15 अक्टूबर 2026
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दिल्ली हाई कोर्ट सख्त: कनॉट प्लेस में सीजेपी प्रदर्शन रोकने को पुलिस को सभी वैध कदम उठाने के निर्देश

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दिल्ली हाई कोर्ट सख्त: कनॉट प्लेस में सीजेपी प्रदर्शन रोकने को पुलिस को सभी वैध कदम उठाने के निर्देश

सारांश

त्योहारी सप्ताहांत पर कनॉट प्लेस में प्रस्तावित 'लहरा दो तिरंगा' प्रदर्शन को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस का आश्वासन रिकॉर्ड किया। सीजेपी संस्थापक दिपके के दो सह-संयोजक न्यायिक हिरासत में हैं; व्यापारियों ने आर्थिक नुकसान की आशंका जताई।

मुख्य बातें

दिल्ली हाई कोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस का आश्वासन रिकॉर्ड किया कि कनॉट प्लेस में सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए कानून के तहत हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
एसीजे नितीन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 को तय की।
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने एक्स पर वीडियो पोस्ट कर 'लहरा दो तिरंगा' प्रदर्शन का आह्वान किया था — सह-संयोजकों की गिरफ्तारी के विरोध में।
सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया; अजिंक्य शिंदे निजी मुचलके पर रिहा।
याचिकाकर्ता अनिल कुमार गुप्ता ने त्योहारी सप्ताहांत में व्यापारियों को होने वाले आर्थिक नुकसान की आशंका जताई।
जंतर-मंतर को अब विरोध-प्रदर्शन के लिए अधिकृत स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस का वह आश्वासन रिकॉर्ड पर लिया, जिसमें कहा गया कि कनॉट प्लेस में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके द्वारा शुक्रवार को प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए कानून के तहत हर संभव उपाय किए जाएंगे। अदालत ने अगली सुनवाई 3 नवंबर के लिए निर्धारित कर दी है।

मुख्य घटनाक्रम

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (एसीजे) नितीन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा का आश्वासन दर्ज किया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रतिवादी अधिकारियों ने दिपके की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए पहले ही कदम उठा लिए हैं और कानून के अंतर्गत हर संभव उपाय किए जाएंगे।

यह सुनवाई कनॉट प्लेस के पालिका बाजार में सड़क किनारे सामान बेचने वाले अनिल कुमार गुप्ता की याचिका पर हुई। याचिकाकर्ता ने माँग की थी कि सीजेपी को सेंट्रल पार्क या किसी भी ऐसे स्थान पर प्रदर्शन, मार्च या सभा आयोजित करने से रोका जाए जो विरोध-प्रदर्शन के लिए अधिकृत नहीं है।

याचिकाकर्ता की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन पुरी ने तर्क दिया कि यह प्रदर्शन एक बड़े हिंदू त्योहार और त्योहारी सप्ताहांत के समय होने के कारण इलाके की व्यावसायिक गतिविधियों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है। उन्होंने बताया कि पिछले एक सप्ताह में व्यापारियों को पहले ही भारी नुकसान हो चुका है और सप्ताहांत तक यह स्थिति बनी रही तो नुकसान और बढ़ेगा।

पुरी ने अदालत से आग्रह किया कि दिपके को सीधे तौर पर प्रदर्शन से रोका जाए, क्योंकि इससे ट्रैफिक जाम, जनजीवन में व्यवधान और व्यापारियों को आर्थिक क्षति होने की आशंका है। यह भी बताया गया कि दिपके को ईमेल के जरिए नोटिस भेजा जा चुका है।

'लहरा दो तिरंगा': प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने लोगों से शुक्रवार शाम 5 बजे सेंट्रल पार्क में जमा होने का आह्वान किया था। यह प्रदर्शन पार्टी के सह-संयोजकों सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के रूप में आयोजित किया जाना था।

गौरतलब है कि दिपके ने बुधवार को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो संदेश पोस्ट कर इस कार्यक्रम को 'लहरा दो तिरंगा' नाम दिया और कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना कोई अपराध नहीं है। यह आह्वान तब आया जब दास और रांका को जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रवेश के आरोप में बुधवार को पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

जंतर-मंतर गिरफ्तारियों का संदर्भ

सीजेपी के तीन नेताओं — सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे — को जंतर-मंतर पर अनधिकृत रूप से प्रवेश करने के आरोप में एहतियाती गिरफ्तारी की गई थी। यह उल्लेखनीय है कि जंतर-मंतर को अब विरोध-प्रदर्शन के लिए अधिकृत स्थल के रूप में मान्यता नहीं दी गई है।

शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया, जबकि दास और रांका न्यायिक हिरासत में हैं। तीनों पर अनधिकृत प्रवेश, बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन और सरकारी कर्मचारियों के कार्य में बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं।

आगे क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 को तय है। पुलिस के आश्वासन के बाद अदालत ने इस स्तर पर दिपके को प्रत्यक्ष रोक लगाने के बजाय कानून-सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने का मार्ग अपनाया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन शुक्रवार को प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर क्या कदम उठाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस मामले में राष्ट्रीय ध्वज फहराने जैसे प्रतीकात्मक कार्य को भी अनधिकृत गतिविधि के दायरे में लाया जा रहा है। अदालत ने प्रत्यक्ष रोक लगाने से परहेज करते हुए पुलिस पर जिम्मेदारी छोड़ी है — यह एक संतुलित, लेकिन अस्पष्ट स्थिति है जो व्यावहारिक अमल में कई सवाल खुले छोड़ती है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाई कोर्ट ने सीजेपी प्रदर्शन पर क्या आदेश दिया?
दिल्ली हाई कोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस का वह आश्वासन रिकॉर्ड पर लिया, जिसमें कहा गया कि कनॉट प्लेस में सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए कानून के तहत हर संभव कदम उठाए जाएंगे। अदालत ने अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 के लिए निर्धारित की।
'लहरा दो तिरंगा' प्रदर्शन क्या है?
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने बुधवार को एक्स पर वीडियो पोस्ट कर लोगों को शुक्रवार शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में इकट्ठा होने और राष्ट्रीय ध्वज फहराने का आह्वान किया था। यह प्रदर्शन पार्टी के गिरफ्तार सह-संयोजकों सौरव दास और आशुतोष रांका के विरोध में आयोजित किया जाना था।
सीजेपी के नेताओं को क्यों गिरफ्तार किया गया?
सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर अनधिकृत रूप से प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया और पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। उन पर बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने के आरोप भी हैं।
याचिकाकर्ता ने अदालत से क्या माँग की थी?
पालिका बाजार के व्यापारी अनिल कुमार गुप्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन पुरी ने माँग की थी कि सीजेपी को सेंट्रल पार्क या किसी भी अनधिकृत स्थान पर प्रदर्शन से सीधे रोका जाए। उनका तर्क था कि त्योहारी सप्ताहांत में यह प्रदर्शन व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान पहुँचाएगा।
जंतर-मंतर अब विरोध-प्रदर्शन के लिए अधिकृत स्थल क्यों नहीं है?
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश साम्ब्रे की पीठ को बताया गया कि जंतर-मंतर को अब विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल के रूप में मान्यता नहीं दी गई है। यही कारण है कि वहाँ प्रवेश करना अनधिकृत माना गया और सीजेपी नेताओं पर आरोप लगाए गए।
राष्ट्र प्रेस
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