17 अक्टूबर 2026
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तिरंगा रैली पर संजय निरुपम का आरोप: 'सीजेपी और वाम दलों का मकसद अराजकता, राष्ट्रध्वज बना बहाना'

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तिरंगा रैली पर संजय निरुपम का आरोप: 'सीजेपी और वाम दलों का मकसद अराजकता, राष्ट्रध्वज बना बहाना'

सारांश

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने CJP और वाम दलों की तिरंगा रैली को 'अराजकता फैलाने का बहाना' बताया। राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं पर निराधार आरोप लगाने का आरोप भी लगाया। CJP संस्थापक की कथित अदालती अंडरटेकिंग का हवाला देते हुए शिवसेना ने विपक्ष के 'छिपे एजेंडे' को उजागर करने का दावा किया।

मुख्य बातें

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 17 अक्टूबर 2026 को CJP और वाम दलों की तिरंगा रैली को देश में अराजकता फैलाने का बहाना बताया।
निरुपम ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बिना सबूत सर्वोच्च न्यायालय , चुनाव आयोग और प्रधानमंत्री कार्यालय पर निराधार आरोप लगा रहे हैं।
दावा किया गया कि CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने अदालत में जमानत लेते समय एक वर्ष तक शांति भंग न करने की अंडरटेकिंग दी थी।
शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने कहा कि आज़ाद मैदान पर आयोजित कार्यक्रम में 50 से भी कम लोग उपस्थित थे।
शिवसेना नेता राजू वाघमारे ने कहा कि विपक्षी नेता की गरिमा बनाए रखनी चाहिए और इंडिया ब्लॉक को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना चाहिए।

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 17 अक्टूबर 2026 को मुंबई में आरोप लगाया कि सिटीज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) और वाम दलों द्वारा आयोजित तिरंगा रैली महज एक बहाना थी — असली मकसद देश में अराजकता और कानून-व्यवस्था को कमज़ोर करना था। निरुपम ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी बिना किसी सबूत के संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाकर सड़कों पर अव्यवस्था फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

मुख्य आरोप और बयान

निरुपम ने कहा, 'हमारे पार्टी के प्रमुख नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बिल्कुल सही कहा है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसे ज़िम्मेदार पद पर रहते हुए भी राहुल गांधी रोज़ दिल्ली की सड़कों पर अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।' उन्होंने आगे कहा कि गांधी बिना किसी सबूत के सर्वोच्च न्यायालय, चुनाव आयोग, प्रधानमंत्री कार्यालय और प्रधानमंत्री के पद पर निराधार आरोप लगा रहे हैं।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब कनॉट प्लेस, नई दिल्ली में CJP और वाम दलों द्वारा आयोजित तिरंगा रैली के दौरान दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई की थी। निरुपम ने पुलिस की इस कार्रवाई को उचित ठहराते हुए कहा कि 'तिरंगे की आड़ में कनॉट प्लेस में उत्पात मचाने का इरादा था।'

सीजेपी संस्थापक पर अदालती अंडरटेकिंग का हवाला

निरुपम ने दावा किया कि CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अदालत में जमानत लेते समय यह अंडरटेकिंग दी थी कि वे आने वाले एक वर्ष तक ऐसी कोई हरकत नहीं करेंगे जिससे सार्वजनिक शांति भंग हो। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद रैली का आयोजन इस प्रतिबद्धता का उल्लंघन है।

गौरतलब है कि इस पूरे विवाद में CJP और वाम दलों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया तत्काल उपलब्ध नहीं थी। निरुपम के आरोप शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के राजनीतिक दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करते हैं।

पार्टी के अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

शिवसेना नेता राजू वाघमारे ने कहा कि राहुल गांधी को विरोध-प्रदर्शन करने की 'आदत' पड़ गई है और विपक्ष के नेता की एक गरिमा होती है जिसे बनाए रखना ज़रूरी है। उन्होंने कहा, 'हर रोज़ सड़क पर आकर, जनता को क्या दिखाना चाहते हैं? रोज़ चिल्लाकर कुछ हासिल नहीं होने वाला — यह बात इंडिया ब्लॉक को सोचनी पड़ेगी।'

शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने कहा कि विपक्ष के आंदोलन का असली मकसद अब जनता के सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा में छात्रों के साथ अन्याय तक सीमित रहने वाली बात धीरे-धीरे EVM और वोट-चोरी के आरोपों तक पहुँच गई। कायंदे ने यह भी कहा कि आज़ाद मैदान पर आयोजित कार्यक्रम में 50 से भी कम लोग उपस्थित थे और वहाँ खड़े अधिकांश लोग तमाशा देखने वाले थे।

आम जनता और राजनीतिक असर

शिवसेना के इस आक्रामक रुख को महाराष्ट्र की राजनीति में महागठबंधन और विपक्षी गठजोड़ के बीच बढ़ती तकरार के संदर्भ में देखा जा रहा है। विपक्ष का CJP से जुड़ाव और तिरंगा रैली का आयोजन शासकीय दल के लिए राजनीतिक हमले का नया मोर्चा बन गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार सरकारी नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरने की रणनीति अपना रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे 'देश-विरोधी एजेंडे' से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में CJP की ओर से और शिवसेना की प्रतिक्रिया से यह विवाद और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कुछ महत्वपूर्ण पहलू अनुत्तरित रहते हैं — जैसे कि अभिजीत दिपके की कथित अदालती अंडरटेकिंग की स्वतंत्र पुष्टि और यह कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के लिए ठोस कानूनी आधार क्या था। तिरंगे जैसे राष्ट्रीय प्रतीक से जुड़े आयोजन को 'अराजकता' बताना एक ऐसा राजनीतिक फ्रेम है जो विपक्ष के विरोध के अधिकार और उसकी कथित 'हिडन एजेंडा' के बीच की रेखा को धुंधला करता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि CJP या विपक्ष की ओर से कोई प्रतिक्रिया क्यों अनुपस्थित है — जो इस एकतरफा आख्यान को चुनौती देने के लिए ज़रूरी है। महाराष्ट्र की राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए, यह हमला विधानसभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा भी हो सकता है।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय निरुपम ने सीजेपी की तिरंगा रैली पर क्या आरोप लगाए?
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने आरोप लगाया कि CJP और वाम दलों की तिरंगा रैली देश में अराजकता फैलाने और कानून-व्यवस्था कमज़ोर करने का बहाना थी। उनके अनुसार, तिरंगे की आड़ में कनॉट प्लेस में उत्पात मचाने का इरादा था।
अभिजीत दिपके की अदालती अंडरटेकिंग का मामला क्या है?
निरुपम ने दावा किया कि CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने अदालत में जमानत लेते समय यह अंडरटेकिंग दी थी कि वे एक वर्ष तक ऐसी कोई हरकत नहीं करेंगे जिससे सार्वजनिक शांति भंग हो। उन्होंने इस आधार पर तिरंगा रैली के आयोजन को अदालती प्रतिबद्धता का उल्लंघन बताया।
राहुल गांधी पर शिवसेना ने क्या आरोप लगाए?
शिवसेना प्रवक्ता निरुपम ने आरोप लगाया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बिना किसी सबूत के सर्वोच्च न्यायालय, चुनाव आयोग और प्रधानमंत्री कार्यालय पर निराधार आरोप लगा रहे हैं और दिल्ली की सड़कों पर अव्यवस्था फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
आज़ाद मैदान पर CJP के कार्यक्रम में कितने लोग उपस्थित थे?
शिवसेना नेता मनीषा कायंदे के अनुसार, आज़ाद मैदान पर आयोजित कार्यक्रम में 50 से भी कम लोग उपस्थित थे और अधिकांश तमाशबीन थे। हालाँकि, इस आँकड़े की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
इस राजनीतिक विवाद का महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर हो सकता है?
शिवसेना का यह आक्रामक रुख विपक्षी गठजोड़ और महागठबंधन के बीच बढ़ती तकरार को दर्शाता है। CJP से जुड़े विवाद को सत्तारूढ़ दल राजनीतिक हमले के नए मोर्चे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसका असर आने वाले चुनावी राजनीति पर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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