16 अक्टूबर 2026
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तिरंगा फहराने पर जेल जाना पड़े तो तैयार हैं: सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके का ऐलान

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तिरंगा फहराने पर जेल जाना पड़े तो तैयार हैं: सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके का ऐलान

सारांश

नई दिल्ली के कनॉट प्लेस में तिरंगा फहराने की घोषणा के बाद सरकार ने सेंट्रल पार्क बंद कर दिया। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा — जेल जाना पड़े तो तैयार हैं। दो सदस्य पहले ही न्यायिक हिरासत में भेजे जा चुके हैं। चुनाव आयुक्त की बर्खास्तगी की माँग को लेकर आंदोलन जारी है।

मुख्य बातें

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 16 अक्टूबर 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि तिरंगा फहराने पर जेल जाना पड़े, तो वे तैयार हैं।
'लहरा दो तिरंगा' मार्च की घोषणा के बाद प्रशासन ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद करने का निर्णय लिया।
सीजेपी के दो सदस्य — आशुतोष और सौरभ — राष्ट्रीय ध्वज फहराने के आरोप में न्यायिक हिरासत में भेजे गए।
सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और स्वतंत्र निष्पक्ष आयुक्त की नियुक्ति की माँग की।
नेशनल लीगल लीड रत्ना सिंह ने हिरासतों को गैर-कानूनी बताते हुए उच्च अदालत में चुनौती देने की घोषणा की।
दिपके ने कथित पुलिस निगरानी का उल्लेख करते हुए इस स्थिति को 'आपातकाल' करार दिया।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय संयोजक और संस्थापक अभिजीत दिपके ने 16 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के झंडेवालान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यदि देश में तिरंगा फहराने पर जेल जाना पड़े, तो वे इसके लिए तैयार हैं। उनके साथ सीजेपी की नेशनल लीगल लीड रत्ना सिंह भी मौजूद थीं, जिन्होंने राष्ट्रीय ध्वज के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस द्वारा लगाई गई कथित पाबंदियों पर सवाल उठाए।

मुख्य घटनाक्रम

दिपके ने बताया कि सीजेपी ने 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में 'लहरा दो तिरंगा' मार्च की घोषणा की थी। उनके अनुसार, इस घोषणा के बाद प्रशासन ने सेंट्रल पार्क को ही बंद करने का निर्णय ले लिया। उन्होंने कहा कि इससे पहले 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के आह्वान के बाद कथित तौर पर पूरी दिल्ली में बसें, मेट्रो, रेलवे और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं और जगह-जगह बैरिकेड्स लगाए गए थे।

दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'हम आपसे डरते नहीं हैं। मैं यहीं बैठा हूं, आइए और मुझे उठा ले जाइए। अगर अपना राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए हमें जेल जाना पड़े, तो हम जरूर जाएंगे।'

हिरासत और निगरानी के आरोप

दिपके ने बताया कि सीजेपी के दो सदस्यों — आशुतोष और सौरभ — को राष्ट्रीय ध्वज लहराने के आरोप में हिरासत में लिया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उन्होंने एक सार्वजनिक वीडियो का उल्लेख किया जिसमें कथित तौर पर एक पुलिस अधिकारी सीजेपी के नेशनल मीडिया लीड विजय मलंगी और उनके एक साथी को सेंट्रल पार्क के बाहर तिरंगे के साथ वीडियो रिकॉर्ड करने से रोकते नजर आ रहे हैं।

दिपके ने आरोप लगाया कि उनके वर्तमान आवास के आसपास सादे कपड़ों में पुलिस और सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। उन्होंने पत्रकारों के सामने कहा, 'चारों ओर देखिए, सादे कपड़ों में पुलिस और आईबी के लोग हैं। एक सफेद स्कॉर्पियो हमेशा मेरा पीछा कर रही है।' उन्होंने यह भी दावा किया कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के कर्मी रत्ना सिंह का पीछा कर रहे थे और बिना नंबर प्लेट की गाड़ियां टीम के सदस्यों की निगरानी कर रही थीं।

सीजेपी की माँगें

दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और उनकी जगह एक स्वतंत्र व निष्पक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की माँग दोहराई। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने चुनावों में हेरफेर की है, सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी के बिना 'फॉर्म 6' में बदलाव किया है और साथी चुनाव आयुक्तों की चिंताओं को नजरअंदाज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अभियान का उद्देश्य सरकार को गिराना नहीं, बल्कि भारत में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव आयोग स्थापित करना है।

कानूनी पहलू

सीजेपी की नेशनल लीगल लीड रत्ना सिंह ने बताया कि आशुतोष और सौरभ की रिहाई के लिए सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई थीं, लेकिन जानबूझकर इस प्रक्रिया में देरी की गई और अंततः टीम को बताया गया कि यह काम अगले दिन पूरा होगा। उन्होंने इन हिरासतों को गैर-कानूनी बताते हुए कहा कि सीजेपी इस कार्रवाई को उच्च अदालत सहित न्यायालय में चुनौती देगा।

व्यापक परिप्रेक्ष्य

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में नागरिक स्वतंत्रता और विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर बहस तेज है। दिपके ने इस स्थिति को 'आपातकाल' करार दिया और कहा कि केंद्र सरकार इसकी औपचारिक घोषणा करने से बच रही है। अभियान महात्मा गांधी और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के आदर्शों पर आधारित बताया गया है। दिपके ने कहा, 'हम शांति और अहिंसा में विश्वास करते हैं। हम तो बस जवाबदेही मांग रहे हैं।' गौरतलब है कि एक पत्रकार के यह कहने पर कि दिल्ली पुलिस केवल 11 लोगों को तिरंगा फहराने की अनुमति देगी, दिपके ने सवाल किया कि यह कौन तय करता है। उन्होंने कहा, 'तिरंगा सभी 1.4 अरब भारतीयों का है।' आगे देखना होगा कि न्यायालय में सीजेपी की चुनौती का क्या परिणाम निकलता है और 'लहरा दो तिरंगा' मार्च किस रूप में संपन्न होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे — चुनाव आयोग की स्वायत्तता, नागरिक निगरानी, और सार्वजनिक प्रदर्शन के अधिकार — व्यापक राष्ट्रीय बहस का हिस्सा हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर ऐसे छोटे संगठनों की आवाज़ को नजरअंदाज कर देती है, जबकि उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि और सरकार का आधिकारिक पक्ष जाने बिना पूरी तस्वीर अधूरी रहती है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजेपी का 'लहरा दो तिरंगा' मार्च क्या है?
यह सीजेपी द्वारा आयोजित एक शांतिपूर्ण मार्च है, जिसमें 16 अक्टूबर 2026 को शाम 5 बजे नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज लेकर पहुंचने का आह्वान किया गया था। अभियान महात्मा गांधी और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के आदर्शों पर आधारित बताया गया है।
आशुतोष और सौरभ को क्यों हिरासत में लिया गया?
सीजेपी के अनुसार, आशुतोष और सौरभ को राष्ट्रीय ध्वज लहराने के आरोप में हिरासत में लिया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सीजेपी की नेशनल लीगल लीड रत्ना सिंह ने इन हिरासतों को गैर-कानूनी बताते हुए उच्च अदालत में चुनौती देने की घोषणा की है।
सीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की माँग क्यों कर रहा है?
सीजेपी ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनावों में हेरफेर की है, सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी के बिना 'फॉर्म 6' में बदलाव किया है और साथी आयुक्तों की चिंताओं को नजरअंदाज किया है। संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य सरकार गिराना नहीं, बल्कि निष्पक्ष चुनाव आयोग स्थापित करना है।
दिल्ली पुलिस ने सेंट्रल पार्क क्यों बंद किया?
प्रशासन की ओर से आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है। सीजेपी के अनुसार, उनके 'लहरा दो तिरंगा' मार्च की घोषणा के बाद सेंट्रल पार्क बंद करने का निर्णय लिया गया। दिपके ने सवाल किया कि अगर नागरिक देशभर में 100 या 1,000 जगहों पर तिरंगा फहराएं, तो क्या प्रशासन वे सभी स्थान बंद कर देगा।
क्या सीजेपी कोई पंजीकृत राजनीतिक दल है?
स्रोत के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) एक राजनीतिक संगठन है जिसके राष्ट्रीय संयोजक और संस्थापक अभिजीत दिपके हैं। संगठन के पंजीकरण की विस्तृत जानकारी स्रोत में उपलब्ध नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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