अभिजीत दिपके एयरपोर्ट पर हिरासत में, दादी के निधन और विरोध-प्रदर्शन के बीच कठिन चुनाव
सारांश
मुख्य बातें
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके को 10 अक्टूबर 2026 को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे पर उस समय दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया, जब वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुँचे थे। इसी दौरान उन्हें उनकी दादी के निधन की दुखद सूचना मिली, जिससे वे एक मार्मिक व्यक्तिगत संकट में फँस गए — हिरासत में रहकर विरोध जारी रखें या परिवार के पास लौटें।
हवाई अड्डे पर हिरासत का घटनाक्रम
सीजेपी के अनुसार, दिल्ली पुलिस के जवान उस विमान के भीतर ही घुस गए जिसमें अभिजीत दिपके सवार थे, और IGI एयरपोर्ट पर लैंडिंग के कुछ मिनट बाद ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया। हिरासत के दौरान दिपके ने पुलिसकर्मियों से कहा कि 'मैं यहाँ गिरफ्तार होने के लिए आया हूँ, मुझे गिरफ्तार करो।' इस पर पुलिस के जवानों ने स्पष्ट किया कि 'यह गिरफ्तारी नहीं है, कृपया सहयोग करें।'
दादी के निधन की खबर और व्यक्तिगत दुख
दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने हिरासत के दौरान ही दिपके को उनकी दादी के निधन की जानकारी दी। दिपके की दादी हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी गाँव में रहती थीं और लंबे समय से बीमार चल रही थीं। उम्र अधिक होने के कारण पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत गंभीर बनी हुई थी।
दिपके के माता-पिता अनिता दिपके और भगवान दिपके इस समय छत्रपति संभाजीनगर में हैं और उनके घर के बाहर पुलिस का बंदोबस्त लगाया गया है। दादी के निधन की सूचना मिलते ही दोनों के हिंगोली के लिए रवाना होने की जानकारी है।
प्रदर्शनकारियों की हिरासत और बस को नुकसान का आरोप
दिल्ली पुलिस ने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस हिरासत से बाहर निकलने का प्रयास किया और एक बस को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, सभी प्रदर्शनकारियों को पुनः हिरासत में लेकर निर्धारित स्थान पर भेज दिया गया।
विरोध का पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब देश में चुनावी प्रक्रियाओं और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विभिन्न दलों और संगठनों में बहस जारी है। सीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर जंतर-मंतर पर धरना देने की योजना बना रही थी। गौरतलब है कि जंतर-मंतर दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है, जहाँ इससे पहले भी कई राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों ने आंदोलन किए हैं।
आगे की स्थिति
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अभिजीत दिपके हिरासत में रहकर अपना विरोध जारी रखेंगे या परिवार के पास लौटकर दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। यह मामला व्यक्तिगत संकट और राजनीतिक प्रतिबद्धता के बीच की कशमकश को सामने रखता है। आने वाले घंटों में दिपके का फैसला और पुलिस की आगे की कार्रवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।