14 अगस्त 2026
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संसद मॉनसून सत्र में व्यवधान: शिवसेना के संजय निरुपम ने राहुल गांधी को ठहराया जिम्मेदार

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संसद मॉनसून सत्र में व्यवधान: शिवसेना के संजय निरुपम ने राहुल गांधी को ठहराया जिम्मेदार

सारांश

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने मॉनसून सत्र के पूरी तरह ठप रहने का ठीकरा राहुल गांधी पर फोड़ा — 'एक दिन भी कार्यवाही नहीं हुई।' साथ ही जॉर्जिया मेलोनी पर कथित टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी की राजनीतिक परिपक्वता पर सवाल उठाए और विभाजन की त्रासदी को याद करने की जरूरत पर जोर दिया।

मुख्य बातें

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 14 अगस्त को संसद के मॉनसून सत्र में व्यवधान के लिए विपक्ष और राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया।
निरुपम के अनुसार, लोकसभा में एक भी दिन कार्यवाही नहीं हुई, जिससे सरकारी खजाने पर आर्थिक बोझ पड़ा।
उन्होंने इसे 'लोकतंत्र का मजाक' और 'संसदीय जनतंत्र का मजाक' बताया।
जॉर्जिया मेलोनी पर राहुल गांधी की कथित टिप्पणी को निरुपम ने नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा के विरुद्ध बताया।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर निरुपम ने 1947 की त्रासदी को याद करने और आने वाली पीढ़ियों को इससे सीख लेने की अपील की।

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 14 अगस्त 2026 को संसद के मॉनसून सत्र में हुए कथित व्यवधान के लिए विपक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। निरुपम के अनुसार, विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही एक भी दिन सुचारू रूप से नहीं चल सकी, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और सरकारी खजाने दोनों को नुकसान पहुँचा।

संसदीय व्यवधान पर निरुपम का आरोप

निरुपम ने कहा, 'मॉनसून सत्र पूरी तरह से धो डाला गया। लोकसभा में एक भी दिन कार्यवाही नहीं हुई।' उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष का संवैधानिक दायित्व सरकार से सवाल पूछना और जनता के मुद्दे उठाना है, लेकिन लगातार व्यवधान पैदा करना संसदीय लोकतंत्र के मूल उद्देश्य के विरुद्ध है। उन्होंने इसे 'लोकतंत्र का मजाक' और 'संसदीय जनतंत्र का मजाक' करार दिया।

निरुपम ने यह भी कहा कि देश की आम जनता अपने चुने हुए प्रतिनिधियों से उम्मीद रखती है कि वे सदन में उनकी समस्याओं को मजबूती से उठाएंगे। उनके अनुसार, सदन का बाधित होना न केवल सरकारी खजाने पर आर्थिक बोझ डालता है, बल्कि जनता की उम्मीदों के साथ भी अन्याय है।

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर विचार

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के संदर्भ में निरुपम ने 1947 की त्रासदी को याद किया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 को देश की आजादी से पहले भारत ने विभाजन की भयावह परिस्थितियों का सामना किया था। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े, व्यापक सांप्रदायिक हिंसा हुई और महिलाओं के खिलाफ हिंसा की दर्दनाक घटनाएं भी इतिहास में दर्ज हैं।

निरुपम ने कहा कि विभाजन की त्रासदी को याद करना किसी समुदाय के प्रति नफरत फैलाने के लिए नहीं, बल्कि इतिहास की भयावह घटनाओं से सीख लेकर भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए जरूरी है। उनके अनुसार, आने वाली पीढ़ियों को उस दौर के दर्द और पीड़ा की जानकारी होनी चाहिए।

राहुल गांधी की कथित टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर राहुल गांधी की ओर से की गई कथित टिप्पणी पर निरुपम ने तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के पद पर रहते हुए राहुल गांधी को यह समझना चाहिए कि किस मुद्दे पर, किसके बारे में और किस सीमा तक बोलना उचित है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।

निरुपम ने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष के बयानों का राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभाव पड़ता है, इसलिए राहुल गांधी को अपने शब्दों को लेकर अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

मीम्स और सोशल मीडिया पर आपत्ति

सोशल मीडिया पर जॉर्जिया मेलोनी और प्रधानमंत्री मोदी को लेकर बनाए जा रहे कथित मजाकिया मीम्स पर भी निरुपम ने कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि इस तरह की सामग्री न केवल भारत के प्रधानमंत्री का अपमान करती है, बल्कि इटली जैसे देश की महिला प्रधानमंत्री की गरिमा को भी प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे वरिष्ठ राजनेता द्वारा किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के बारे में की गई टिप्पणी के अंतरराष्ट्रीय प्रभावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

आगे की राजनीतिक स्थिति

निरुपम के इन बयानों से स्पष्ट है कि शिवसेना और सत्तारूढ़ गठबंधन मॉनसून सत्र के व्यवधान को आगामी राजनीतिक बहस में एक प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाने की तैयारी में है। संसद के अगले सत्र से पहले विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच इस मुद्दे पर टकराव और तेज होने के संकेत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अब उसे कूटनीतिक संवेदनशीलता से जोड़ा जा रहा है। विभाजन की त्रासदी का संदर्भ स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर भावनात्मक रूप से प्रासंगिक है, लेकिन इसे राजनीतिक बयानबाजी के साथ जोड़ने से इसकी गंभीरता कम होने का जोखिम है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय निरुपम ने मॉनसून सत्र में व्यवधान के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया?
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने संसद के मॉनसून सत्र में व्यवधान के लिए विपक्ष और विशेष रूप से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया। उनके अनुसार, विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा में एक भी दिन कार्यवाही नहीं हो सकी।
निरुपम ने संसद के बाधित होने को लोकतंत्र के लिए क्यों खतरनाक बताया?
निरुपम का कहना था कि जनता अपने प्रतिनिधियों को इसलिए संसद भेजती है ताकि वे उनकी समस्याओं को सदन में उठाएं। सदन के लगातार बाधित होने से जनता की उम्मीदों के साथ अन्याय होता है और सरकारी खजाने पर भी आर्थिक बोझ पड़ता है।
जॉर्जिया मेलोनी पर राहुल गांधी की कथित टिप्पणी को लेकर निरुपम ने क्या कहा?
निरुपम ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के पद पर रहते हुए राहुल गांधी को यह समझना चाहिए कि किस मुद्दे पर किस सीमा तक बोलना उचित है। उनके अनुसार, किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के बारे में की गई टिप्पणी के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव होते हैं और नेता प्रतिपक्ष को इस बारे में अधिक सावधान रहना चाहिए।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर निरुपम ने क्या संदेश दिया?
निरुपम ने 1947 के विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए कहा कि इसे याद करना किसी समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए नहीं, बल्कि इतिहास से सीख लेने के लिए जरूरी है। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों को उस दौर के दर्द और पीड़ा की जानकारी देने पर जोर दिया।
क्या शिवसेना ने संसद व्यवधान के मुद्दे पर आगे कोई कार्रवाई की बात कही है?
संजय निरुपम के बयानों से संकेत मिलता है कि शिवसेना और सत्तारूढ़ गठबंधन इस मुद्दे को आगामी राजनीतिक बहस में उठाने की तैयारी में हैं। हालांकि किसी ठोस कार्रवाई का ऐलान अभी तक नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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