संजय निरूपम का नसीरुद्दीन शाह पर हमला, कांग्रेस की 1 नवंबर रैली और जामिया पर भी उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरूपम ने 25 अक्टूबर 2026 को अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की हालिया राजनीतिक टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। निरूपम ने आरोप लगाया कि नसीरुद्दीन शाह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विरोध की आड़ में देशविरोधी माहौल तैयार कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कांग्रेस की 1 नवंबर को प्रस्तावित रामलीला मैदान, नई दिल्ली रैली, 1984 के सिख विरोधी दंगों और जामिया मिल्लिया इस्लामिया में कथित भारत-विरोधी गतिविधियों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
नसीरुद्दीन शाह पर निरूपम के आरोप
निरूपम ने कहा, 'नसीरुद्दीन शाह को बतौर फिल्म अभिनेता इस देश के करोड़ों लोग पसंद करते हैं, लेकिन अचानक बुढ़ापे में उनके अंदर का अभिनेता बाहर निकल गया है और उसमें एक सियासी आदमी, एक जिहादी और कट्टरपंथी मुसलमान पैदा हो गया है।' उन्होंने आगे कहा कि जिस तरह से शाह भाजपा के खिलाफ वीडियो जारी कर रहे हैं, उससे उन्हें डर है कि वे 'भाजपा का विरोध करते-करते भारत देश के खिलाफ न चले जाएं।'
निरूपम ने यह भी कहा कि नसीरुद्दीन शाह एक कलाकार हैं और 'कलाकार की एक गरिमा होती है, एक प्रतिष्ठा होती है।' उनका निवेदन था कि शाह अनावश्यक राजनीतिक विषयों पर टिप्पणी कर अपने कलाकार होने के महत्व को कम न करें।
कांग्रेस की 1 नवंबर रैली पर सवाल
शिवसेना प्रवक्ता ने कांग्रेस की 1 नवंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में आयोजित प्रस्तावित रैली पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि दिल्ली के व्यापारियों ने पहले ही चिंता जताई है कि पिछले कुछ महीनों में विपक्ष के आंदोलनों के कारण दिल्ली की अर्थव्यवस्था और व्यापार पर बुरा असर पड़ा है।
निरूपम ने तर्क दिया कि दिवाली से ठीक पहले 1 नवंबर को इस तरह का प्रदर्शन 'दिल्ली के दुकानदारों के पेट पर लात मारना' है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1 नवंबर 1984 वह काला दिन है जब दिल्ली में सिखों का कत्लेआम हुआ था, और इस तारीख को रैली चुनना सिख समाज के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
1984 के सिख विरोधी दंगे और कांग्रेस
निरूपम ने कहा कि 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस के लोग सड़कों पर उतरे और सिख समाज पर 'भयंकर हमला' बोला, जिसमें हजारों सिखों की जान गई। उन्होंने आरोप लगाया कि 'कांग्रेसी' इस कत्लेआम के जिम्मेदार थे और उनमें से कुछ जेल भी गए।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या 'कांग्रेस पार्टी सिखों के जख्मों पर नमक छिड़कने के लिए 1 नवंबर की तारीख चुन रही है?' कांग्रेस ने इन आरोपों पर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया पर गंभीर आरोप
निरूपम ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया को देश का एक प्रतिष्ठित संस्थान बताते हुए कहा कि इसकी स्थापना भारत के राष्ट्रवादी मुस्लिम विद्वानों ने की थी, जिनमें पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन प्रमुख थे। हालाँकि, उन्होंने आरोप लगाया कि 'हाल के वर्षों में यह संस्थान जिहादियों का अड्डा बनता दिखाई दे रहा है।'
उन्होंने संस्थान की दीवारों पर 'कश्मीर की आजादी' के नारे लिखे जाने और उपद्रवी शरजील इमाम की रिहाई की माँग को लेकर नारेबाजी का हवाला दिया। निरूपम ने माँग की कि दिल्ली पुलिस इस संस्थान पर 'कड़ी निगरानी' रखे और जाँच करे कि 'आईएसआई का कोई संबंध है क्या।' उन्होंने यह भी कहा कि NRC और CAA के विरोध में सबसे बड़ा आंदोलन सबसे पहले जामिया से शुरू हुआ था।
आगे की संभावनाएँ
निरूपम के इन बयानों से राजनीतिक माहौल और गर्म होने की संभावना है, खासतौर पर महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में। कांग्रेस और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया का इंतजार है। जामिया प्रशासन की ओर से भी इन आरोपों पर अभी कोई बयान सामने नहीं आया है।