इंडिया ब्लॉक की 'मॉक पार्लियामेंट' पर संजय निरुपम का हमला — 'नौटंकी से बड़ा ड्रामा नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
इंडिया ब्लॉक द्वारा 31 अक्टूबर को आयोजित 'मॉक पार्लियामेंट' को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने इस आयोजन को सीधे तौर पर 'नौटंकी' और 'बड़ा ड्रामा' करार दिया, जबकि इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने इसे लोकतंत्र बचाने की लड़ाई बताया। यह आयोजन 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित बड़ी रैली से ठीक एक दिन पहले हुआ।
निरुपम का तीखा प्रहार
मुंबई में मीडिया से बातचीत में शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी बहुत बड़ी नौटंकी है और कुछ नहीं, बल्कि एक बड़ा ड्रामा है।' उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में एनडीए सरकार बनने के बाद से कांग्रेस ने संसदीय कार्यवाही को कभी गंभीरता से नहीं लिया।
निरुपम ने कहा कि विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों के कारण बार-बार संसद सत्र बाधित होते हैं, जिससे जनता का पैसा बर्बाद होता है। उनके अनुसार, 'जब संसद का सत्र चल रहा होता है, तो वे चर्चाओं में हिस्सा लेने के बजाय कार्यवाही में बाधा डालते हैं — और अब सड़कों पर मॉक पार्लियामेंट चला रहे हैं। इससे बड़ी नौटंकी नहीं हो सकती।'
भाजपा सांसदों की प्रतिक्रिया
भाजपा सांसद शंभू शरण पटेल ने कहा कि इंडिया गठबंधन को भारत की जनता पहले ही नकार चुकी है। उन्होंने कहा, 'संसद में उन्हें बहुत कम सीटें मिली हैं, इसीलिए वे सड़क पर हैं। उन्हें किसी भी संवैधानिक संस्था पर भरोसा नहीं है और वे आए दिन देश में अराजकता फैलाने का काम कर रहे हैं।' पटेल ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारियाँ निभाने के बजाय 'छुटभैया नेता' की तरह आचरण कर रहे हैं।
भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि वे 20 लाख मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनके क्षेत्र में किसी एक भी मतदाता का वोट नहीं कटा।
इंडिया ब्लॉक का पक्ष
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि इस आयोजन का संदेश पूरे देश में जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र को लूटा जा रहा है, और हम इस संकट में घिरे लोकतंत्र की रक्षा के लिए यहाँ आए हैं।' मसूद ने दावा किया कि 1 नवंबर की रैली में लोग स्वाभाविक रूप से बड़ी संख्या में जुड़ रहे हैं और यह एक 'बहुत सफल रैली' होगी।
समाजवादी पार्टी के नेता आशुतोष वर्मा ने कहा, 'देश करवट बदल रहा है, हम सभी इसके साक्षी हैं। यह लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है और हम सभी साथ हैं।'
आम जनता और राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया ब्लॉक आम चुनाव परिणामों के बाद सत्ता पक्ष के विरुद्ध अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश में है। गौरतलब है कि 'मॉक पार्लियामेंट' जैसे प्रतीकात्मक आयोजन भारतीय विपक्षी राजनीति में नए नहीं हैं — इससे पहले भी विभिन्न दलों ने इसी तरह के प्रदर्शन किए हैं। सत्ता पक्ष इसे जनादेश की अवहेलना बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का माध्यम।
आगे क्या होगा
1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली इंडिया ब्लॉक की रैली की सफलता या विफलता यह तय करेगी कि गठबंधन की एकजुटता कितनी मजबूत है। रैली के बाद दोनों पक्षों की राजनीतिक दिशा और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।