11 अक्टूबर 2026
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सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके रिहा, दादी के अंतिम संस्कार से चूके; मां अनीता बोलीं— 'आखिरी दर्शन भी नसीब नहीं हुए'

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सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके रिहा, दादी के अंतिम संस्कार से चूके; मां अनीता बोलीं— 'आखिरी दर्शन भी नसीब नहीं हुए'

सारांश

सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से उतारकर हिरासत में लिया गया — और इस देरी की कीमत उन्होंने दादी के आखिरी दर्शन से चुकाई। माँ अनीता दिपके का सवाल बेबाक है: 'क्या मेरा बेटा आतंकवादी है?'

मुख्य बातें

अभिजीत दिपके , सौरभ दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर 2026 को एयरपोर्ट पर विमान के अंदर से हिरासत में लिया।
गिरफ़्तारी बीएनएसएस धारा 126/170 के तहत एहतियातन की गई; रिहाई के लिए ₹50,000 का जमानत बॉन्ड भरना पड़ा।
हिरासत के दौरान दिपके की दादी का हिंगोली जिले के गाँव संटुक पिंपरी में निधन हो गया; वह अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके।
माँ अनीता दिपके ने सवाल उठाया — शनिवार को ही रिहाई होती तो बेटा दादी का चेहरा आखिरी बार देख पाता।
तीनों को कार्यकारी मजिस्ट्रेट कोर्ट, दिल्ली कैंट के सामने पेश किए जाने के बाद रविवार की सुबह रिहा किया गया।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके को रविवार, 12 अक्टूबर 2026 की सुबह दिल्ली पुलिस की हिरासत से रिहा कर दिया गया, लेकिन यह रिहाई उनके लिए व्यक्तिगत त्रासदी लेकर आई — वह अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके, जिनका उसी दिन हिंगोली जिले के पैतृक गाँव संटुक पिंपरी में निधन हो गया था। उनकी माँ अनीता दिपके ने मीडिया के सामने आकर सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर कड़ा सवाल उठाया।

माँ की पीड़ा और सवाल

अनीता दिपके ने रविवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, 'अगर अभिजीत को कल रिहा कर दिया जाता, तो वह आज अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल हो सकते थे। अब वह उनका चेहरा आखिरी बार देख भी नहीं पाएंगे।' उन्होंने यह भी कहा, 'उन्होंने ऐसा क्या गुनाह किया था कि उन्हें अपनी दादी के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं होने दिया गया? क्या वह कोई आतंकवादी या देशद्रोही हैं? मेरे बेटे ने क्या गलत किया था? उन्हें हवाई जहाज से ले जाया गया, फिर भी उन्हें अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत नहीं दी गई।'

गिरफ़्तारी की पृष्ठभूमि

दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को शनिवार, 11 अक्टूबर 2026 को एयरपोर्ट पर विमान के अंदर से ही हिरासत में लिया था। तीनों दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुँचे थे। पुलिस के अनुसार, यह गिरफ़्तारी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126/170 के तहत एहतियातन की गई थी।

गौरतलब है कि इसी दौरान महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में दिपके की दादी गंभीर रूप से बीमार थीं। पुलिस हिरासत के कारण अभिजीत न तो बीमार दादी से मिल सके, और न ही उनके निधन के बाद अंतिम दर्शन कर पाए।

रिहाई की शर्तें

दिल्ली पुलिस ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए तीनों को रविवार को कार्यकारी मजिस्ट्रेट कोर्ट, दिल्ली कैंट के समक्ष पेश किया गया। न्यायालय ने एक वर्ष तक शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने की शर्त पर ₹50,000 का जमानत बॉन्ड भरवाने के बाद तीनों को रिहा किया।

पारिवारिक संकट और व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक प्रदर्शनों के दौरान एहतियाती गिरफ़्तारियों पर नागरिक अधिकारों की बहस तेज़ है। आलोचकों का कहना है कि इस मामले में मानवीय संवेदना का पहलू नज़रअंदाज़ किया गया — जबकि व्यक्ति की दादी की मृत्यु निकट थी, तब भी उन्हें समय पर नहीं छोड़ा गया। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत ही कार्रवाई की गई।

आगे की स्थिति

रिहाई के बाद अभिजीत दिपके हिंगोली रवाना हुए, लेकिन तब तक उनकी दादी का अंतिम संस्कार हो चुका था। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में एहतियाती हिरासत की सीमाओं और मानवीय परिस्थितियों में प्रशासनिक लचीलेपन की बहस को नए सिरे से छेड़ दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सवाल यह है कि क्या कानून के दायरे में रहते हुए भी थोड़ी संवेदनशीलता संभव थी। पुलिस ने 'सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन' किया — यह सच है, लेकिन प्रक्रिया और इंसानियत के बीच की खाई ही इस मामले को राष्ट्रीय बहस का विषय बनाती है।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिजीत दिपके को क्यों गिरफ़्तार किया गया था?
दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके को 11 अक्टूबर 2026 को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान के अंदर से बीएनएसएस की धारा 126/170 के तहत एहतियातन गिरफ़्तार किया था। वह दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने आए थे।
अभिजीत दिपके को कब रिहा किया गया?
अभिजीत दिपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को रविवार, 12 अक्टूबर 2026 की सुबह कार्यकारी मजिस्ट्रेट कोर्ट, दिल्ली कैंट के समक्ष पेश किए जाने के बाद ₹50,000 का जमानत बॉन्ड भरकर रिहा किया गया।
अभिजीत दिपके दादी के अंतिम संस्कार में क्यों शामिल नहीं हो पाए?
अभिजीत दिपके शनिवार से रविवार सुबह तक दिल्ली पुलिस की हिरासत में थे। इसी दौरान उनकी दादी का हिंगोली जिले के संटुक पिंपरी गाँव में निधन हो गया और रविवार को अंतिम संस्कार भी हो गया। रिहाई तब हुई जब वह इस अवसर को पार कर चुके थे।
अनीता दिपके ने क्या आरोप लगाए?
माँ अनीता दिपके ने कहा कि अगर अभिजीत को शनिवार को ही छोड़ दिया जाता तो वह दादी के अंतिम संस्कार में शामिल हो सकते थे। उन्होंने सवाल उठाया कि उनके बेटे ने ऐसा क्या अपराध किया जो उन्हें दादी का चेहरा आखिरी बार देखने का मौका भी नहीं मिला।
सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) क्या है?
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) एक राजनीतिक दल है जिसके संस्थापक अभिजीत दिपके हैं। इस मामले में दिपके दिल्ली में विरोध प्रदर्शन में भाग लेने पहुँचे थे, जहाँ उन्हें एयरपोर्ट पर ही हिरासत में ले लिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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