नीट विरोध पर संजय निरुपम का कांग्रेस पर तंज: 'आंदोलन को दिया जा रहा राजनीतिक रंग'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने 21 जुलाई को मुंबई में नीट विरोध प्रदर्शन और कांग्रेस के रुख पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों का यह आंदोलन अब अपने मूल उद्देश्य से भटककर राजनीतिक रंग ले चुका है। साथ ही उन्होंने सिंधु जल संधि और पाकिस्तान को लेकर केंद्र सरकार के कड़े रुख का समर्थन किया।
कांग्रेस की रणनीति पर सवाल
निरुपम ने कहा, 'यह कांग्रेस का पुराना राजनीतिक रवैया है। पार्टी सार्वजनिक रूप से आंदोलनों के प्रति सहानुभूति जताती है, लेकिन सीधे तौर पर उनमें शामिल होने से बचती है। नीट और कथित पेपर लीक के मुद्दे पर भी कांग्रेस ने इसी तरह का रुख अपनाया है।' उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले एक दशक से अधिक समय में कांग्रेस लगातार राजनीतिक रूप से कमज़ोर होती गई है और पार्टी की रणनीति व नेतृत्व को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
आंदोलन का बदलता स्वरूप
जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए निरुपम ने कहा कि शुरुआत में इस आंदोलन का उद्देश्य सरकार का ध्यान छात्रों की समस्याओं की ओर आकर्षित करना था। उन्होंने कहा, 'आंदोलन के बाद सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया और दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय किया। पुनर्परीक्षा के दौरान पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सावधानियाँ बरती गईं।' हालाँकि, उनके अनुसार समय के साथ इस आंदोलन में वामपंथी संगठनों सहित विभिन्न राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी बढ़ने लगी और यह केवल छात्रों के मुद्दों तक सीमित नहीं रहा।
सिंधु जल संधि और पाकिस्तान पर रुख
सिंधु जल संधि के मुद्दे पर शिवसेना प्रवक्ता ने कहा, 'पहलगाम में पर्यटकों की हत्या के बाद भारत ने पाकिस्तान के प्रति अपना रुख सख्त किया।' उन्होंने कहा कि सिंधु नदी के जल को लेकर भारत द्वारा उठाए गए कदमों से पाकिस्तान पर दबाव बना है। निरुपम के अनुसार, यदि पाकिस्तान भविष्य में सिंधु नदी के जल को लेकर किसी प्रकार की अपेक्षा रखता है, तो उसे सबसे पहले सीमा पार से होने वाली आतंकवादी गतिविधियों पर रोक लगानी होगी।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीट विवाद ने विपक्षी दलों को एक बड़ा मुद्दा दिया है, लेकिन आलोचकों का मानना है कि आंदोलन में राजनीतिक दलों की बढ़ती भागीदारी छात्रों की मूल माँगों को कमज़ोर कर सकती है। गौरतलब है कि नीट पेपर लीक का मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है और सर्वोच्च न्यायालय भी इस पर नज़र रखे हुए है।
आगे क्या
नीट विवाद पर सभी पक्षों की नज़र अब सरकार के अगले कदम और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी है। संजय निरुपम के बयान ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या छात्र आंदोलनों को राजनीतिक समर्थन उनकी ताकत बढ़ाता है या उनके मूल उद्देश्य को कमज़ोर करता है।