26 जुलाई 2026
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न्यूजक्लिक और प्रबीर पुरकायस्थ को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत, विदेशी फंडिंग मामले में एफआईआर व ईसीआईआर रद्द

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न्यूजक्लिक और प्रबीर पुरकायस्थ को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत, विदेशी फंडिंग मामले में एफआईआर व ईसीआईआर रद्द

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यूजक्लिक और प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ विदेशी फंडिंग मामले में दर्ज एफआईआर और ईसीआईआर रद्द कर दी। अदालत ने कहा — अप्रैल 2018 में निवेश के समय डिजिटल मीडिया में एफडीआई पर कोई सीमा नहीं थी और कानून का दुरुपयोग हुआ।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट ने 11 जून 2026 को न्यूजक्लिक और प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ दर्ज एफआईआर व ईसीआईआर रद्द कर दी।
अदालत ने कहा कि अप्रैल 2018 में निवेश के समय डिजिटल न्यूज मीडिया में एफडीआई पर कोई सीमा लागू नहीं थी।
आईपीसी धारा 406 और धारा 420 के तहत अपराध नहीं बनता — हाईकोर्ट का स्पष्ट निर्धारण।
ईओडब्ल्यू ने वर्ष 2020 में ₹9.59 करोड़ के कथित अवैध विदेशी निवेश का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज किया था।
जाँच एजेंसियों ने चीन से जुड़ी संस्थाओं से कथित फंडिंग और भारत-विरोधी प्रचार के आरोप भी लगाए थे, जिन्हें न्यूजक्लिक ने नकारा था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 11 जून 2026 को विदेशी फंडिंग विवाद में घिरे न्यूज पोर्टल न्यूजक्लिक और उसके एडिटर-इन-चीफ प्रबीर पुरकायस्थ को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज एफआईआर तथा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दर्ज ईसीआईआर को रद्द कर दिया। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस प्रकरण में कानून का दुरुपयोग हुआ है।

अदालत के प्रमुख निष्कर्ष

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि न्यूजक्लिक को प्राप्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) किसी भी प्रचलित कानून का उल्लंघन नहीं करता था। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि जाँच के दौरान ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया जो यह सिद्ध कर सके कि पुरकायस्थ ने किसी व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी की।

कोर्ट ने कहा कि एफआईआर में लगाए गए सभी आरोपों को पूर्णतः सत्य मान लेने पर भी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात) और धारा 420 (धोखाधड़ी) के अंतर्गत कोई अपराध नहीं बनता।

निवेश के समय कानूनी स्थिति

हाईकोर्ट ने एक महत्त्वपूर्ण तथ्य की ओर ध्यान दिलाया कि अप्रैल 2018 में जब संबंधित विदेशी निवेश प्राप्त हुआ था, उस समय डिजिटल न्यूज मीडिया में एफडीआई पर कोई सीमा लागू नहीं थी। यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल मीडिया में विदेशी निवेश को लेकर नियामकीय स्पष्टता का अभाव लंबे समय से बहस का विषय रहा है।

मामले की पृष्ठभूमि

दिल्ली पुलिस की ईओडब्ल्यू ने वर्ष 2020 में न्यूजक्लिक और पुरकायस्थ के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया था। आरोप था कि डिजिटल मीडिया में विदेशी निवेश की कथित 26 प्रतिशत सीमा को दरकिनार करने के लिए कंपनी ने अपने शेयरों का मूल्य बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और विदेशी निवेश के रूप में करीब ₹9.59 करोड़ प्राप्त किए।

जाँच एजेंसियों का यह भी दावा था कि न्यूजक्लिक ने विदेशों — विशेष रूप से चीन से जुड़ी संस्थाओं — से करोड़ों रुपये की कथित अवैध फंडिंग हासिल की। आरोप लगाया गया था कि इस धन का उपयोग भारत-विरोधी माहौल तथा कथित चीनी प्रचार फैलाने के लिए किया गया। न्यूजक्लिक और पुरकायस्थ ने इन सभी आरोपों को शुरू से नकारा था।

आगे की राह

दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले से न्यूजक्लिक और पुरकायस्थ को तत्काल कानूनी राहत मिली है। गौरतलब है कि यह प्रकरण प्रेस स्वतंत्रता और डिजिटल मीडिया में विदेशी निवेश की नियामकीय सीमाओं को लेकर व्यापक बहस का केंद्र रहा है। अब यह देखना होगा कि सरकारी एजेंसियाँ इस फैसले को उच्चतर न्यायालय में चुनौती देती हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

दर्शाता है कि मामले की नींव ही कमज़ोर थी। साथ ही, यह फैसला डिजिटल मीडिया में विदेशी निवेश की नियामकीय अस्पष्टता को उजागर करता है — एक ऐसा क्षेत्र जहाँ नीति निर्माण अभी भी तकनीकी वास्तविकता से पीछे है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के मामले प्रेस स्वतंत्रता पर शीतलन प्रभाव डालते हैं, जबकि सरकारी पक्ष का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े वित्तपोषण की जाँच आवश्यक है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यूजक्लिक मामले में क्या फैसला दिया?
दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यूजक्लिक और प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर और ईडी की ईसीआईआर दोनों को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि इस मामले में कानून का दुरुपयोग हुआ और न्यूजक्लिक को प्राप्त एफडीआई किसी कानून का उल्लंघन नहीं करता था।
न्यूजक्लिक पर क्या आरोप लगाए गए थे?
दिल्ली पुलिस की ईओडब्ल्यू ने 2020 में आरोप लगाया था कि न्यूजक्लिक ने शेयर मूल्य बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हुए कथित 26 प्रतिशत एफडीआई सीमा को दरकिनार किया और ₹9.59 करोड़ का विदेशी निवेश प्राप्त किया। जाँच एजेंसियों ने चीन से जुड़ी संस्थाओं से कथित अवैध फंडिंग और भारत-विरोधी प्रचार के आरोप भी लगाए थे।
अदालत ने आईपीसी धारा 420 और 406 के तहत अपराध क्यों नहीं माना?
हाईकोर्ट ने कहा कि एफआईआर के सभी आरोपों को सत्य मान लेने पर भी आईपीसी की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात) और धारा 420 (धोखाधड़ी) के तत्व पूरे नहीं होते। जाँच में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जो यह सिद्ध करे कि पुरकायस्थ ने किसी व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी की हो।
2018 में डिजिटल मीडिया में एफडीआई पर क्या नियम था?
अप्रैल 2018 में जब संबंधित विदेशी निवेश प्राप्त हुआ, उस समय डिजिटल न्यूज मीडिया में एफडीआई पर कोई सीमा लागू नहीं थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने इसी आधार पर माना कि न्यूजक्लिक द्वारा प्राप्त निवेश तत्कालीन कानून के अनुरूप था।
इस फैसले के बाद आगे क्या हो सकता है?
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से न्यूजक्लिक और पुरकायस्थ को तत्काल कानूनी राहत मिली है। अब यह देखना होगा कि ईओडब्ल्यू या ईडी इस फैसले को उच्चतर न्यायालय में चुनौती देती हैं या नहीं। यह मामला डिजिटल मीडिया में विदेशी निवेश की नियामकीय स्पष्टता पर भविष्य की नीति को भी प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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