सीजेपी की तिरंगा यात्रा पर सियासी घमासान: एनडीए नेताओं ने एजेंडे पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा 16 अक्टूबर को दिल्ली के सेंट्रल पार्क से प्रस्तावित तिरंगा यात्रा को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कई नेताओं ने इस आयोजन को लोकतांत्रिक अधिकार तो माना, लेकिन इसके पीछे के एजेंडे पर तीखे सवाल भी दागे हैं।
भाजपा सांसद का एसआईआर विवाद से जोड़
बेतिया से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद संजय जायसवाल ने तिरंगा यात्रा को सकारात्मक बताते हुए कहा, 'लोगों को भारत, उसके नागरिकों और देश की शांतिपूर्ण प्रगति का सम्मान करना चाहिए। किसी को भी विदेशी ताकतों के एजेंडे पर काम नहीं करना चाहिए।' उन्होंने एसआईआर विवाद का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है और भारत के चुनाव आयोग (ECI) पहले ही सभी आरोपों का जवाब दे चुका है।
मंत्री राम कृपाल यादव की चेतावनी
पटना में मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है और सीजेपी अपना विरोध दर्ज कराने के लिए तिरंगा यात्रा निकालने को स्वतंत्र है। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट हिदायत दी: 'राष्ट्रीय ध्वज का अपमान नहीं होना चाहिए। इसके इस्तेमाल को लेकर कई कानून और नियम हैं। जो कोई भी राष्ट्रीय ध्वज लेकर चलेगा, उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका पूरा सम्मान किया जाए और इस पर नजर रखी जाएगी।'
शिवसेना नेता का तीखा हमला
मुंबई में शिवसेना नेता शायना एनसी ने सीजेपी पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा, 'तिरंगा फहराना कोई अपराध नहीं है, लेकिन आपके एजेंडे पर सवाल जरूर उठेंगे।' उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'यह कोई जोमैटो ऐप नहीं है, जहाँ आप रोज तय करें कि आज जंतर-मंतर पर विरोध करेंगे, आज राष्ट्रपति भवन के बाहर और कल तिरंगा यात्रा निकालेंगे। लोग अब समझ गए हैं कि आप किस हद तक यह ड्रामा और नौटंकी कर रहे हैं।'
जदयू का संतुलित रुख
जनता दल (यूनाइटेड) [JDU] के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को कार्यक्रम करने का अधिकार है। उन्होंने आगाह किया, 'अगर उस कार्यक्रम से शांति भंग होती है, कानून-व्यवस्था में बाधा आती है, तो सरकार के पास भी कार्रवाई करने का अधिकार है।' यह बयान गठबंधन की सतर्क लेकिन संतुलित सोच को दर्शाता है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की राह
गौरतलब है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब एसआईआर मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच तनाव पहले से बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि विपक्ष लगातार प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शनों की रणनीति अपना रहा है, जबकि सत्तापक्ष का मानना है कि इससे वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है। 16 अक्टूबर को होने वाली इस यात्रा से पहले प्रशासन की निगाहें भी सेंट्रल पार्क पर टिकी रहेंगी।