17 अक्टूबर 2026
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दिल्ली पुलिस ने सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके को गिरफ्तार किया, शनिवार को अदालत में होंगे पेश

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दिल्ली पुलिस ने सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके को गिरफ्तार किया, शनिवार को अदालत में होंगे पेश

सारांश

दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस में 'लहरा दो तिरंगा' रैली के दौरान सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके को गिरफ्तार किया — एक हफ्ते में यह उनकी दूसरी हिरासत है। पार्टी के दो सह-संयोजक पहले से न्यायिक हिरासत में हैं। शनिवार को एसईएम अदालत में पेशी होगी।

मुख्य बातें

सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके को 17 अक्टूबर 2026 को कनॉट प्लेस की 'लहरा दो तिरंगा' रैली के दौरान दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया।
दिपके को शनिवार को एसईएम अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा; वकीलों से मुलाकात अभी तक नहीं हो पाई है।
सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
एक हफ्ते में दिपके की यह दूसरी गिरफ्तारी है; पहली हिरासत मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़ी थी।
पुलिस ने बीएनएसएस धारा 163 के तहत नोटिस जारी कर एनडीएमसी की अनुमति न होने का हवाला दिया।

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके को गिरफ्तार कर लिया। दिपके को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में आयोजित सीजेपी की 'लहरा दो तिरंगा' रैली के दौरान हिरासत में लिया गया। उन्हें शनिवार को एसईएम अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।

गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि

सीजेपी की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी कि 'अभिजीत को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें एसईएम कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा। उनकी लोकेशन अभी पता नहीं है और वकीलों की उनसे मुलाकात नहीं हो पाई है।' यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब सीजेपी के दो सह-संयोजकों — सौरव दास और आशुतोष रांका — को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर कथित तौर पर अनधिकृत प्रवेश और राष्ट्रीय ध्वज फहराने के आरोप में पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका था।

एक हफ्ते में दूसरी हिरासत

गौरतलब है कि अभिजीत दिपके के लिए यह एक सप्ताह में दूसरी गिरफ्तारी है। इससे पूर्व उन्हें मुंबई से नई दिल्ली पहुँचने के तुरंत बाद हिरासत में लिया गया था। वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने आए थे, जो 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची में कथित हेरफेर को लेकर था। यह ऐसे समय में आया है जब सीजेपी और दिल्ली पुलिस के बीच विरोध प्रदर्शनों को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है।

पुलिस नोटिस और कानूनी आधार

रैली से पहले दिल्ली पुलिस ने दिपके को एक नोटिस भेजा था, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि कनॉट प्लेस विरोध प्रदर्शन के लिए अधिकृत स्थान नहीं है और नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) ने प्रस्तावित 'तिरंगा यात्रा' के लिए अनुमति नहीं दी है। यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत जारी किया गया था, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि मार्च निकालना या भीड़ इकट्ठा करना इलाके में लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन होगा।

दिपके का पक्ष

अपने आवास पर पुलिसकर्मियों से बातचीत के दौरान दिपके ने अपनी हिरासत के आधार पर सवाल उठाते हुए पूछा, 'आपने मुझ पर किस तरह का आरोप लगाया है?' जब उन्हें बताया गया कि वह नई दिल्ली नहीं जा सकते, तो उन्होंने कहा कि वह कहीं और जा सकते हैं और पूछा कि उन्होंने किस कानून का उल्लंघन किया है।

पुलिस का स्पष्टीकरण

दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन बिना अनुमति के जुलूस निकालना और पाबंदियों का उल्लंघन करते हुए भीड़ इकट्ठा करना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है। दिपके को ध्वज संहिता (फ्लैग कोड) के नियमों के बारे में भी याद दिलाया गया। यह मामला अब अदालत में जाएगा, जहाँ शनिवार को दिपके की पेशी से स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्या आरोप — पर ध्यान केंद्रित करती है, जबकि जंतर-मंतर की 'डी-नोटिफिकेशन' का समय और उसके पीछे की मंशा असली सवाल है।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिजीत दिपके को क्यों गिरफ्तार किया गया?
दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में बिना अनुमति के 'लहरा दो तिरंगा' रैली आयोजित करने के प्रयास के कारण गिरफ्तार किया। एनडीएमसी ने प्रस्तावित तिरंगा यात्रा की अनुमति नहीं दी थी और पुलिस ने बीएनएसएस की धारा 163 के तहत पहले नोटिस भी जारी किया था।
अभिजीत दिपके को कब अदालत में पेश किया जाएगा?
अभिजीत दिपके को शनिवार को एसईएम अदालत के सामने पेश किया जाएगा। सीजेपी की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद से उनके वकीलों की उनसे मुलाकात नहीं हो पाई है।
सीजेपी के सह-संयोजकों को क्यों हिरासत में लिया गया था?
सीजेपी के दो सह-संयोजकों, सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर कथित तौर पर अनधिकृत प्रवेश और राष्ट्रीय ध्वज फहराने के आरोप में पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। उस स्थल को उससे एक दिन पहले ही विरोध प्रदर्शन के लिए 'डी-नोटिफाई' किया गया था।
क्या राष्ट्रीय ध्वज फहराना कानूनी रूप से प्रतिबंधित है?
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। हालाँकि बिना अनुमति के जुलूस निकालना और निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए भीड़ इकट्ठा करना कानूनी कार्रवाई का आधार बन सकता है।
दिपके की यह दूसरी गिरफ्तारी किस वजह से थी?
17 अक्टूबर की गिरफ्तारी एक हफ्ते में दूसरी थी। इससे पहले दिपके को मुंबई से नई दिल्ली पहुँचने के तुरंत बाद हिरासत में लिया गया था, जब वह 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची में कथित हेरफेर को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने आए थे।
राष्ट्र प्रेस
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