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हिमाचल: देहरा के पूर्व विधायक होशियार सिंह चंब्याल पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग में एफआईआर

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हिमाचल: देहरा के पूर्व विधायक होशियार सिंह चंब्याल पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग में एफआईआर

सारांश

हिमाचल प्रदेश के देहरा के पूर्व विधायक होशियार सिंह चंब्याल की मुश्किलें बढ़ गई हैं — सतर्कता ब्यूरो ने अनुदान योजना के तहत 2023-24 में कथित रूप से फर्जी लाभार्थियों के नाम पर धन निकलवाने और उसे वापस लेने के आरोप में धर्मशाला में एफआईआर दर्ज की है।

मुख्य बातें

हिमाचल प्रदेश के सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 20 जुलाई को धर्मशाला में एफआईआर दर्ज की।
आरोप: 2023-24 में अनुदान योजना के तहत कुछ व्यक्तियों के नाम पर वित्तीय सहायता जारी की गई, जिन्होंने कथित तौर पर आवेदन ही नहीं किया था।
लाभार्थियों ने कथित रूप से बैंक से नकद निकालकर राशि पूर्व विधायक होशियार सिंह चंब्याल को सौंपी।
प्रथम दृष्टया आपराधिक न्यासभंग और छल के तत्व पाए गए हैं।
जांच में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अतिरिक्त अपराधों की संभावना भी परखी जाएगी।

हिमाचल प्रदेश के देहरा विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक होशियार सिंह चंब्याल के खिलाफ 20 जुलाई को राज्य के सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के मामले में धर्मशाला में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है। यह शिकायत चंब्याल की एक कंपनी के कर्मचारियों द्वारा दी गई थी, जिसके बाद ब्यूरो ने प्रारंभिक जांच शुरू की।

मामले का मूल आरोप

जांच अधिकारियों के अनुसार, 2023 और 2024 के दौरान अनुदान योजना के अंतर्गत कुछ व्यक्तियों के नाम पर वित्तीय सहायता स्वीकृत और जारी की गई। कथित तौर पर इन व्यक्तियों ने — जिनमें शिकायतकर्ता भी शामिल हैं — ऐसी किसी सहायता के लिए आवेदन ही नहीं किया था।

जांच के दौरान लाभार्थियों ने कथित रूप से यह बयान दिया कि सहायता राशि उनके बैंक खातों में आने के बाद उन्हें नकद निकालकर पूर्व विधायक के निर्देशानुसार सौंपने के लिए कहा गया।

साक्ष्य और प्रथम दृष्टया निष्कर्ष

अधिकारियों ने बताया कि उपलब्ध अभिलेखों, लाभार्थियों के बैंक अभिलेखों, सरकारी दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों की जांच की गई। दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह स्थापित हुआ कि सरकारी धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के विपरीत किया गया और लाभार्थियों के नाम पर स्वीकृत राशि का वास्तविक लाभ उन्हें प्राप्त नहीं हुआ।

गौरतलब है कि उपलब्ध सामग्री से प्रथम दृष्टया आपराधिक न्यासभंग और छल से संबंधित अपराधों के तत्व सामने आए हैं, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज कर विधिसम्मत अन्वेषण प्रारंभ किया गया है।

जांच का दायरा और आगे की कार्रवाई

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अन्वेषण के दौरान प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर अन्य व्यक्तियों की भूमिका तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अथवा अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत किसी अतिरिक्त अपराध की संभावना का भी परीक्षण किया जाएगा।

ब्यूरो ने यह भी कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित ढंग से की जाएगी तथा किसी भी व्यक्ति की जवाबदेही का निर्धारण केवल उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के अनुरूप होगा।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों पर सतर्कता ब्यूरो की सक्रियता बढ़ी है। देहरा विधानसभा क्षेत्र से संबद्ध चंब्याल पर लगे आरोप अभी आरोप के स्तर पर हैं और न्यायालय में उनकी दोषसिद्धि नहीं हुई है। आगे की जांच में मामले की परतें और खुलने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वास्तविक नियंत्रण कहीं और होता है। हिमाचल में ऐसे मामले पहले भी सामने आए हैं, फिर भी अनुदान सत्यापन का तंत्र अभी भी कमज़ोर बना हुआ है। असली परीक्षा यह होगी कि जांच केवल एक पूर्व विधायक तक रुकती है या उस पूरी श्रृंखला तक पहुँचती है जिसने इस कथित व्यवस्था को चलने दिया।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होशियार सिंह चंब्याल पर क्या आरोप हैं?
पूर्व विधायक होशियार सिंह चंब्याल पर आरोप है कि 2023-24 में अनुदान योजना के तहत कुछ व्यक्तियों के नाम पर सरकारी वित्तीय सहायता स्वीकृत करवाई गई और लाभार्थियों से नकद निकालकर वह राशि उनके निर्देशानुसार उन्हें सौंपवाई गई। ये आरोप अभी जांच के दायरे में हैं।
एफआईआर किसने और कहाँ दर्ज की?
हिमाचल प्रदेश के सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 20 जुलाई को धर्मशाला में यह एफआईआर दर्ज की। शिकायत चंब्याल की एक कंपनी के कर्मचारियों ने दी थी।
इस मामले में किन धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है?
प्रथम दृष्टया आपराधिक न्यासभंग और छल से संबंधित अपराधों के तत्व पाए गए हैं। जांच के दौरान भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम या अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत अतिरिक्त अपराधों की संभावना भी परखी जाएगी।
क्या लाभार्थियों ने वास्तव में अनुदान के लिए आवेदन किया था?
जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता समेत संबंधित व्यक्तियों ने कथित तौर पर ऐसी किसी वित्तीय सहायता के लिए आवेदन नहीं किया था। उनके नाम पर राशि स्वीकृत और जारी की गई, जो अनुदान वितरण प्रक्रिया में गड़बड़ी का संकेत देता है।
आगे जांच में क्या होगा?
ब्यूरो के अनुसार जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित होगी। अन्य व्यक्तियों की भूमिका और अतिरिक्त कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की संभावना भी परखी जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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