सीजेपी को लेकर भाजपा का बड़ा हमला: 'कांग्रेस देशविरोधी तत्वों को दे रही फंडिंग'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 18 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस पर कड़ा हमला बोला, यह आरोप लगाते हुए कि पार्टी कथित तौर पर सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के माध्यम से देशविरोधी गतिविधियों को वित्तीय समर्थन दे रही है। कर्नाटक के हुबली से भाजपा विधायक महेश तेंगिनाकाई ने यह बयान दिया, जिसे लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है।
भाजपा विधायक के आरोप
तेंगिनाकाई ने कहा कि कांग्रेस का नेतृत्व पूरी तरह विफल हो चुका है और पार्टी अब अपनी पकड़ मज़बूत करने के लिए देशविरोधी तत्वों का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा, सीजेपी कांग्रेस का ही एक अनौपचारिक गुट है जो देशद्रोहियों को फंडिंग कर रही है।
उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद के हुबली में दिए गए बयान का सीधे हवाला दिया। तेंगिनाकाई के अनुसार, हरिप्रसाद ने कहा था: 'जो भी पीएम मोदी के खिलाफ हड़ताल करेगा या आवाज उठाएगा, हम उसे फंडिंग करेंगे और उसके साथ खड़े होंगे।' तेंगिनाकाई ने इस बयान को 'पूरी तरह से गलत' करार दिया।
कांग्रेस का पलटवार
इन आरोपों के जवाब में कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने सीजेपी का समर्थन किया और सीजेपी की तिरंगा यात्रा पर दर्ज हुई एफआईआर को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
राजपूत ने कहा: 'तिरंगा यात्रा निकालना देशभक्ति का काम है, देशद्रोह का नहीं। अगर देशभक्ति के ऐसे कार्यों पर एफआईआर दर्ज की जाती है और लोगों को गिरफ्तार किया जाता है, तो यही माना जाएगा कि यह सरकार भारत के लोगों की नहीं, बल्कि अंग्रेजों की मानसिकता वाली सरकार है।'
राजपूत ने यह भी कहा कि देश की जनता अपने हाथ में तिरंगा लेकर निकल रही है, और इस पर कार्रवाई करना लोकतंत्र एवं देशभक्ति दोनों का अपमान है।
सीजेपी और तिरंगा यात्रा विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब सीजेपी की तिरंगा यात्रा के संबंध में एफआईआर दर्ज होने से सियासी माहौल गर्म है। भाजपा का कहना है कि सीजेपी की गतिविधियाँ राष्ट्रहित में नहीं हैं, जबकि कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का दमन बताती है। गौरतलब है कि कर्नाटक में वर्तमान में कांग्रेस की सरकार है, जिससे यह वाक्-युद्ध राज्य की राजनीति में भी केंद्रीय मुद्दा बनता जा रहा है।
भाजपा की चेतावनी
तेंगिनाकाई ने अपने बयान में यह भी कहा कि देश के 140 करोड़ लोग आने वाले दिनों में कांग्रेस को इसका करारा जवाब देंगे। उन्होंने पार्टी के केंद्रीय और राज्य नेतृत्व, दोनों को 'पूरी तरह विफल' करार दिया।
यह टकराव आगे भी जारी रहने की संभावना है, क्योंकि कर्नाटक में विधानसभा से जुड़े राजनीतिक समीकरण और देशभक्ति बनाम राजनीतिक विरोध के सवाल पर दोनों दलों के बीच तनातनी बढ़ती दिख रही है।