नीट विवाद: खड़गे की माँग — संसद में हो विस्तृत चर्चा, अमित शाह दें जवाब
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 21 जुलाई — नीट और सीबीएसई परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर संसद में सियासी तकरार तेज हो गई है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने सदन में इस मुद्दे पर विस्तृत बहस की माँग की है और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस बल प्रयोग को लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया है।
खड़गे की माँग: शाह दें सदन में जवाब
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि विपक्ष संसद में इस विषय पर गहन चर्चा चाहता है। उन्होंने कहा कि चर्चा के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में बयान दें और सभी फ्लोर लीडर्स को अपना पक्ष रखने का अवसर मिले।
खड़गे ने सरकार के रवैये को लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमज़ोर करने वाला बताया और कहा, 'मैंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में सरकार का ऐसा तरीका पहले कभी नहीं देखा।'
वेणुगोपाल का स्थगन प्रस्ताव, तीन प्रमुख माँगें
कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि देशभर से छात्र अपनी जायज माँगों को लेकर राजधानी नई दिल्ली पहुँचे थे, लेकिन उनके शांतिपूर्ण विरोध को रोकने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया। कांग्रेस ने संसद में स्थगन प्रस्ताव दिया है, जिसमें तीन प्रमुख माँगें हैं — प्रदर्शन के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज की निंदा, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग, और नीट व सीबीएसई से जुड़े कथित पेपर लीक मामलों में स्पष्ट कार्रवाई।
वेणुगोपाल ने सरकार पर छात्र-विरोधी और युवा-विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश के छात्र अपने भविष्य से जुड़े गंभीर सवाल उठा रहे हैं और सरकार को संवेदनशीलता के साथ जवाबदेही तय करनी चाहिए।
अन्य विपक्षी दलों ने भी घेरा
कांग्रेस सांसद उम्मेदा राम बेनीवाल ने सरकार पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया और कहा कि छात्रों की माँगों पर संसद में चर्चा होनी चाहिए।
आरएसपी सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन ने कहा कि परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की माँग करने वाले छात्र लोकतांत्रिक तरीके से अपना हक माँग रहे थे, और उन्हें दबाने की कोशिश चिंताजनक है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद जॉन ब्रिटास ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि नई दिल्ली में उभरा विरोध युवाओं की बढ़ती नाराज़गी का परिणाम है और सरकार समस्याओं को सुलझाने के बजाय उन्हें दबाने की राह पर है।
आगे क्या
विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव और सदन में बढ़ते दबाव के बीच सरकार की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। यह देखना होगा कि गृह मंत्री अमित शाह या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान संसद में इस मुद्दे पर कोई बयान देते हैं या नहीं। नीट पेपर लीक विवाद पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, और संसदीय दबाव इस मामले में नई राजनीतिक परतें जोड़ रहा है।