डीए मामले में सुधीर शर्मा से सतर्कता ब्यूरो की पूछताछ, बोले — विधानसभा सत्र में पूछताछ राजनीतिक प्रतिशोध
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश के भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक और पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा से 21 अगस्त को आय से अधिक संपत्ति (डीए) मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने शिमला स्थित मुख्यालय में पूछताछ की। पूछताछ के बाद शर्मा ने कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे विधानसभा सत्र के दौरान विपक्षी विधायकों को दबाने की 'राजनीतिक प्रतिशोध' की कार्रवाई बताया।
पूछताछ का घटनाक्रम
शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग दिया है। उन्होंने कहा, 'हम कानून का पालन करने वाले लोग हैं। जो भी तथ्य हैं, वे अंततः हिमाचल प्रदेश की जनता के सामने आएंगे। हमारे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और मैं जांच में पूरा सहयोग करता रहूंगा।' उन्होंने बताया कि सतर्कता विभाग द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज और तथ्य उपलब्ध करा दिए गए हैं।
पूछताछ के समय और स्थान पर सवाल
शर्मा ने पूछताछ की प्रक्रिया और स्थान को लेकर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि यह मामला धर्मशाला से जुड़ा है और उससे संबंधित सभी रिकॉर्ड भी वहीं उपलब्ध हैं, फिर भी उन्हें शिमला स्थित सतर्कता मुख्यालय बुलाया गया। उन्होंने कहा, 'जब मामला धर्मशाला का है और दस्तावेज वहीं हैं, तो मुझे शिमला क्यों बुलाया गया? इतनी जल्दबाजी की क्या जरूरत थी? हर जांच की एक प्रक्रिया और प्रोटोकॉल होता है, जिसका पालन होना चाहिए।'
राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
BJP विधायक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार विधानसभा में विपक्ष द्वारा जनहित के मुद्दे उठाए जाने से घबराकर विपक्षी विधायकों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, 'चलते हुए विधानसभा सत्र के दौरान किसी विधायक को इस तरह बुलाना अभूतपूर्व है। मौजूदा सरकार विपक्ष की आवाज दबाने पर आमादा दिखाई देती है, लेकिन यह रवैया ज्यादा दिन नहीं चल सकता।'
सुधीर शर्मा की राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि सुधीर शर्मा उन छह कांग्रेस विधायकों में शामिल थे जिन्होंने 2024 के राज्यसभा चुनाव में तीन निर्दलीय विधायकों के साथ BJP उम्मीदवार हर्ष महाजन के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़कर BJP का दामन थाम लिया और उपचुनाव लड़ा। नौ सीटों पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने छह और BJP ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की। यह पृष्ठभूमि दोनों दलों के बीच तनाव को समझने के लिए अहम है।
आगे क्या होगा
फिलहाल सतर्कता ब्यूरो की ओर से इस पूछताछ पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। शर्मा ने स्पष्ट किया है कि वे जांच में सहयोग जारी रखेंगे। यह मामला हिमाचल प्रदेश की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव का नया केंद्र बन सकता है, खासकर तब जब विधानसभा सत्र अभी जारी है।