नीट पेपर लीक: छात्रों पर लाठीचार्ज और ड्रग्स फंसाने की धमकी पर वडेट्टीवार ने महाराष्ट्र पुलिस को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने गुरुवार, 23 जुलाई को नागपुर में मीडिया को संबोधित करते हुए नीट पेपर लीक के विरोध में सड़कों पर उतरे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और उन पर 50 ग्राम ड्रग्स रखने का झूठा आरोप लगाकर फंसाने की धमकी देने के लिए महाराष्ट्र सरकार और पुलिस प्रशासन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है।
पुलिस के आदर्श वाक्य पर वडेट्टीवार का तीखा सवाल
वडेट्टीवार ने महाराष्ट्र पुलिस के आदर्श वाक्य 'सद्रक्षणाय खलनिग्रहणाय' — अर्थात अच्छे लोगों की रक्षा और बुरों को दंड — का हवाला देते हुए पूछा कि जब पुलिस अधिकारी खुद छात्रों को 50 ग्राम ड्रग्स रखने के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दे रहे हों, तो यह आदर्श वाक्य किस काम का? उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि अब नागरिकों को खुद पुलिस से बचाने का समय आ गया है।" उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि छात्रों को धमकाने के लिए पुलिस के पास ये नशीले पदार्थ कहाँ से आए।
मुख्य घटनाक्रम: मुंबई में विरोध मार्च और हिरासत
इससे एक दिन पहले, बुधवार को महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं ने गांधी भवन से दक्षिण मुंबई स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला। पार्टी का इरादा BJP कार्यालय पहुँचकर संविधान की प्रति सौंपने का था। हालाँकि, पुलिस ने रीगल सिनेमा के पास कांग्रेस नेताओं और पदाधिकारियों को रोककर हिरासत में ले लिया।
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने किया। इसमें विजय वडेट्टीवार, कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य और पूर्व मंत्री नसीम खान, विधायक भाई जगताप, पूर्व सांसद भालचंद्र मुंगेकर, पूर्व सांसद हुसैन दलवई और वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता तुषार गांधी समेत कई नेता शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने "मोदी हटाओ, देश बचाओ" और "जब-जब मोदी डरते हैं, पुलिस को आगे करते हैं" जैसे नारे लगाए।
सरकार पर आरोप: बातचीत नहीं, दमन
वडेट्टीवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाले राज्य प्रशासन दोनों को आड़े हाथों लिया। उनका आरोप है कि सरकार छात्रों की जायज माँगों पर संवाद करने के बजाय आंदोलन को कुचलने की नीति पर चल रही है। हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि नीट पेपर लीक में मोदी सरकार की नाकामी ने देश भर के लाखों छात्रों का भविष्य अंधकार में धकेल दिया है।
सपकाल के अनुसार, गुस्साए छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों से लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों को दरकिनार किया जा रहा है और प्रधानमंत्री मोदी ने हर साल 2 करोड़ नौकरियाँ देने के वादे पूरे नहीं किए।
पेपर लीक का व्यापक संदर्भ
वडेट्टीवार ने बताया कि पिछले एक दशक में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं, जिससे लाखों प्रतियोगी छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ा है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है और सत्ताधारी प्रशासन को विपक्ष पर दोष मढ़ने के बजाय अपनी विफलताएँ स्वीकार कर सुधार लागू करने चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब नीट परीक्षा को लेकर पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर विवाद चल रहा है।
इसके अतिरिक्त, वडेट्टीवार ने कृषि ऋण माफी के आँकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के लिए महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की और दावा किया कि अव्यवस्थित माफी सूचियों ने किसानों के साथ हो रहे धोखे को उजागर कर दिया है। उन्होंने इस मामले में तत्काल पारदर्शिता की माँग की।
आगे क्या
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के समर्थन का उल्लेख करते हुए वडेट्टीवार ने बताया कि पार्टी ने राज्यव्यापी प्रदर्शन शुरू किए हैं, जिनमें तालुका स्तर तक के अभिभावक भी शामिल हो रहे हैं। यदि सरकार ने जल्द संवाद का रास्ता नहीं अपनाया, तो आंदोलन के और विस्तार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।