सीजेपी प्रदर्शन और अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी पर सियासी संग्राम, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली में सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) के विरोध-प्रदर्शन और कार्यकर्ता अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी ने 10 अक्टूबर 2026 को देशभर में राजनीतिक बहस को तेज कर दिया। जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रदर्शनकारियों पर देशविरोधी तत्वों से साँठगाँठ का आरोप लगाया, वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने इस गिरफ्तारी को लोकतंत्र पर हमला करार दिया और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की माँग की।
भाजपा का पक्ष: देशविरोधी मंशा का आरोप
पश्चिम बंगाल के नदिया से भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत निरंतर प्रगति कर रहा है और आम जनता इसे भली-भाँति समझ चुकी है। उनके अनुसार, चुनावों में विपक्ष का वोट प्रतिशत लगातार घट रहा है, जिसके चलते वोट चोरी जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं।
सरकार ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ कम्युनिस्ट, पाकिस्तान समर्थक और कथित 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' से जुड़े लोग देश को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से एकजुट हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इन तत्वों की मंशा अब सार्वजनिक हो चुकी है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया: लोकतंत्र पर हमले का आरोप
मुंबई में कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र विधान परिषद सदस्य भाई जगताप ने अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी को देश में बढ़ती सख्ती का अगला चरण बताया। उन्होंने कहा कि जनता लोकतंत्र पर इस प्रकार के हमले को बर्दाश्त नहीं करेगी।
जगताप ने सवाल किया कि क्या अभिजीत दिपके कोई अपराधी हैं या दाऊद इब्राहिम, जिन्हें विमान से इस तरह हिरासत में लिया गया। उन्होंने कहा कि दिपके देश के युवा नागरिक हैं जो अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठा रहे हैं, और देश का युवा वर्ग उनके साथ खड़ा है।
असलम शेख का हमला: आपातकाल जैसे हालात का दावा
कांग्रेस विधायक असलम शेख ने संविधान के तहत विरोध-प्रदर्शन के अधिकार की वकालत करते हुए सवाल किया कि जब लोग अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग कर रहे हों, तो उनके साथ मारपीट क्यों की जाए और होटल क्यों बंद कराए जाएँ।
शेख ने आरोप लगाया कि देशभर में आपातकाल जैसे हालात बनाए जा रहे हैं, पुलिस और सुरक्षाबल बच्चों व युवाओं के विरुद्ध तैनात किए जा रहे हैं, और आवासीय सोसायटियों में भी युवाओं को डराया जा रहा है। हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर भी सवाल
असलम शेख ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने उन्हें कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए विशेष कानून बनाया। उन्होंने प्रश्न उठाया कि ऐसा कदम क्यों उठाया गया और क्या इसका उद्देश्य जवाबदेही से बचाव था। शेख ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और किसी के भी गलत कार्य पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में नागरिक अधिकार समूहों और सरकार के बीच तनाव की खबरें आ रही हैं। अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी के बाद सीजेपी के अगले कदम और संभावित न्यायिक हस्तक्षेप पर सबकी नज़रें टिकी हैं। गौरतलब है कि इस घटना ने विपक्षी दलों को एकजुट करने का अवसर दिया है, और आने वाले दिनों में संसदीय स्तर पर भी यह मुद्दा उठाए जाने की संभावना है।