हिमाचल: पूर्व विधायक होशियार सिंह चंब्याल पर विधायक निधि दुरुपयोग की एफआईआर, 16 कर्मचारियों के खातों से राशि वापसी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने देहरा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक होशियार सिंह चंब्याल के विरुद्ध विधायक ऐच्छिक निधि के कथित दुरुपयोग के मामले में 20 जुलाई को एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि की। धर्मशाला स्थित विजिलेंस थाने में यह मुकदमा शिकायत और प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर दर्ज किया गया है, और विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
शिकायत की पृष्ठभूमि
विजिलेंस ब्यूरो के अनुसार यह शिकायत पूर्व विधायक की एक फैक्ट्री के कर्मचारियों द्वारा दर्ज कराई गई थी, जिनके नाम विधायक ऐच्छिक निधि से जारी आर्थिक सहायता के लाभार्थियों की सूची में शामिल थे। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने इस सहायता के लिए कभी कोई आवेदन नहीं किया था।
आरोपों के अनुसार वर्ष 2023 से जनवरी 2024 के बीच पूर्व विधायक की फैक्ट्री के 16 कर्मचारियों के बैंक खातों में विधायक निधि से ₹50,000-₹50,000 की आर्थिक सहायता जारी की गई। कर्मचारियों का आरोप है कि बैंक खातों में राशि आने के बाद उन्हें नकद निकालकर पूर्व विधायक के निर्देशानुसार वापस सौंपनी पड़ी।
जांच में सामने आए तथ्य
प्रारंभिक जांच के दौरान ब्यूरो ने सरकारी रिकॉर्ड, बैंक खातों के दस्तावेज, लाभार्थियों के बैंक अभिलेख और शिकायतकर्ताओं सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए। ब्यूरो के अनुसार एकत्र किए गए दस्तावेजी साक्ष्यों और बैंक रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि सरकारी धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के विपरीत किया गया और जिन व्यक्तियों के नाम पर सहायता स्वीकृत हुई, उन्हें उसका वास्तविक लाभ नहीं मिला।
आगे की कार्रवाई
विजिलेंस ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और अन्य प्रासंगिक कानूनी धाराएं जोड़ने की संभावना का भी परीक्षण किया जाएगा।
ब्यूरो ने दोहराया है कि पूरी जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित तरीके से की जाएगी। राज्य सरकार की सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत यह कार्रवाई की जा रही है।
आम जनता और राजनीतिक प्रभाव
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब हिमाचल प्रदेश में विधायक निधि के उपयोग की पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। विधायक ऐच्छिक निधि का उद्देश्य आम नागरिकों की व्यक्तिगत ज़रूरतों को पूरा करना होता है, और यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह जन-प्रतिनिधित्व की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाएगा। जांच के नतीजे आगामी राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकते हैं।