संजय निरुपम का राहुल गांधी और केजरीवाल पर हमला: विरोध को बताया अराजकता की साजिश
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 10 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर विरोध-प्रदर्शनों के ज़रिए देश में अव्यवस्था फैलाने का प्रयास करने का गंभीर आरोप लगाया। निरुपम ने वोट चोरी के दावों को राहुल गांधी का कथित 'फर्जी नैरेटिव' करार देते हुए चुनाव आयोग की आलोचना को भी निराधार बताया।
वोट चोरी का नैरेटिव और राष्ट्रपति से मुलाकात
संजय निरुपम के अनुसार, राहुल गांधी वोट चोरी के मुद्दे पर कथित तौर पर भ्रामक नैरेटिव चला रहे हैं और विशेष पहचान रजिस्टर (SIR) जैसी संवैधानिक एवं वैधानिक प्रक्रिया को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस द्वारा दो बार हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलने पहुँचे। निरुपम ने राष्ट्रपति द्वारा समय दिए जाने को उनकी उदारता बताया, परन्तु इस मुलाकात के आधार पर राष्ट्रपति को वोट चोरी के आरोपों से सहमत बताने के राहुल गांधी के कथित दावे की कड़ी आलोचना की।
निरुपम ने कहा कि राष्ट्रपति का संवैधानिक पद राजनीति से सर्वथा ऊपर है और किसी संवैधानिक पदाधिकारी के नाम का उपयोग अपनी राजनीतिक बातों को उचित ठहराने के लिए करना उचित नहीं है।
केजरीवाल पर निशाना: पुराने वादे और नई रणनीति
अरविंद केजरीवाल के विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने पर निरुपम ने कहा कि उन्हें इसमें कोई आश्चर्य नहीं है। उन्होंने केजरीवाल के पुराने भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस समय के वादों और बाद की राजनीतिक गतिविधियों के बीच गहरा अंतर रहा है। निरुपम ने दावा किया कि AAP की राजनीतिक विश्वसनीयता कमज़ोर पड़ने के कारण केजरीवाल अन्य राजनीतिक ताकतों के माध्यम से अपना प्रभाव बनाए रखना चाहते हैं। उन्होंने एक नए राजनीतिक समूह के आंदोलन को केजरीवाल के समर्थन से जोड़कर इसे उनकी रणनीतिक चाल बताया।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और मेट्रो बंद का बचाव
निरुपम ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई, कई मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद करने और कुछ ट्रेनों को रद्द किए जाने के फैसले का पूरी तरह बचाव किया। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर और आसपास के महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों के निकट पिछले प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर अव्यवस्था, मारपीट और तोड़फोड़ की घटनाएँ हुई थीं, जिनके मद्देनज़र ये एहतियाती कदम उठाए गए। उनके अनुसार, विभिन्न राज्यों से दिल्ली आने की तैयारी कर रहे प्रदर्शनकारियों के कारण संभावित अव्यवस्था को रोकना और राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना इन फैसलों का मुख्य उद्देश्य था।
आपातकाल की तुलना खारिज
मौजूदा स्थिति की इमरजेंसी से तुलना को निरुपम ने सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए महज अस्थायी व्यवस्था की है और इसे आपातकाल से जोड़ना भ्रामक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार संविधान प्रदत्त है, किंतु प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने चाहिए और आम नागरिकों की सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था को बाधित नहीं करने चाहिए।
यह ऐसे समय में आया है जब वोट चोरी और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तनाव चरम पर है। निरुपम की यह प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तीखा कर सकती है।