अभिजीत दिपके की हिरासत पर सीजेपी का पलटवार: 'हजारों अभिजीत खड़े होंगे'
सारांश
मुख्य बातें
कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को अपने संस्थापक एवं संयोजक अभिजीत दिपके तथा अन्य साथियों की हिरासत के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से स्पष्ट संदेश दिया कि एक नेता को हिरासत में लेने से आंदोलन नहीं रुकेगा।
मुख्य घटनाक्रम
दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके को उस समय हिरासत में लिया जब वह कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में शाम 5 बजे प्रस्तावित 'तिरंगा सभा' में शामिल होने जा रहे थे। यह सभा उन्होंने पार्टी के सह-संयोजकों सौरव दास और आशुतोष रांका की पूर्व गिरफ्तारी के विरोध में बुलाई थी।
दिपके की हिरासत के कुछ ही मिनट बाद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को भी मंडी हाउस के निकट हिरासत में ले लिया गया। वह आइसा और अन्य वामपंथी संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ सीजेपी के 'लहरा दो तिरंगा' प्रदर्शन में शामिल होने जा रही थीं।
सीजेपी की प्रतिक्रिया
सीजेपी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, 'आप एक अभिजीत को हिरासत में लेते हैं, तो हजारों अभिजीत खड़े होंगे! आप एक सौरव को जेल में डालते हैं, तो हजारों सौरव सड़कों पर उतरेंगे! आप एक आशुतोष को जेल में डालते हैं, तो हजारों आशुतोष दिल्ली पहुंचेंगे!' पार्टी ने यह भी कहा, 'तिरंगा हमारी जान है, तिरंगा हमारी शान है! हमें कोई नहीं रोक सकता!'
सीजेपी के प्रवक्ता मेहर पसरीचा ने कहा कि तिरंगा कहाँ फहराना है, यह तय करना पार्टी का अधिकार है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज देशभक्ति का प्रतीक है और इसे फहराने के रास्ते में कोई प्रतिबंध या बाधा नहीं होनी चाहिए।
पुलिस का पक्ष और कानूनी आधार
अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने दिपके को पहले ही दो नोटिस जारी कर सेंट्रल पार्क में सभा आयोजित न करने की हिदायत दी थी। नोटिस में उल्लेख था कि नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी और आयोजन स्थल पर निषेधाज्ञा लागू थी।
अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए दिपके को सेंट्रल पार्क न जाने का निर्देश दिया गया था। इसके अतिरिक्त, अदालत के निर्देश के तहत कथित तौर पर दिपके, रांका और दास को एक वर्ष तक ऐसी गतिविधियों से दूर रहने को कहा गया था जिनसे सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है।
पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका पहले से ही गिरफ्तार थे। गौरतलब है कि पार्टी ने 'तिरंगा सभा' और 'लहरा दो तिरंगा' जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज की आड़ में सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन की रणनीति अपनाई थी।
क्या होगा आगे
सीजेपी के बयान से स्पष्ट है कि पार्टी हिरासत को आंदोलन को दबाने की कोशिश मानती है और आगे भी विरोध प्रदर्शन जारी रखने का संकेत दिया है। दिपके, बोरा और अन्य की हिरासत की स्थिति तथा संभावित कानूनी कार्रवाई पर नज़र बनी रहेगी।