाइन जैसे विषय शामिल रहे। इसके अतिरिक्त, शैक्षणिक और विशेष विषयों पर कुल 70 प्रस्तुतियाँ दी गईं।

वैज्ञानिक सहयोग की संभावनाएँ

करीमी ने उम्मीद जताई कि इस फोरम के माध्यम से चीन और यूरोप के वैज्ञानिकों के बीच संयुक्त शोध परियोजनाएँ, संस्थागत साझेदारी, प्रतिभाओं का आदान-प्रदान और दीर्घकालिक सहयोग प्रगाढ़ होगा। यह ऐसे समय में आया है जब चीन-यूरोप संबंध व्यापार और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भी वैज्ञानिक कूटनीति के रास्ते को खुला रखने की कोशिश कर रहे हैं।

फोरम की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि चीन-यूरोप वैज्ञानिक फोरम का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच शैक्षणिक आदान-प्रदान और वैज्ञानिक सहयोग को सुदृढ़ करना है। साथ ही, उच्चस्तरीय प्रतिभाओं और नवाचार-केंद्रित कंपनियों के बीच समन्वय को बढ़ावा देना भी इसके प्रमुख लक्ष्यों में शामिल है। यह तीसरा संस्करण उस निरंतर प्रयास की कड़ी है जो दोनों महाद्वीपों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में परस्पर जोड़ती है।

आगे की राह

फोरम में हुई चर्चाओं से अपेक्षा है कि भविष्य में संयुक्त शोध पहल और संस्थागत साझेदारी के ठोस प्रस्ताव सामने आएंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, AI और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में चीन-यूरोप तकनीकी सहयोग वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में भी सहायक हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह देखना होगा कि ये संवाद ठोस संयुक्त परियोजनाओं में कितनी बार बदलते हैं। इस फोरम की असली परीक्षा तब होगी जब 'संयुक्त शोध परियोजनाओं' की घोषणाएँ सत्यापन-योग्य परिणामों में परिवर्तित हों — केवल सम्मेलन कक्षों तक सीमित न रहें।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तीसरा चीन-यूरोप वैज्ञानिक फोरम क्या है?
यह चीन और यूरोपीय देशों के वैज्ञानिकों, विद्वानों और उद्योग प्रतिनिधियों का एक बहुपक्षीय मंच है, जिसका तीसरा संस्करण 30 अक्टूबर 2026 को फ्रैंकफर्ट, जर्मनी में आयोजित हुआ। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच शैक्षणिक आदान-प्रदान और वैज्ञानिक-तकनीकी सहयोग को प्रगाढ़ करना है।
इस फोरम में किन विषयों पर चर्चा हुई?
फोरम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), नैदानिक चिकित्सा, कार्बन न्यूट्रलिटी, नई ऊर्जा, रोबोटिक्स एवं जटिल प्रणालियाँ, तथा स्मार्ट सिटी और भवन निर्माण डिजाइन पर 8 समानांतर सत्र हुए। इसके अलावा 70 शैक्षणिक व विशेष विषय प्रस्तुतियाँ भी दी गईं।
फोरम की इस वर्ष की थीम क्या थी?
इस वर्ष फोरम की थीम 'चीन और यूरोप की बुद्धिमत्ता का संगम, भविष्य की नई शुरुआत' रखी गई थी, जो दोनों महाद्वीपों के बीच वैज्ञानिक एवं तकनीकी नवाचार में सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
हामिद रेजा करीमी कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
हामिद रेजा करीमी यूरोपीय विज्ञान अकादमी के सदस्य और इस फोरम की आयोजन समिति के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलाव, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसी वैश्विक चुनौतियों से कोई अकेला देश नहीं निपट सकता, और इसीलिए चीन-यूरोप वैज्ञानिक सहयोग अनिवार्य है।
इस फोरम से आगे क्या अपेक्षाएँ हैं?
आयोजकों के अनुसार, फोरम से संयुक्त शोध परियोजनाएँ, संस्थागत साझेदारी और प्रतिभाओं के दीर्घकालिक आदान-प्रदान को बल मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI और हरित ऊर्जा में चीन-यूरोप सहयोग वैश्विक जलवायु लक्ष्यों में भी योगदान दे सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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