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नाना पटोले का मोदी सरकार पर हमला: 'देश में 2014 से अघोषित इमरजेंसी जैसे हालात'

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नाना पटोले का मोदी सरकार पर हमला: 'देश में 2014 से अघोषित इमरजेंसी जैसे हालात'

सारांश

कांग्रेस नेता नाना पटोले ने दिल्ली में सीजेपी प्रदर्शन पर लगाई गई पाबंदियों और अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी को लेकर मोदी सरकार को घेरा। उनका दावा है कि 2014 से देश में अघोषित इमरजेंसी जैसे हालात हैं और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को कुचला जा रहा है।

मुख्य बातें

नाना पटोले ने 10 अक्टूबर को नागपुर में केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि देश में '2014 से अघोषित इमरजेंसी जैसे हालात' हैं।
दिल्ली में सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान ट्रेन, मेट्रो और हवाई यात्रा पर लगाई गई पाबंदियों को पटोले ने लोकतांत्रिक अधिकारों के विरुद्ध बताया।
कार्यकर्ता अभिजीत दिपके को विमान से उतारकर गिरफ्तार किए जाने को पटोले ने 'सरकार की घबराहट का संकेत' करार दिया।
कांग्रेस ने दिपके की गिरफ्तारी का विरोध करने और चुनावी गड़बड़ियों पर लड़ाई जारी रखने की घोषणा की।
पटोले ने राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का समर्थन करते हुए कहा कि तमिलनाडु के युवा बड़ी संख्या में इसमें भाग लेने के लिए तैयार हैं।

कांग्रेस के पूर्व महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने 10 अक्टूबर को नागपुर में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक अधिकारों को व्यवस्थित तरीके से कुचला जा रहा है। उनका यह बयान नई दिल्ली में सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) के विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर लगाई गई पाबंदियों और कार्यकर्ता अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि में आया है।

मुख्य आरोप और बयान

पटोले ने कहा कि '2014 से ही देश में अघोषित इमरजेंसी जैसे हालात' बने हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली आने वाली ट्रेनों और मेट्रो सेवाओं पर रोक लगाई गई, और हवाई यात्रा करने वाले लोगों को विमान से उतारकर हिरासत में लिया गया। उनके अनुसार, ये पाबंदियाँ लोकतांत्रिक अधिकारों के सीधे उल्लंघन हैं।

पटोले ने सवाल उठाया, 'अगर सरकार लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई है, तो उसे विरोध-प्रदर्शन पर इस तरह की पाबंदियाँ नहीं लगानी चाहिए।' उन्होंने कहा कि मोदी सरकार जनता का सामना करने से डर रही है।

अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी पर तीखी प्रतिक्रिया

कार्यकर्ता अभिजीत दिपके को विमान से उतारकर गिरफ्तार किए जाने की घटना को पटोले ने 'सरकार की घबराहट का संकेत' बताया। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि ब्रिटिश शासनकाल में भी महात्मा गांधी और अन्य नेताओं ने आंदोलन किए थे। उनका तर्क था कि जब लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी विरोध करने का अधिकार न रहे, तो लोकतंत्र का अर्थ ही समाप्त हो जाता है। कांग्रेस ने इस गिरफ्तारी का विरोध करने की घोषणा की है।

राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम पर रुख

पटोले ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा राहुल गांधी की आवाज़ के साथ जुड़ रहे हैं। उनके अनुसार, तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में राज्य के युवा उत्साहपूर्वक भाग लेने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं की आवाज़ उठाने के लिए ऐसे आयोजन आवश्यक हैं।

चुनावी धांधली के आरोप और भाजपा पर निशाना

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात के बाद राहुल गांधी के चुनावी धांधली संबंधी बयान और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता सुधांशु त्रिवेदी की प्रतिक्रिया पर भी पटोले ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने विपक्षी नेताओं की बातें सुनीं और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने का आश्वासन दिया। पटोले ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर अपनी लड़ाई जारी रखेगी।

आगे क्या

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल केंद्र सरकार पर नागरिक स्वतंत्रताओं को सीमित करने के आरोप लगाते रहे हैं। गौरतलब है कि सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ होने की संभावना है। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को संसद और सड़क — दोनों स्तरों पर उठाती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सीजेपी प्रदर्शन के दौरान यात्रियों को विमान से उतारने जैसी कथित घटनाएँ इस बहस को ठोस ज़मीन देती हैं। असली सवाल यह है कि क्या ये पाबंदियाँ कानूनी प्रक्रिया के तहत लगाई गईं या प्रशासनिक विवेकाधिकार का अतिक्रमण हुआ — और इसका जवाब सरकार ने अब तक सार्वजनिक रूप से नहीं दिया है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि अभिजीत दिपके जैसे नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई का पैटर्न और उसकी कानूनी वैधता — न केवल राजनीतिक आरोप — इस पूरे प्रकरण की असली जाँच की माँग करते हैं।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नाना पटोले ने 'अघोषित इमरजेंसी' का आरोप क्यों लगाया?
पटोले ने यह आरोप दिल्ली में सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन पर लगाई गई पाबंदियों — जिनमें ट्रेन, मेट्रो और हवाई यात्रा पर रोक शामिल है — और कार्यकर्ता अभिजीत दिपके को विमान से उतारकर गिरफ्तार किए जाने की घटना के संदर्भ में लगाया। उनका कहना है कि 2014 से लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को व्यवस्थित रूप से कुचला जा रहा है।
अभिजीत दिपके कौन हैं और उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया?
अभिजीत दिपके एक कार्यकर्ता हैं जिन्हें कथित तौर पर दिल्ली में सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी गतिविधियों के सिलसिले में विमान से उतारकर हिरासत में लिया गया। कांग्रेस ने इस गिरफ्तारी को 'सरकार की घबराहट का संकेत' बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।
सीजेपी का विरोध-प्रदर्शन किस मुद्दे पर था?
स्रोत में सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) के प्रदर्शन का विस्तृत कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। हालाँकि, पटोले के बयान के अनुसार, इस प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली में व्यापक पाबंदियाँ लगाई गईं, जिन्हें कांग्रेस ने लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।
राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का क्या महत्व है?
पटोले के अनुसार, 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाएगा, जिसमें राज्य के युवा बड़ी संख्या में भाग लेने के लिए तैयार हैं। यह कार्यक्रम छात्रों और युवाओं की आवाज़ को राष्ट्रीय मंच पर उठाने की कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
राष्ट्रपति मुर्मु से मुलाकात के बाद कांग्रेस का क्या रुख है?
पटोले ने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विपक्षी नेताओं की बातें सुनीं और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने का आश्वासन दिया। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर अपनी लड़ाई आगे भी जारी रखेगी।
राष्ट्र प्रेस
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