अमित शाह के पुणे दौरे से पहले सियासी तनाव: कांग्रेस का विरोध, भाजपा की जवाबी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 1 अगस्त को पुणे दौरे से पहले शहर में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। पुणे शहर कांग्रेस ने शाह के दौरे के दौरान सड़क पर उतरकर विरोध जताने का ऐलान किया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए 'जैसे को तैसा' जवाब देने की चेतावनी दी है।
कांग्रेस का विरोध: क्या है मुद्दा
पुणे शहर (पूर्व) कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रशांत जगताप ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने नीट पेपर लीक विवाद के खिलाफ देशभर में हो रहे छात्र आंदोलनों को दबाने की कोशिश की। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, आंसू गैस छोड़ी गई और बल प्रयोग किया गया, जिससे कई छात्र घायल हुए।
जगताप ने दावा किया कि गृह मंत्री शाह उन छात्रों की आवाज दबाने के लिए जिम्मेदार हैं जो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और उनके परिजनों को भी परेशान किया जा रहा है।
विरोध का स्थान और समय
जगताप के अनुसार, 1 अगस्त को सुबह 10:30 बजे कांग्रेस कार्यकर्ता, छात्र और आम नागरिक शंकरशेठ रोड पर स्थित सेवन लव्स चौक पर एकत्र होंगे — जो शाह के तय दौरे के रूट पर पड़ता है। उन्होंने पुणेवासियों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की और कहा कि यह विरोध केंद्र सरकार के 'तानाशाही रवैये' के खिलाफ है।
भाजपा की पलटवार: दौरा नागरिक, विरोध राजनीतिक
पुणे शहर भाजपा के अध्यक्ष धीरज घाटे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस के प्रस्तावित विरोध को 'राजनीतिक रूप से प्रेरित' और 'निराधार' करार दिया। घाटे ने स्पष्ट किया कि शाह का दौरा लोकमान्य तिलक पुरस्कार समारोह में शामिल होने के लिए है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
घाटे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पुणे के लिए गर्व के इस अवसर को राजनीतिक कारणों से फीका करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस आंदोलन का 'पुरजोर विरोध' करेगी और बताया कि साउंड सिस्टम व कार्यक्रम व्यवस्था से जुड़ी सभी ज़रूरी अनुमतियाँ पुलिस से ले ली गई हैं।
दोनों पक्षों की सीधी टकराहट
घाटे की चुनौती के जवाब में जगताप ने कहा, 'हम विरोध प्रदर्शन करेंगे, हमें रोककर दिखाएं। अब यह देखना होगा कि पुणे शहर में कानून-व्यवस्था पुलिस बनाए रखती है या भाजपा कार्यकर्ता। अगर भाजपा हमारे विरोध प्रदर्शन में बाधा डालने की कोशिश करती है, तो पूरा शहर देखेगा कि पुलिस क्या करती है।'
जगताप ने यह भी आरोप लगाया कि पुणे पुलिस आंदोलन को रोकने की बार-बार कोशिश कर रही है, लेकिन पार्टी पीछे नहीं हटेगी। यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब नीट विवाद को लेकर देशभर में छात्र असंतोष चरम पर है।
आगे क्या होगा
1 अगस्त को शाह के दौरे के दौरान पुणे की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी। दोनों दलों के आमने-सामने आने की स्थिति में प्रशासन पर दबाव रहेगा कि वह शांति बनाए रखे और दोनों पक्षों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग करने दे।