21 जुलाई 2026
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हिमाचल: पूर्व विधायक होशियार सिंह चंब्याल पर विधायक निधि दुरुपयोग की एफआईआर, 16 कर्मचारियों के खातों से राशि वापसी का आरोप

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हिमाचल: पूर्व विधायक होशियार सिंह चंब्याल पर विधायक निधि दुरुपयोग की एफआईआर, 16 कर्मचारियों के खातों से राशि वापसी का आरोप

सारांश

हिमाचल प्रदेश विजिलेंस ब्यूरो ने देहरा के पूर्व विधायक होशियार सिंह चंब्याल पर विधायक निधि दुरुपयोग की एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि 2023-24 में फैक्ट्री के 16 कर्मचारियों के खातों में ₹50,000-₹50,000 भेजकर वापस ले लिए गए — जो लोकतांत्रिक निधि के सीधे दुरुपयोग का मामला है।

मुख्य बातें

हिमाचल प्रदेश विजिलेंस ब्यूरो ने देहरा के पूर्व विधायक होशियार सिंह चंब्याल के खिलाफ 20 जुलाई को एफआईआर दर्ज की।
एफआईआर धर्मशाला स्थित विजिलेंस थाने में दर्ज की गई है।
2023 से जनवरी 2024 के बीच फैक्ट्री के 16 कर्मचारियों के बैंक खातों में विधायक निधि से ₹50,000-₹50,000 जारी किए गए।
कर्मचारियों का आरोप है कि राशि नकद निकलवाकर पूर्व विधायक के निर्देश पर वापस ली गई।
ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अतिरिक्त धाराएं जोड़ने की संभावना का परीक्षण करने की बात कही है।
राज्य सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत जांच जारी है।

हिमाचल प्रदेश राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने देहरा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक होशियार सिंह चंब्याल के विरुद्ध विधायक ऐच्छिक निधि के कथित दुरुपयोग के मामले में 20 जुलाई को एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि की। धर्मशाला स्थित विजिलेंस थाने में यह मुकदमा शिकायत और प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर दर्ज किया गया है, और विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

शिकायत की पृष्ठभूमि

विजिलेंस ब्यूरो के अनुसार यह शिकायत पूर्व विधायक की एक फैक्ट्री के कर्मचारियों द्वारा दर्ज कराई गई थी, जिनके नाम विधायक ऐच्छिक निधि से जारी आर्थिक सहायता के लाभार्थियों की सूची में शामिल थे। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने इस सहायता के लिए कभी कोई आवेदन नहीं किया था।

आरोपों के अनुसार वर्ष 2023 से जनवरी 2024 के बीच पूर्व विधायक की फैक्ट्री के 16 कर्मचारियों के बैंक खातों में विधायक निधि से ₹50,000-₹50,000 की आर्थिक सहायता जारी की गई। कर्मचारियों का आरोप है कि बैंक खातों में राशि आने के बाद उन्हें नकद निकालकर पूर्व विधायक के निर्देशानुसार वापस सौंपनी पड़ी।

जांच में सामने आए तथ्य

प्रारंभिक जांच के दौरान ब्यूरो ने सरकारी रिकॉर्ड, बैंक खातों के दस्तावेज, लाभार्थियों के बैंक अभिलेख और शिकायतकर्ताओं सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए। ब्यूरो के अनुसार एकत्र किए गए दस्तावेजी साक्ष्यों और बैंक रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि सरकारी धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के विपरीत किया गया और जिन व्यक्तियों के नाम पर सहायता स्वीकृत हुई, उन्हें उसका वास्तविक लाभ नहीं मिला।

आगे की कार्रवाई

विजिलेंस ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और अन्य प्रासंगिक कानूनी धाराएं जोड़ने की संभावना का भी परीक्षण किया जाएगा।

ब्यूरो ने दोहराया है कि पूरी जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित तरीके से की जाएगी। राज्य सरकार की सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत यह कार्रवाई की जा रही है।

आम जनता और राजनीतिक प्रभाव

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब हिमाचल प्रदेश में विधायक निधि के उपयोग की पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। विधायक ऐच्छिक निधि का उद्देश्य आम नागरिकों की व्यक्तिगत ज़रूरतों को पूरा करना होता है, और यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह जन-प्रतिनिधित्व की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाएगा। जांच के नतीजे आगामी राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एफआईआर तक पहुँचना अपेक्षाकृत दुर्लभ है। असली परीक्षा यह होगी कि जांच केवल सीधे आरोपी तक सीमित रहती है या उन संरचनात्मक खामियों की भी पहचान होती है जो ऐसे दुरुपयोग को संभव बनाती हैं। 'जीरो टॉलरेंस' के दावे तभी विश्वसनीय बनते हैं जब जांच बिना राजनीतिक दबाव के तार्किक अंजाम तक पहुँचे।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होशियार सिंह चंब्याल पर क्या आरोप हैं?
पूर्व विधायक होशियार सिंह चंब्याल पर आरोप है कि उन्होंने 2023-24 के दौरान अपनी फैक्ट्री के 16 कर्मचारियों के बैंक खातों में विधायक ऐच्छिक निधि से ₹50,000-₹50,000 जारी करवाए और बाद में वह राशि नकद निकलवाकर वापस ले ली। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने इस सहायता के लिए कोई आवेदन नहीं किया था।
यह एफआईआर कहाँ और कब दर्ज हुई?
यह एफआईआर 20 जुलाई को धर्मशाला स्थित विजिलेंस थाने में दर्ज की गई। हिमाचल प्रदेश राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने शिकायत और प्रारंभिक जांच के आधार पर यह कदम उठाया।
विधायक ऐच्छिक निधि क्या होती है और इसका दुरुपयोग कैसे हुआ?
विधायक ऐच्छिक निधि एक सरकारी राशि होती है जो विधायक अपने क्षेत्र के नागरिकों की व्यक्तिगत ज़रूरतों के लिए स्वीकृत कर सकते हैं। इस मामले में आरोप है कि यह राशि उन लोगों के नाम स्वीकृत की गई जिन्होंने आवेदन ही नहीं किया था, और फिर उनसे नकद वापस ली गई।
जांच में आगे क्या होगा?
विजिलेंस ब्यूरो ने कहा है कि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल होगी। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अतिरिक्त धाराएं जोड़ने की संभावना का भी परीक्षण किया जाएगा।
क्या पूर्व विधायक चंब्याल ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभी तक पूर्व विधायक होशियार सिंह चंब्याल की आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। विजिलेंस ब्यूरो ने कहा है कि जांच साक्ष्य-आधारित और निष्पक्ष तरीके से की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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