राहुल गांधी को बार-बार री-लॉन्च करना कांग्रेस को महंगा पड़ रहा है: संजय निरुपम
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 24 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कई अहम राजनीतिक मुद्दों पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी अपने नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की छवि सुधारने के लिए बार-बार जो प्रयास करती है, उससे पार्टी को खुद ही नुकसान उठाना पड़ रहा है। निरुपम ने मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े ऑडियो क्लिप विवाद, दिल्ली में त्योहारी सीजन के दौरान प्रस्तावित आंदोलनों से व्यापारियों को होने वाले नुकसान और जामिया मिलिया इस्लामिया संस्थान में शैक्षणिक माहौल बनाए रखने की ज़रूरत पर भी अपनी राय सामने रखी।
राहुल गांधी की री-लॉन्चिंग पर हमला
संजय निरुपम ने कहा कि राहुल गांधी अक्सर विदेशों में जाकर कथित तौर पर भारत-विरोधी बयान देते हैं, जिससे न केवल भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित होती है, बल्कि उनकी अपनी राजनीतिक साख भी कमज़ोर पड़ती है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद कांग्रेस पार्टी तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें पुनः स्थापित करने की कोशिश करती रहती है।
निरुपम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस टिप्पणी का हवाला दिया जिसमें उन्होंने राहुल गांधी को कांग्रेस का 'फेल्ड प्रोडक्ट' बताया था। निरुपम ने कहा कि इस 'प्रोडक्ट' को बार-बार री-लॉन्च करने का प्रयास कांग्रेस के लिए भी घाटे का सौदा बन चुका है।
मराठा आरक्षण ऑडियो क्लिप विवाद
मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल द्वारा जारी किए गए वीडियो और ऑडियो क्लिप के बारे में निरुपम ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उनकी जांच का आदेश दे दिया है। उनका कहना था कि जब तक उस क्लिप की प्रामाणिकता सिद्ध नहीं हो जाती, तब तक उसमें कही गई बातों का कोई ठोस अर्थ नहीं निकलता।
निरुपम ने आशंका जताई कि कहीं ऐसा तो नहीं कि मराठा युवाओं को रोज़गार और शिक्षा में आरक्षण दिलाने के व्यापक आंदोलन को कमज़ोर करने का कोई षड्यंत्र रचा जा रहा हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर कोई भी निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
त्योहारी सीजन में दिल्ली आंदोलन से व्यापारियों को नुकसान
शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि भारत में इस समय त्योहारों का मौसम है और यह दुकानदारों व व्यापारियों के लिए साल की सबसे महत्वपूर्ण कमाई का समय होता है। उन्होंने कहा कि कथित तौर पर कांग्रेस पार्टी, 'कॉकरोच जनता पार्टी' और वामपंथी संगठनों द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ दिल्ली में किए गए आंदोलनों से व्यापारी वर्ग पहले से ही परेशान है।
निरुपम ने बताया कि कनॉट प्लेस के व्यापारियों का कहना है कि उन्हें करोड़ों रुपए का नुकसान हो चुका है। दुकानदारों और दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने अपील की है कि 1 नवंबर को रामलीला मैदान में कांग्रेस द्वारा प्रस्तावित आंदोलन को त्योहारी सीजन समाप्त होने तक स्थगित किया जाए। निरुपम ने कहा कि यदि कांग्रेस चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन करना चाहती है तो अवश्य करे, लेकिन त्योहारों की अवधि में इसे टालना देश की अर्थव्यवस्था के हित में होगा।
जामिया मिलिया इस्लामिया पर चिंता
निरुपम ने कहा कि जामिया मिलिया इस्लामिया संस्थान, जिसकी स्थापना डॉ. जाकिर हुसैन जैसे राष्ट्रवादी मुस्लिम विद्वानों ने की थी, अब धीरे-धीरे विवादों का केंद्र बनता जा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि इसी संस्थान से एनआरसी और सीएए के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन शुरू हुआ था।
हाल में छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर हुए आंदोलन के दौरान लगाए गए कुछ नारों को भारत-विरोधी बताया गया और उन पर गंभीर आपत्तियाँ दर्ज की गईं। शरजील इमाम जैसे व्यक्तियों की रिहाई की मांग पर भी सवाल उठे। निरुपम ने कहा कि यदि किसी प्रकार की अवैध गतिविधियों, कट्टरपंथी प्रभावों या बाहरी हस्तक्षेप की आशंका हो, तो उसकी निष्पक्ष और कानूनी जांच होनी चाहिए — और किसी भी संस्थान के बारे में निष्कर्ष तथ्यों एवं प्रमाणों के आधार पर ही निकाले जाने चाहिए।
आगे क्या
मराठा आरक्षण ऑडियो क्लिप की जांच के नतीजे सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि उस विवाद के पीछे कौन-सी ताकत है। दिल्ली के व्यापारिक संगठनों की अपील और 1 नवंबर के प्रस्तावित कांग्रेस आंदोलन को लेकर राजनीतिक तनाव अगले कुछ दिनों में और उभर सकता है।