17 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर सीपीएम का कड़ा विरोध, शिवदासन बोले- 'लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर सीपीएम का कड़ा विरोध, शिवदासन बोले- 'लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं'

सारांश

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके, आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा और सैकड़ों छात्रों की पुलिस हिरासत पर सीपीएम ने तीखा विरोध जताया। सांसद वी. शिवदासन ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन और गृह मंत्रालय-निर्देशित कार्रवाई करार दिया।

मुख्य बातें

सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके और आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा समेत सैकड़ों छात्र-प्रदर्शनकारियों को नई दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस हिरासत में लिया गया।
सीपीएम के राज्यसभा सांसद वी.
शिवदासन ने हिरासत को ' गृह मंत्रालय के निर्देश' पर की गई कार्रवाई बताते हुए इसे लोकतंत्र-विरोधी करार दिया।
छात्राओं और महिला राजनीतिक कार्यकर्ताओं को पुलिस स्टेशन में घंटों बिना स्पष्ट कारण बताए हिरासत में रखे जाने का आरोप।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक के पत्र को सीपीएम ने समर्थन दिया।
सीपीएम का आरोप — BJP महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर उसमें जानबूझकर देरी कर रही है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने नई दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके, आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा और सैकड़ों अन्य छात्र-प्रदर्शनकारियों को पुलिस हिरासत में लिए जाने की 17 अक्टूबर 2026 को कड़ी निंदा की। सीपीएम के राज्यसभा सांसद वी. शिवदासन ने स्पष्ट कहा कि इस तरह की कार्रवाई एक लोकतांत्रिक देश में स्वीकार्य नहीं है।

मुख्य घटनाक्रम

राज्यसभा सांसद वी. शिवदासन ने शनिवार को कहा, 'पुलिस ने छात्रों और युवाओं को गिरफ्तार किया। यहां तक कि पुलिस अधिकारियों को भी नहीं पता कि इसकी वजह क्या है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर ही इन तमाम छात्रों और प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया और घंटों तक हिरासत में रखा गया, जिनमें छात्राएं भी शामिल थीं।'

उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग राजनीतिक दलों की महिला सदस्यों को पुलिस स्टेशन में घंटों तक बिठाए रखना पूरी तरह से मानवाधिकारों के विरुद्ध है। शिवदासन के अनुसार, 'अभिजीत दिपके, नेहा बोरा और सैकड़ों छात्रों के साथ बदसलूकी की गई — एक लोकतांत्रिक देश के लिए ये सब बातें बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं।'

सरकार की भूमिका पर सवाल

सीपीएम नेता ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई गृह मंत्रालय के सीधे निर्देश पर हुई, न कि पुलिस की स्वायत्त कार्रवाई के तहत। उनका कहना है कि जब पुलिस अधिकारी स्वयं हिरासत की वजह बताने में असमर्थ हों, तो यह और भी चिंताजनक है। गौरतलब है कि यह आरोप पार्टी की ओर से लगाया गया है और सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

परिसीमन और महिला आरक्षण पर सीपीएम का रुख

हिरासत की घटना के साथ-साथ वी. शिवदासन ने प्रस्तावित परिसीमन योजना पर भी अपनी पार्टी का स्पष्ट रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से प्रधानमंत्री को लिखा गया पत्र — जिसमें सर्वदलीय बैठक की माँग की गई है — सही दिशा में उठाया गया कदम है।

शिवदासन के अनुसार, 'भारत में कुछ राज्यों ने देश की ज़रूरत के हिसाब से अपनी जनसंख्या नीति लागू की है, जबकि कुछ राज्य अभी उस स्थिति में नहीं हैं। इसलिए इनमें अंतर है।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर उसमें जानबूझकर देरी करना चाहती है। सीपीएम का रुख है कि महिला आरक्षण एक अलग और तत्काल आवश्यकता है, जिसे परिसीमन की प्रक्रिया से नहीं बाँधा जाना चाहिए।

आम जनता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर असर

आलोचकों का कहना है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान छात्राओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को बिना स्पष्ट कारण बताए घंटों हिरासत में रखना नागरिक स्वतंत्रता और विरोध के संवैधानिक अधिकार पर सवाल उठाता है। यह ऐसे समय में आया है जब परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक तापमान पहले से ही ऊँचा है।

आगे की राह

सीपीएम ने संकेत दिए हैं कि वह इस मामले को संसद और सड़क — दोनों मंचों पर उठाती रहेगी। शिवदासन ने साफ कहा, 'हमारी लड़ाई जारी रहेगी।' परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक की माँग को लेकर विपक्षी दलों के बीच एकजुटता बनने के संकेत मिल रहे हैं, हालाँकि सरकार की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यदि सत्यापित हो तो यह दिल्ली पुलिस की परिचालन स्वायत्तता पर सवाल खड़ा करता है। दूसरी ओर, यह भी देखने वाली बात है कि सीपीएम ने इस घटना को परिसीमन विवाद के साथ जोड़कर एक व्यापक राजनीतिक बयान बनाने की कोशिश की है — जो विपक्षी एकजुटता की रणनीति का हिस्सा लगती है। महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग रखने की माँग तर्कसंगत है, लेकिन इस पर आम सहमति बनाना राजनीतिक रूप से आसान नहीं होगा।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिजीत दिपके और नेहा बोरा को क्यों हिरासत में लिया गया?
दोनों को नई दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया। सीपीएम सांसद वी. शिवदासन के अनुसार, हिरासत का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया और पुलिस अधिकारी भी इसकी वजह से अनजान थे।
सीपीएम ने इस हिरासत पर क्या कहा?
सीपीएम के राज्यसभा सांसद वी. शिवदासन ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन और गृह मंत्रालय के निर्देश पर की गई कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।
सीजेपी और आइसा क्या हैं?
सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) एक नागरिक अधिकार संगठन है, जिसके संस्थापक अभिजीत दिपके हैं। आइसा (All India Students Association) एक वामपंथी छात्र संगठन है, जिसकी अध्यक्ष नेहा बोरा हैं।
परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक की माँग क्यों उठ रही है?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग की है। सीपीएम का कहना है कि अलग-अलग राज्यों की जनसंख्या नीति में अंतर के कारण परिसीमन के प्रभाव पर व्यापक विमर्श जरूरी है।
सीपीएम का महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर क्या रुख है?
सीपीएम का स्पष्ट रुख है कि महिला आरक्षण देश की एक तत्काल आवश्यकता है और इसे परिसीमन की प्रक्रिया से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। पार्टी का आरोप है कि BJP इन दोनों को जोड़कर आरक्षण में देरी की रणनीति अपना रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 घंटे पहले
  2. 17 घंटे पहले
  3. 19 घंटे पहले
  4. 19 घंटे पहले
  5. 21 घंटे पहले
  6. 6 दिन पहले
  7. 6 दिन पहले
  8. 2 महीने पहले