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डीएचएफएल घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई: ₹51.75 करोड़ फ्रीज, यूके संपत्ति और विदेशी खाते की जांच

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डीएचएफएल घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई: ₹51.75 करोड़ फ्रीज, यूके संपत्ति और विदेशी खाते की जांच

सारांश

डीएचएफएल घोटाले में ईडी ने ₹51.75 करोड़ फ्रीज किए — यूके की संपत्ति 'हर्टमोर हाउस' की कथित फर्जी बिक्री और विदेशी खातों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का पर्दाफाश। ₹34,615 करोड़ के बैंक नुकसान वाले इस मामले में जांच और गहरी होती दिख रही है।

मुख्य बातें

ईडी ने 19 अगस्त 2026 को तलाशी के दौरान अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई के बैंक खाते से ₹51.75 करोड़ (5.41 मिलियन अमेरिकी डॉलर) पीएमएलए की धारा 17(1ए) के तहत फ्रीज किए।
डीएचएफएल के प्रमोटरों कपिल वाधवा और धीरज वाधवा पर 17 बैंकों के कंसोर्टियम के साथ धोखाधड़ी का आरोप; कंसोर्टियम ने कुल ₹42,871.42 करोड़ की क्रेडिट सुविधाएं दी थीं।
बैंकों को कथित तौर पर ₹34,615 करोड़ का नुकसान हुआ।
यूके स्थित हर्टमोर हाउस संपत्ति — वनीता वाधवा के नाम पर — को कथित फर्जी देनदारी के जरिए बेचा गया और बिक्री की रकम विदेशी कंपनी के भारतीय खाते में भेजी गई।
तलाशी में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य भी जब्त; जांच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) से जुड़े बहुचर्चित लोन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 19 अगस्त को की गई तलाशी के दौरान लगभग ₹51.75 करोड़ (करीब 5.41 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की राशि फ्रीज कर दी है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 17(1ए) के तहत की गई। 28 अगस्त को सामने आई इस जानकारी के अनुसार, एजेंसी ने तलाशी में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, रिकॉर्ड और साक्ष्य भी जब्त किए हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी की यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। यह एफआईआर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जो 17 बैंकों के एक कंसोर्टियम की ओर से दायर की गई थी। इस कंसोर्टियम ने डीएचएफएल को कुल ₹42,871.42 करोड़ की क्रेडिट सुविधाएं प्रदान की थीं।

आरोप और कथित धोखाधड़ी

जांच एजेंसी के अनुसार, डीएचएफएल के प्रमोटरों कपिल वाधवा और धीरज वाधवा सहित अन्य आरोपियों ने कंसोर्टियम के साथ धोखाधड़ी करने की साजिश रची। ईडी का आरोप है कि कंपनी के खातों में हेरफेर कर ऋण की राशि को गलत तरीके से अन्य स्थानों पर भेजा गया, जिससे ऋणदाता बैंकों को कथित तौर पर लगभग ₹34,615 करोड़ का नुकसान हुआ।

यूके संपत्ति और विदेशी लेनदेन का जाल

जांच में सामने आया है कि यूनाइटेड किंगडम स्थित हर्टमोर हाउस नामक संपत्ति — जो कपिल वाधवा की पत्नी वनीता वाधवा के नाम पर थी — को कथित तौर पर फर्जी देनदारी बनाकर कई वित्तीय लेनदेन के जरिए बेचा गया। अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई और वनीता वाधवा के बीच एक कथित ऋण समझौते के आधार पर इस ब्रिटेन स्थित संपत्ति को गिरवी रखा गया था।

ईडी के अनुसार, इस व्यवस्था का इस्तेमाल डीएचएफएल घोटाले से जुड़े भारत में उत्पन्न वित्तीय दायित्वों के निपटान के लिए विदेशी संपत्ति पर भार बनाने हेतु किया गया। वर्ष 2026 में उक्त संपत्ति बेची गई, किंतु बिक्री से प्राप्त रकम वनीता वाधवा को मिलने के बजाय अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई के भारत स्थित बैंक खाते में भेजी गई।

फ्रीज की गई राशि और जब्त साक्ष्य

तलाशी के दौरान ईडी ने अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई के बैंक खाते में जमा लगभग 5.41 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब ₹51.75 करोड़) को अपराध से अर्जित धन मानते हुए पीएमएलए की धारा 17(1ए) के तहत फ्रीज कर दिया। इसके अतिरिक्त, कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं, जो आगे की जांच में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

आगे की जांच

ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे संभव हैं। गौरतलब है कि डीएचएफएल घोटाला भारत के सबसे बड़े हाउसिंग फाइनेंस धोखाधड़ी मामलों में से एक माना जाता है, जिसमें बैंकों के एक विशाल कंसोर्टियम को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिन्हें सुलझाने में जांच एजेंसियों को वर्षों लग जाते हैं। ₹34,615 करोड़ के नुकसान के बावजूद अभी तक की वसूली सीमित रही है — असली सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई बैंकों को वास्तविक राहत दिला पाएगी या केवल कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीएचएफएल लोन घोटाले में ईडी ने कितनी राशि फ्रीज की है?
ईडी ने 19 अगस्त 2026 को की गई तलाशी के दौरान अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई के बैंक खाते में जमा लगभग ₹51.75 करोड़ (5.41 मिलियन अमेरिकी डॉलर) पीएमएलए की धारा 17(1ए) के तहत फ्रीज किए। इसके अलावा कई दस्तावेज और साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं।
डीएचएफएल घोटाले में मुख्य आरोपी कौन हैं?
ईडी के अनुसार, डीएचएफएल के प्रमोटर कपिल वाधवा और धीरज वाधवा मुख्य आरोपियों में शामिल हैं। इन पर 17 बैंकों के कंसोर्टियम के साथ धोखाधड़ी करने और ₹42,871.42 करोड़ की क्रेडिट सुविधाओं का दुरुपयोग करने का आरोप है।
डीएचएफएल मामले में बैंकों को कितना नुकसान हुआ?
ईडी के अनुसार, कंपनी के खातों में हेरफेर कर ऋण राशि को गलत तरीके से अन्य स्थानों पर भेजे जाने से ऋणदाता बैंकों को कथित तौर पर लगभग ₹34,615 करोड़ का नुकसान हुआ। यह मामला 17 बैंकों के कंसोर्टियम से जुड़ा है।
यूके की हर्टमोर हाउस संपत्ति का डीएचएफएल घोटाले से क्या संबंध है?
यूनाइटेड किंगडम स्थित हर्टमोर हाउस संपत्ति कपिल वाधवा की पत्नी वनीता वाधवा के नाम पर थी। जांच के अनुसार, इसे कथित फर्जी देनदारी बनाकर गिरवी रखा गया और बाद में बेचा गया, लेकिन बिक्री की रकम वनीता वाधवा को न देकर अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई के भारतीय बैंक खाते में भेजी गई।
डीएचएफएल मामले में ईडी की जांच का आधार क्या है?
ईडी की जांच सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई, जो यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर 17 बैंकों के कंसोर्टियम की ओर से दायर की गई थी। कार्रवाई पीएमएलए, 2002 के तहत की जा रही है और जांच अभी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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