न्यूजक्लिक और प्रबीर पुरकायस्थ को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत, एफआईआर व ईसीआईआर रद्द
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 11 जून 2026 को विदेशी फंडिंग मामले में न्यूज पोर्टल न्यूजक्लिक और उसके एडिटर-इन-चीफ प्रबीर पुरकायस्थ को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज एफआईआर और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दर्ज ईसीआईआर दोनों को रद्द कर दिया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस मामले में कानून का दुरुपयोग किया गया है।
अदालत के फैसले के मुख्य बिंदु
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि न्यूजक्लिक को प्राप्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) किसी भी प्रचलित कानून का उल्लंघन नहीं करता था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जाँच के दौरान ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया जो यह सिद्ध कर सके कि पुरकायस्थ ने किसी व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी की थी।
न्यायालय ने यह भी कहा कि एफआईआर में लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह सत्य मान लेने पर भी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात) और धारा 420 (धोखाधड़ी) के अंतर्गत कोई अपराध नहीं बनता।
एफडीआई नियमों पर अहम टिप्पणी
अदालत ने एक महत्वपूर्ण तथ्य की ओर ध्यान दिलाया कि अप्रैल 2018 में जब संबंधित निवेश प्राप्त हुआ था, उस समय डिजिटल न्यूज मीडिया में विदेशी निवेश पर कोई सीमा लागू नहीं थी। यह टिप्पणी मामले की कानूनी बुनियाद को सीधे चुनौती देती है।
मामले की पृष्ठभूमि
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने वर्ष 2020 में न्यूजक्लिक और पुरकायस्थ के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप था कि डिजिटल मीडिया में विदेशी निवेश की कथित 26 प्रतिशत सीमा को दरकिनार करने के लिए कंपनी ने अपने शेयरों का मूल्य बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और विदेशी निवेश के रूप में करीब ₹9.59 करोड़ प्राप्त किए।
जाँच एजेंसियों का यह भी दावा था कि न्यूजक्लिक ने विदेशों, विशेष रूप से चीन से जुड़ी संस्थाओं से करोड़ों रुपए की कथित अवैध फंडिंग हासिल की थी। आरोप यह भी लगाया गया था कि इस धन का उपयोग भारत-विरोधी माहौल और कथित चीनी प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए किया गया — हालाँकि ये सभी आरोप अब अदालत द्वारा कानूनी कसौटी पर खरे नहीं पाए गए।
मीडिया स्वतंत्रता पर व्यापक असर
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब डिजिटल मीडिया संस्थानों पर जाँच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर पत्रकारिता जगत में चिंता का माहौल रहा है। गौरतलब है कि पुरकायस्थ अक्टूबर 2023 से इस मामले में गिरफ्तारी और कानूनी कार्यवाही का सामना कर रहे थे। हाईकोर्ट का यह निर्णय डिजिटल न्यूज पोर्टलों पर लागू एफडीआई नियमों की व्याख्या के लिए एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल बन सकता है।
आगे की राह
एफआईआर और ईसीआईआर रद्द होने के बाद अब यह देखना होगा कि सरकारी एजेंसियाँ इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देती हैं या नहीं। न्यूजक्लिक और पुरकायस्थ के लिए यह फैसला तत्काल कानूनी राहत का प्रतीक है, लेकिन मामले का अंतिम अध्याय अभी लिखा जाना बाकी है।