भोपाल: ₹2.75 करोड़ की फर्जी एफडीआर मामले में लोकायुक्त पुलिस ने आबकारी अधिकारी समेत दो पर दर्ज की एफआईआर
सारांश
मुख्य बातें
भोपाल में शराब ठेके के लिए ₹2.75 करोड़ की फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (एफडीआर) प्रस्तुत करने के गंभीर मामले में लोकायुक्त पुलिस ने 24 अक्टूबर 2026 को औपचारिक एफआईआर दर्ज कर ली है। इस मामले में तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचूरा और हरियाणा के शराब ठेकेदार जसवंत सिंह को नामजद आरोपी बनाया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
आरोपी ठेकेदार जसवंत सिंह ने वर्ष 2024-25 के लिए भोपाल के पीएंडटी चौराहा और डिपो चौराहा स्थित दो शराब दुकानों का ठेका लिया था। दोनों दुकानों की कुल कीमत लगभग ₹27 करोड़ 55 लाख आँकी गई थी।
नियमों के तहत ठेकेदार को कुल राशि का 10 प्रतिशत, अर्थात लगभग ₹2 करोड़ 75 लाख, सिक्योरिटी मनी के रूप में जमा करना अनिवार्य था। जाँच अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने यह राशि जमा करने की बजाय एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की एक फर्जी ई-एफडीआर तैयार की और उसके सत्यापन से संबंधित दस्तावेज भी कथित तौर पर जाली बनाए।
बैंक ने किया एफडीआर से इनकार
जाँच के दौरान एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने स्पष्ट रूप से कहा कि उसने ऐसी कोई एफडीआर जारी नहीं की है। यह पुष्टि होते ही मामले की गंभीरता और बढ़ गई और लोकायुक्त को व्यापक साजिश का संदेह हुआ।
लोकायुक्त का कहना है कि यदि आगे की जाँच में किसी बैंक अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एफआईआर और जाँच का दायरा
लोकायुक्त के डीएसपी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि फर्जी एफडीआर की खबरें सामने आने के बाद लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख ने स्वयं मामले का संज्ञान लिया। प्रारंभिक जाँच में आरोप सही पाए जाने पर लोकायुक्त एसपी सुनील कुमार पाटीदार के निर्देश पर दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
लोकायुक्त पुलिस ने भोपाल और ग्वालियर के आबकारी कार्यालयों से मामले से जुड़े मूल दस्तावेज तलब किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक दस्तावेज प्राप्त होते ही आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर गिरफ्तारी की कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।
साजिश में अन्य की भूमिका की जाँच
लोकायुक्त अब इस मामले में अन्य सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की संभावित संलिप्तता की भी पड़ताल कर रही है। जाँच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी एफडीआर तैयार करने और उसे वैध दिखाने की इस पूरी प्रक्रिया में और कितने लोगों की मिलीभगत थी।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में शराब ठेकों में अनियमितता के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, और यह प्रकरण उस प्रवृत्ति की ओर ध्यान एक बार फिर खींचता है। जाँच के नतीजे आने के बाद इस मामले में गिरफ्तारियों और आगे की कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।