ईडी ने आईजोल में ₹146 करोड़ के फर्जी वाहन ऋण घोटाले में जाकिर हुसैन समेत 14 पर आरोप पत्र दाखिल किया
सारांश
Key Takeaways
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 30 अप्रैल 2025 को आईजोल की एक विशेष अदालत में जाकिर हुसैन और 13 अन्य आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 3 के तहत अभियोग पत्र दाखिल किया। यह मामला महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (एमएमएफएसएल) के साथ कथित तौर पर की गई ₹146.67 करोड़ की धोखाधड़ी वाले वाहन ऋण घोटाले से जुड़ा है, जिसमें सैकड़ों फर्जी ग्राहक प्रोफाइल बनाकर बिना किसी वास्तविक वाहन बिक्री के ऋण राशि हड़पी गई।
घोटाले का मुख्य घटनाक्रम
ईडी ने मिजोरम पुलिस द्वारा दर्ज दो एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। पहली एफआईआर 20 मार्च 2024 को आइजोल पुलिस स्टेशन में एमएमएफएसएल के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता की शिकायत पर दर्ज की गई, जबकि दूसरी एफआईआर 29 मार्च 2024 को सी एंड ईओ पुलिस स्टेशन में एमएमएफएसएल के बिजनेस हेड की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई। इसके बाद मिजोरम पुलिस ने सक्षम न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किए।
पीएमएलए के तहत जांच में सामने आया कि जाकिर हुसैन, जो एमएमएफएसएल की आइजोल शाखा में एरिया बिजनेस मैनेजर के पद पर कार्यरत था, इस संगठित धोखाधड़ी का मुख्य सूत्रधार था। उसने कार डीलरों, एमएमएफएसएल कर्मचारियों और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर आधार कार्ड, वोटर आईडी और आय प्रमाण पत्र जैसे जाली केवाईसी दस्तावेजों के आधार पर सैकड़ों फर्जी ग्राहक प्रोफाइल तैयार कीं।
फर्जी ऋण फाइलों का जाल
ईडी के अनुसार, मुख्य आरोपी जाकिर हुसैन ने स्वयं स्वीकार किया कि उसने 600 से अधिक फर्जी ऋण फाइलों का प्रबंधन किया, जबकि सह-आरोपी प्रोलोय दास ने लगभग 1,200 और फाइलें तैयार कीं। चार आरोपी कार डीलर — मेसर्स सीके कार्स, मेसर्स राफेल निसान (मेसर्स हाइलैंड), मेसर्स एआईडीयू मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स नेशनल बिजनेस एंटरप्राइजेज — के माध्यम से इन फर्जी खातों में कुल ₹146.67 करोड़ की ऋण राशि वितरित की गई।
फर्जी ऋण फाइलों का टेली-सत्यापन फर्जी पहचान पर प्राप्त अस्थायी सिम कार्डों से किया गया, जिन्हें बाद में सबूत नष्ट करने के लिए फेंक दिया गया। गौरतलब है कि अपराध की आय का एक हिस्सा — लगभग ₹71.34 करोड़ — जानबूझकर एमएमएफएसएल को ईएमआई भुगतान के रूप में वापस भेजा गया, ताकि फर्जी ऋण खाते असली दिखें और धोखाधड़ी लंबे समय तक जारी रह सके।
धन शोधन का तरीका
अपराध की कमाई को छिपाने के लिए जाकिर हुसैन ने आरोपी एच. लालथंकिमा और एडेंथारा के साथ मिलकर एमएमएफएसएल से मिलते-जुलते नामों — जैसे महिंद्रा फाइनेंस लिमिटेड, महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज, मिजोरम रूरल बैंक — से फर्जी बैंक खाते खोले। ईडी के अनुसार, इन दो फर्जी खातों में कुल लगभग ₹87.13 करोड़ जमा किए गए, जिसमें से ₹75.34 करोड़ सीधे आरोपी कार डीलरों द्वारा जमा किए गए। अपराध से अर्जित और गबन की गई कुल धनराशि लगभग ₹75.33 करोड़ आंकी गई है।
इस धनराशि को ऐजोल (मिजोरम), तेजपुर, नागांव, सिलचर और बालिपारा (असम) में अचल संपत्तियों में निवेश किया गया — जो बेनामी व्यवस्था के तहत जाकिर हुसैन की पत्नी, भाई, बहनोई और अन्य सहयोगियों के नाम पर थीं। इसके अलावा लगभग ₹2.06 करोड़ की जीवन बीमा पॉलिसियों और तीसरे पक्ष के नाम पर खरीदी गई महंगी गाड़ियों में भी निवेश किया गया। पंजीकृत विक्रय विलेखों में लेनदेन मूल्यों को जानबूझकर कम दर्शाया गया, लेकिन सरकार द्वारा अनुमोदित मूल्यांकनकर्ताओं ने कई संपत्तियों का मूल्यांकन घोषित मूल्य से काफी अधिक पाया।
तलाशी और कुर्की
12 फरवरी 2025 को पीएमएलए की धारा 17(1) के तहत नौ परिसरों पर तलाशी ली गई, जिसमें आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए। ईडी ने पीएमएलए की धारा 5 के तहत तीन अस्थायी कुर्की आदेशों के जरिए लगभग ₹35.62 करोड़ की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। कुर्क संपत्तियों में मिजोरम और असम में स्थित अचल संपत्तियां, विभिन्न बैंक खातों में जमा राशि, बीमा पॉलिसियां और दो वाहन — किआ सेल्टोस और हुंडई अल्काज़ार — शामिल हैं।
आगे क्या होगा
आईजोल की विशेष अदालत में अभियोग पत्र दाखिल होने के बाद अब सभी 14 आरोपियों पर पीएमएलए की धारा 4 के तहत मुकदमा चलेगा। यह मामला उत्तर-पूर्व भारत में वित्तीय संस्थाओं के भीतर से संगठित धोखाधड़ी की एक गंभीर मिसाल है, और जांच एजेंसियों के लिए अंतर-राज्यीय मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को तोड़ने की चुनौती को रेखांकित करती है।