सीजेपी की 'तिरंगा यात्रा' पर एनडीए का पलटवार, शाइना एनसी बोलीं — 'हाथ में तिरंगा, दिल में धोखा'
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की प्रस्तावित 'तिरंगा यात्रा' को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने 16 अक्टूबर 2026 को कड़ी प्रतिक्रिया दी। शिवसेना से लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) तक के नेताओं ने सीजेपी पर 'दोहरे चरित्र' का आरोप लगाते हुए इस यात्रा को 'राजनीतिक नाटक' करार दिया।
शाइना एनसी का तीखा हमला
शिवसेना नेता शाइना एनसी ने सीजेपी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'हाथ में तिरंगा और दिल में धोखा — यही है सीजेपी का असली चेहरा।' शाइना ने कहा कि जहाँ अनुमति मिल रही है वहाँ यात्रा निकालने में कोई आपत्ति नहीं, लेकिन जहाँ अनुमति नहीं मिल रही, वहाँ तिरंगे के नाम पर 'ड्रामा' किया जा रहा है। उन्होंने जोड़ा, 'असली तिरंगा वाले देश बनाते हैं और नकली वाले सिर्फ रैली निकालते हैं।'
भाजपा विधायक राम कदम के गंभीर आरोप
भाजपा विधायक राम कदम ने सीजेपी नेता अभिजीत दिपके पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस द्वारा जारी सीसीटीवी फुटेज में उनके झूठ का पर्दाफाश हो गया। कदम ने आरोप लगाया कि दिपके ने अपनी 'दिवंगत दादी' के नाम पर भी झूठ बोला था और यह वीडियो सामने आने पर उजागर हुआ। उन्होंने कहा, 'जो अपनी दिवंगत दादी को लेकर झूठ बोल सकता है, वह कुछ भी झूठ बोल सकता है।'
कदम ने आगे कहा कि इस तिरंगे को लहराने के लिए लाखों लोगों ने बलिदान दिया है और उसे महज़ 'राजनीतिक हथियार' बनाना तिरंगे की अवमानना है। उन्होंने नेहा बोरा के कथित बयानों का भी हवाला दिया, जिनमें कथित तौर पर बंगाल और बांग्लादेश जैसे 'रक्तपात' की बात कही गई थी। कदम के अनुसार, ऐसे बयान देने वाले लोगों को प्रशांत भूषण का साथ मिलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ संविधान की दुहाई दी जाती है और दूसरी तरफ न्यायपालिका तथा चुनाव आयोग को 'कटघरे में खड़ा' किया जाता है।
भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल की चेतावनी
भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने संयमित लेकिन स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानून के दायरे में की गई सभी गतिविधियाँ मान्य रहेंगी, परंतु कानून की अवहेलना करने पर 'निश्चित रूप से कानून अपना काम करेगा।' उनकी यह टिप्पणी यात्रा की अनुमति को लेकर जारी विवाद के बीच आई है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और व्यापक असर
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में विभिन्न राजनीतिक दलों की सभाओं और रैलियों को लेकर अनुमति-विवाद बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि सीजेपी की इस प्रस्तावित यात्रा ने तिरंगे के प्रतीकात्मक इस्तेमाल पर एक व्यापक बहस छेड़ दी है — कि राष्ट्रीय ध्वज किसका है और उसे लहराने का 'नैतिक अधिकार' किसे है। एनडीए की एकजुट प्रतिक्रिया बताती है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और राजनीतिक रूप से तीखा हो सकता है।